पाठ 3: फूल और काँटा — सार, कवि परिचय, शब्दार्थ और प्रश्न उत्तर
कक्षा 7 हिंदी की पाठ्यपुस्तक 'मल्हार भाग 2 (नवीन)' का पाठ 3 'फूल और काँटा' (कविता)। यहाँ इस पाठ की पुस्तक, समाधान, वर्कशीट के साथ सार, कवि परिचय, शब्दार्थ और प्रश्न उत्तर दिए गए हैं।
लेखक: ज्ञान आर्काइव अद्यतन: 1 नवंबर 2026
इस पाठ की सामग्री
पाठ का सार
'फूल और काँटा' अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की प्रसिद्ध कविता है। फूल और काँटा एक ही पौधे पर, एक ही जगह जन्म लेते हैं। चाँद की चाँदनी, बादल का पानी और हवा — सब दोनों को एक समान मिलते हैं। फिर भी दोनों का स्वभाव बिलकुल अलग होता है। काँटा किसी की उँगलियाँ छेद देता है, सुंदर कपड़े फाड़ देता है, तितलियों के पंख काट देता है और भौंरे का शरीर बेध देता है। इसके विपरीत फूल तितलियों को गोद में बिठाता है, भौंरे को अपना रस पिलाता है और अपनी सुगंध व रंगों से सबका मन खिला देता है।
इसीलिए काँटा सबकी आँखों में खटकता है और फूल देवताओं तथा सज्जनों के सिर पर शोभा पाता है। कविता का संदेश है कि ऊँचे कुल में जन्म लेने से कोई बड़ा नहीं बनता — यदि व्यक्ति में बड़प्पन (अच्छे गुण, अच्छा स्वभाव और अच्छे कर्म) न हो तो कुल की बड़ाई किसी काम की नहीं। मनुष्य की असली पहचान उसके स्वभाव और कर्मों से होती है।
कविता — फूल और काँटा
हैं जनम लेते जगह में एक ही,
एक ही पौधा उन्हें है पालता।
रात में उन पर चमकता चाँद भी,
एक ही सी चाँदनी है डालता।मेह उन पर है बरसता एक सा,
एक सी उन पर हवायें हैं बही।
पर सदा ही यह दिखाता है हमें,
ढंग उनके एक से होते नहीं।छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ,
फाड़ देता है किसी का वर बसन।
प्यार-डूबी तितलियों का पर कतर,
भौंर का है बेध देता श्याम तन।फूल लेकर तितलियों को गोद में,
भौंर को अपना अनूठा रस पिला।
निज सुगंधों औ निराले रंग से,
है सदा देता कली जी की खिला।है खटकता एक सब की आँख में,
दूसरा है सोहता सुर शीश पर।
किस तरह कुल की बड़ाई काम दे,
जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।— अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
कवि से परिचय
अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' (1865–1947) का जन्म आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। बच्चों की प्रसिद्ध कविता 'उठो लाल, अब आँखें खोलो। पानी लाई हूँ, मुँह धो लो।' भी उन्हीं की रचना है। उनकी चर्चित काव्य-कृति प्रियप्रवास को खड़ी बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है। उन्होंने बच्चों के लिए अनेक रोचक कविताएँ लिखीं; उनके बाल-कविता संकलनों में चंद्र-खिलौना और खेल-तमाशा उल्लेखनीय हैं।
कठिन शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| जनम | जन्म |
| पालता | पालन-पोषण करता |
| एक ही सी | एक जैसी, एक समान |
| मेह | मेघ, बादल; वर्षा |
| बही | बहीं, चलीं |
| सदा | हमेशा |
| ढंग | स्वभाव, व्यवहार |
| वर | श्रेष्ठ, सुंदर |
| बसन | वस्त्र, कपड़ा |
| प्यार-डूबी | प्यार में डूबी हुई |
| पर | पंख |
| कतर | काटकर |
| भौंर | भौंरा, भ्रमर |
| बेध देता | छेद देता, घायल कर देता |
| श्याम तन | काला शरीर |
| अनूठा | अनोखा, निराला |
| निज | अपना |
| औ | और |
| निराले | अनोखे, सुंदर |
| कली जी की खिला देना | मन प्रसन्न कर देना |
| खटकना | चुभना, बुरा लगना |
| सोहता | शोभा पाता है |
| सुर | देवता |
| शीश | सिर |
| कुल | वंश, परिवार |
| बड़ाई | बड़ा होने का भाव, प्रतिष्ठा |
| बड़प्पन | श्रेष्ठता, महानता, गौरव |
| कसर | कमी |
कविता की व्याख्या
पद 1: "हैं जनम लेते जगह में एक ही ... एक ही सी चाँदनी है डालता।"
व्याख्या — कवि कहते हैं कि फूल और काँटा एक ही जगह पर जन्म लेते हैं। एक ही पौधा दोनों का पालन-पोषण करता है। रात में चाँद भी दोनों पर एक जैसी चाँदनी बिखेरता है। अर्थात् दोनों को एक समान परिवेश और देखभाल मिलती है।
पद 2: "मेह उन पर है बरसता एक सा ... ढंग उनके एक से होते नहीं।"
व्याख्या — बादल दोनों पर एक समान बरसते हैं और हवा भी दोनों पर एक समान बहती है। फिर भी हमेशा यही दिखाई देता है कि दोनों का स्वभाव और व्यवहार एक जैसा नहीं होता। कहने का आशय है कि एक समान पालन-पोषण होने पर भी हर किसी का स्वभाव अलग हो सकता है।
पद 3: "छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ ... भौंर का है बेध देता श्याम तन।"
व्याख्या — यहाँ कवि काँटे के हानिकारक स्वभाव का वर्णन करते हैं। काँटा किसी की उँगलियों में चुभ जाता है, किसी के सुंदर वस्त्र फाड़ देता है, प्यार में डूबी तितलियों के पंख काट देता है और भौंरे के काले शरीर को बेध देता है। अर्थात् काँटा सबको कष्ट ही देता है।
पद 4: "फूल लेकर तितलियों को गोद में ... है सदा देता कली जी की खिला।"
व्याख्या — इसके विपरीत फूल तितलियों को अपनी गोद में बिठा लेता है और भौंरे को अपना अनोखा रस पिलाता है। अपनी सुगंध और अनोखे रंगों से वह सदा सबका मन प्रसन्न कर देता है। अर्थात् फूल सबको सुख और आनंद देता है।
पद 5: "है खटकता एक सब की आँख में ... जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।"
व्याख्या — इसीलिए काँटा सबकी आँखों में खटकता है, जबकि फूल देवताओं के सिर पर चढ़कर शोभा पाता है। कवि प्रश्न करते हैं कि यदि किसी व्यक्ति में बड़प्पन (अच्छे गुणों) की कमी हो तो उसके कुल की बड़ाई उसके किस काम आएगी? अर्थात् मनुष्य का सम्मान उसके कुल से नहीं, उसके गुणों और कर्मों से होता है।
पाठ से
मेरी समझ से
(क) कविता के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उनके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) कविता में काँटे के बारे में कौन-सा वाक्य सत्य है?
- काँटा अपने आस-पास की सुगंध को नष्ट करता है।
- काँटा तितलियों और भौंरों को आकर्षित करता है।
- काँटा उँगलियों को छेदता है और वस्त्र फाड़ देता है। ★
- काँटा पौधे को हानि पहुँचाता है।
उत्तर — काँटा उँगलियों को छेदता है और वस्त्र फाड़ देता है।
(2) कविता में फूल और काँटे में समानताओं और विभिन्नताओं का उल्लेख किया गया है। निम्नलिखित में से कौन-सा वाक्य इन्हें सही रूप में व्यक्त करता है?
- फूल सुंदरता का प्रतीक है और काँटा कठोरता का।
- फूल और काँटे के बारे में लोगों के विचार समान होते हैं।
- फूल और काँटे एक ही पौधे पर उगते हैं, लेकिन उनके स्वभाव भिन्न होते हैं। ★
- फूल और काँटे को समान देखभाल मिलती है फिर भी उनके रंग-ढंग अलग होते हैं। ★
उत्तर — फूल और काँटे एक ही पौधे पर उगते हैं, लेकिन उनके स्वभाव भिन्न होते हैं; तथा फूल और काँटे को समान देखभाल मिलती है फिर भी उनके रंग-ढंग अलग होते हैं।
(3) कविता के आधार पर कौन-सा निष्कर्ष उपयुक्त है? परीक्षा में महत्वपूर्ण
- व्यक्ति का कुल ही उसके सम्मान का आधार होता है।
- व्यक्ति के कार्यों के कारण ही लोग उसका सम्मान करते हैं। ★
- कुल की प्रतिष्ठा हमेशा व्यक्ति के गुणों से बड़ी होती है।
- यदि व्यक्ति अच्छे कार्य करता है तो उसके कुल को प्रसिद्धि मिलती है। ★
उत्तर — व्यक्ति के कार्यों के कारण ही लोग उसका सम्मान करते हैं; तथा यदि व्यक्ति अच्छे कार्य करता है तो उसके कुल को प्रसिद्धि मिलती है।
(4) कविता के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कथन 'बड़प्पन' के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है? परीक्षा में महत्वपूर्ण
- धन-दौलत और ताकत से व्यक्ति के बड़प्पन का पता चलता है।
- कुल के बड़प्पन की प्रशंसा व्यक्ति की कमियों को ढक देती है।
- बड़प्पन व्यक्ति के गुणों, स्वभाव और कर्मों से पहचाना जाता है। ★
- कुल का नाम व्यक्ति में बड़प्पन की पहचान का मुख्य आधार है।
उत्तर — बड़प्पन व्यक्ति के गुणों, स्वभाव और कर्मों से पहचाना जाता है।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग या एक से अधिक उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें?
उत्तर — (नमूना उत्तर) हमने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि —
- कविता में साफ़ लिखा है कि काँटा उँगलियाँ छेदता है और वस्त्र फाड़ देता है; सुगंध नष्ट करने या पौधे को हानि पहुँचाने की बात कविता में नहीं है।
- फूल और काँटा एक ही पौधे पर उगते हैं और उन्हें एक जैसी चाँदनी, वर्षा और हवा मिलती है, फिर भी दोनों का स्वभाव अलग है।
- कविता की अंतिम पंक्तियाँ बताती हैं कि बड़प्पन न हो तो कुल की बड़ाई काम नहीं आती; यानी सम्मान व्यक्ति के कार्यों से मिलता है।
- बड़प्पन का अर्थ अच्छे गुण, अच्छा स्वभाव और अच्छे कर्म हैं — धन, ताकत या कुल का नाम नहीं।
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए—
(क) "मेह उन पर है बरसता एक सा, एक सी उन पर हवायें हैं बही। पर सदा ही यह दिखाता है हमें, ढंग उनके एक से होते नहीं।" परीक्षा में महत्वपूर्ण
उत्तर — बादल फूल और काँटे दोनों पर एक समान बरसते हैं और हवा भी दोनों पर एक समान बहती है। परिस्थितियाँ एक जैसी होने पर भी दोनों का स्वभाव अलग होता है — फूल सुख देता है और काँटा दुख। इसी प्रकार एक जैसे वातावरण में पले-बढ़े लोगों का स्वभाव और व्यवहार भी अलग-अलग हो सकता है। मनुष्य का अपना स्वभाव ही तय करता है कि वह दूसरों को फूल की तरह खुशी देगा या काँटे की तरह दुख।
(ख) "किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।" परीक्षा में महत्वपूर्ण
उत्तर — केवल ऊँचे कुल में जन्म लेना किसी की सच्ची विशेषता नहीं है। यदि व्यक्ति में विनम्रता, दया, दूसरों की सहायता करने जैसे गुण नहीं हैं तो उसके कुल की बड़ाई उसके किसी काम नहीं आती। जैसे — रावण ज्ञानी, शक्तिशाली और ऊँचे कुल का था, फिर भी अपने घमंड और अधर्म के कारण नष्ट हो गया; जबकि श्रीराम अपने अच्छे आचरण, धैर्य और धर्म के कारण महान कहलाए। इसलिए मनुष्य को कुल का घमंड न करके अपने गुणों और कर्मों से परिवार और समाज का नाम ऊँचा करना चाहिए।
मिलकर करें मिलान
इस कविता में 'फूल' और 'काँटा' के उदाहरण द्वारा लोगों के स्वभावों के अंतर और समानताओं की ओर संकेत किया गया है। दूसरे शब्दों में, 'फूल' और 'काँटा' प्रतीक के रूप में प्रयोग किए गए हैं। अपने साथियों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए कि फूल और काँटा किस-किस के प्रतीक हो सकते हैं। इन्हें उपयुक्त प्रतीकों से जोड़िए—
दिए गए शब्द — दया, स्वार्थ, अच्छाई, सुख, सुंदरता, कोमलता, आनंद, परोपकार, प्रेम, बुराई, दुख, कठोरता, प्रसन्नता, पीड़ा
उत्तर —
| फूल के प्रतीक | काँटा के प्रतीक |
|---|---|
| दया, अच्छाई, सुख, सुंदरता, कोमलता, आनंद, परोपकार, प्रेम, प्रसन्नता | स्वार्थ, बुराई, दुख, कठोरता, पीड़ा |
विद्यार्थी अन्य प्रतीक भी सोच सकते हैं, जैसे — फूल: विनम्रता, सरलता, सज्जनता, त्याग, सेवा; काँटा: घमंड, कटुता, ईर्ष्या, बुरे गुण।
सोच-विचार के लिए
कविता को एक बार पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—
(क) कविता में ऐसी कौन-कौन सी समानताओं का उल्लेख किया गया है जो सभी पौधों पर समान रूप से लागू होती हैं?
उत्तर — कविता में सभी पौधों पर समान रूप से लागू होने वाली ये समानताएँ बताई गई हैं —
- एक ही जगह (धरती) पर जन्म लेना।
- एक ही पौधे द्वारा पालन-पोषण होना।
- रात में चाँद की एक समान चाँदनी पड़ना।
- बादलों का एक समान बरसना।
- हवा का एक समान बहना।
(ख) आपको फूल और काँटे के स्वभाव में मुख्य रूप से कौन-सा अंतर दिखाई दिया? परीक्षा में महत्वपूर्ण
उत्तर — फूल कोमल होता है; वह तितलियों को गोद में बिठाता है, भौंरों को रस पिलाता है और अपनी सुगंध व रंगों से सबको प्रसन्न करता है। काँटा कठोर होता है; वह उँगलियाँ छेदता है, वस्त्र फाड़ता है, तितलियों के पंख काटता है और भौंरों को घायल करता है। अर्थात् फूल सबको सुख देता है और काँटा सबको कष्ट।
(ग) कविता में मुख्य रूप से कौन-सी बात कही गई है? उसे पहचानिए, समझिए और अपने शब्दों में लिखिए। परीक्षा में महत्वपूर्ण
उत्तर — कविता की मुख्य बात यह है कि मनुष्य का असली मूल्य उसके स्वभाव और कर्मों से पहचाना जाता है, कुल या जाति से नहीं। एक ही पौधे पर उगने और समान देखभाल पाने पर भी फूल अपने अच्छे स्वभाव के कारण देवताओं के सिर पर चढ़ता है, जबकि काँटा अपने बुरे स्वभाव के कारण सबकी आँखों में खटकता है। हमें फूल की तरह विनम्र, सेवा करने वाला और दूसरों को खुश करने वाला बनना चाहिए।
(घ) "किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।" उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर — इस पंक्ति का अर्थ है कि यदि व्यक्ति के स्वभाव और कर्मों में बड़प्पन नहीं है तो ऊँचा कुल भी उसे सम्मान नहीं दिला सकता। उदाहरण — दुर्योधन महाराज धृतराष्ट्र का पुत्र और कुरु वंश का राजकुमार था, फिर भी अपने अहंकार, द्वेष और अधर्म के कारण निंदा का पात्र बना। इसके विपरीत संत कबीर एक साधारण जुलाहा परिवार में पले-बढ़े, पर अपने ज्ञान और अच्छे विचारों के कारण आज भी सम्मान से याद किए जाते हैं।
(ङ) "है खटकता एक सब की आँख में, दूसरा है सोहता सुर शीश पर।" लोग कैसे स्वभाव के व्यक्तियों की प्रशंसा करते हैं और कैसे स्वभाव वाले व्यक्तियों से दूर रहना पसंद करते हैं?
उत्तर — लोग उन व्यक्तियों की प्रशंसा करते हैं जो फूल की तरह विनम्र, दयालु, मीठा बोलने वाले और दूसरों का भला करने वाले होते हैं। इसके विपरीत जो लोग काँटे की तरह कठोर, स्वार्थी, घमंडी और दूसरों को नुकसान पहुँचाने वाले होते हैं, उनसे लोग दूर रहना पसंद करते हैं।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए —
(क) कल्पना कीजिए कि चाँदनी, हवा और मेघ केवल एक पौधे पर बरसते हैं। बाकी पौधे इन सबके बिना कैसे दिखेंगे और उनके जीवन पर इसका क्या प्रभाव होगा?
उत्तर — यदि चाँदनी, हवा और मेघ केवल एक पौधे को मिलें तो बाकी पौधे मुरझा जाएँगे। हवा के बिना वे ठीक से बढ़ नहीं पाएँगे, वर्षा का जल न मिलने से मिट्टी सूख जाएगी और पौधे प्यासे रहकर सूख जाएँगे। उनकी पत्तियाँ पीली होकर गिरने लगेंगी और धीरे-धीरे उनका जीवन समाप्त हो जाएगा। प्रकृति सबको समान रूप से देती है, इसीलिए सब पौधे जीवित रह पाते हैं।
(ख) यदि सभी पौधे एक जैसे होते तो दुनिया कैसी लगती?
उत्तर — यदि सभी पौधे एक जैसे होते — एक जैसी पत्तियाँ, एक ही रंग के फूल, एक जैसी सुगंध — तो दुनिया बहुत नीरस और उबाऊ लगती। प्रकृति में कोई नयापन या विविधता नहीं रहती। हमें न तरह-तरह के फल मिलते, न औषधियाँ और न ही रंग-बिरंगे बाग-बगीचे देखने को मिलते।
(ग) यदि काँटे न होते और हर पौधा केवल फूलों से भरा होता तो क्या होता?
उत्तर — काँटे पौधों की रक्षा करते हैं। यदि काँटे न होते तो जानवर और कुछ लोग आसानी से पौधों और फूलों को नष्ट कर देते। विशेषकर रेगिस्तान जैसे सूखे क्षेत्रों में कई पौधे (जैसे नागफनी) काँटों के बिना जीवित ही नहीं रह पाते। इससे पता चलता है कि काँटों की भी प्रकृति में अपनी उपयोगिता है।
(घ) कल्पना कीजिए कि एक तितली काँटे से मित्रता करना चाहती है, उनके बीच कैसा संवाद होगा?
उत्तर — (नमूना संवाद)
तितली — काँटे भैया! क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगे?
काँटा — (हैरानी से) मुझसे? सब तो मुझसे डरते हैं। मैंने तो कितनी ही तितलियों के पंख काटे हैं।
तितली — पर तुम ही तो फूलों की रक्षा करते हो। तुम न हो तो कोई भी फूल तोड़ ले जाए।
काँटा — यह तो मैंने कभी सोचा ही नहीं! ठीक है, मैं ध्यान रखूँगा कि तुम्हें चोट न लगे।
तितली — (हँसते हुए) तो आज से हम पक्के दोस्त!
काँटा — (मुस्कुराते हुए) हाँ, पक्के दोस्त।
(ङ) कल्पना कीजिए कि आपको किसी काँटे, फूल या दोनों के गुणों के साथ जीवन जीने का अवसर मिलता है। आप किसके गुणों को अपनाना चाहेंगे? कारण सहित बताइए।
उत्तर — मैं फूल और काँटे — दोनों के अच्छे गुण अपनाना चाहूँगा/चाहूँगी। फूल से कोमलता, मधुरता, प्रेम और दूसरों को खुशी देने का गुण लूँगा/लूँगी; और काँटे से अपनी व अपनों की रक्षा करने तथा कठिन परिस्थितियों में मज़बूती से डटे रहने का गुण। ऐसा करने से मैं सबका प्रिय भी बनूँगा/बनूँगी और मुश्किलों का सामना भी कर सकूँगा/सकूँगी।
शब्द से जुड़े शब्द
नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में 'बड़प्पन' से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए—
उत्तर — संतोष, नम्रता, दयालुता, आदर, संयम, मृदुभाषिता, कर्तव्यनिष्ठा, उदारता (विद्यार्थी अन्य उपयुक्त शब्द भी लिख सकते हैं)।
बड़प्पन
नीचे कुछ शब्द दिए गए हैं जो किसी भाव को व्यक्त करते हैं। इनमें से जो शब्द 'बड़प्पन' के भाव व्यक्त करते हैं, उन पर एक गोला बनाइए, जो बड़प्पन का भाव व्यक्त नहीं करते हैं, उनके नीचे रेखा खींचिए।
उत्तर —
| बड़प्पन का भाव व्यक्त करने वाले शब्द (गोला) | बड़प्पन का भाव व्यक्त न करने वाले शब्द (रेखा) |
|---|---|
| सहनशीलता, दया, विश्वास, उदारता, विनम्रता, त्याग, संतोष, समर्पण, आदर, सम्मान, निष्ठा, परोपकार, सद्भावना | अहंकार, घमंड, ईर्ष्या, द्वेष, प्रतिशोध, क्रूरता, स्वार्थ, अपमान, अविश्वास, झूठ, अधीरता, लालच, झगड़ालूपन |
कविता की रचना
"फूल लेकर तितलियों को गोद में, भौंर को अपना अनूठा रस पिला। निज सुगंधों औ निराले रंग से, है सदा देता कली जी की खिला।"
इस पंक्ति में 'औ' शब्द 'और' के लिए आया है। कवि लय के अनुसार ऐसे प्रयोग करते हैं, जैसे 'प्यार में डूबी तितलियाँ' के स्थान पर 'प्यार-डूबी तितलियाँ'। हर दूसरी पंक्ति का अंतिम शब्द मिलती-जुलती ध्वनि वाला यानी 'तुकांत' है।
(क) अपने समूह के साथ मिलकर इन विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर —
- लय बनाए रखने के लिए शब्दों को छोटा किया गया है, जैसे — 'और' के स्थान पर 'औ', 'जन्म' के स्थान पर 'जनम', 'भौंरा' के स्थान पर 'भौंर'।
- शब्दों का क्रम बदलकर लिखा गया है, जैसे — 'हैं जनम लेते जगह में एक ही' (सामान्य क्रम: एक ही जगह में जन्म लेते हैं)।
- हर दूसरी पंक्ति के अंत में तुकांत शब्द हैं — पालता-डालता, बही-नहीं, बसन-तन, पिला-खिला, पर-कसर।
- दो शब्दों को मिलाकर नया शब्द बनाया गया है, जैसे — 'प्यार-डूबी'।
- फूल और काँटा प्रतीक के रूप में प्रयोग हुए हैं — अच्छे और बुरे स्वभाव वाले व्यक्तियों के प्रतीक।
- फूल और काँटे में मानवीय कार्य दिखाए गए हैं (मानवीकरण), जैसे — फूल का तितलियों को गोद में लेना।
(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ झलकती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए। आप कविता की पंक्तियों में एक से अधिक विशेषताएँ भी ढूँढ़ सकते हैं। परीक्षा में महत्वपूर्ण
उत्तर —
| कविता की विशेषताएँ | कविता की पंक्तियाँ |
|---|---|
| 1. एक ही वर्ण से शुरू होने वाले दो शब्द एक ही पंक्ति में साथ-साथ आए हैं। | भौंर को अपना अनूठा रस पिला ('अपना अनूठा'); दूसरा है सोहता सुर शीश पर ('सोहता सुर') |
| 2. मुहावरे का प्रयोग किया गया है। | है खटकता एक सब की आँख में ('आँख में खटकना'); है सदा देता कली जी की खिला ('जी की कली खिलना') |
| 3. प्रश्न पूछा गया है। | किस तरह कुल की बड़ाई काम दे |
| 4. प्राकृतिक वस्तुओं, जैसे— पेड़-पौधों में मानवीय कार्यों और भावनाओं का वर्णन किया गया है। | फाड़ देता है किसी का वर बसन; फूल लेकर तितलियों को गोद में |
| 5. एक-दूसरे के विपरीत अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग किया गया है। | है खटकता एक सब की आँख में, दूसरा है सोहता सुर शीश पर ('खटकता' और 'सोहता') |
कविता का सौंदर्य
(क) आगे कविता की कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। इनमें कुछ शब्द हटा दिए गए हैं और साथ में मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द भी दिए गए हैं। इनमें से प्रत्येक शब्द से वह पंक्ति पूरी करके देखिए जो शब्द उस पंक्ति में जँच रहे हैं, उन पर घेरा बनाइए।
उत्तर —
- "____ में उन पर चमकता ____ भी" — (रात, रात्रि, रजनी, निशा) (शशि, चंद्रमा, चाँद, राकेश, इंदु) — लय में जँचने वाले शब्द: रात, रात्रि और चाँद, शशि।
- "____ उन पर है बरसता एक सा" — (मेह, बादल, मेघ, जलद) — जँचने वाले शब्द: मेह, मेघ। "एक सी उन पर ____ हैं बही" — (वायु, पवन, समीर, मारुत, बयारें, हवायें) — जँचने वाले शब्द: हवायें, बयारें।
(ख) अपने समूह में चर्चा करके पता लगाइए कि कौन-सा शब्द रिक्त स्थानों में सबसे अधिक साथियों को जँच रहा है और क्यों?
उत्तर — रिक्त स्थानों में सबसे अधिक वही शब्द जँचते हैं जिनका प्रयोग कवि ने किया है — रात, चाँद, मेह और हवायें। इसका कारण यह है कि ये शब्द कविता की लय और मात्राओं में ठीक बैठते हैं, बोलचाल के निकट हैं और कविता के अन्य शब्दों के साथ मेल खाते हैं।
विशेषण
"भौंर का है बेध देता श्याम तन।" 'श्याम तन' का अर्थ है— काला शरीर। यहाँ 'श्याम' शब्द भँवरे के 'शरीर' की विशेषता बता रहा है, अर्थात् 'श्याम' 'विशेषण' है। 'तन' एक संज्ञा शब्द है जिसकी विशेषता बताई जा रही है अर्थात् 'तन' 'विशेष्य' शब्द है।
(क) नीचे दी गई पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य शब्दों की पहचान करके लिखिए — परीक्षा में महत्वपूर्ण
| पंक्ति | विशेषण | विशेष्य |
|---|---|---|
| 1. भौंर का है बेध देता श्याम तन | श्याम | तन |
| 2. फाड़ देता है किसी का वर बसन | वर | बसन |
| 3. भौंर को अपना अनूठा रस पिला | अनूठा | रस |
| 4. निज सुगंधों औ निराले ढंग से | निज, निराले | सुगंधों, ढंग |
(ख) नीचे दिए गए विशेष्यों के लिए अपने मन से विशेषण सोचकर लिखिए —
| विशेष्य | विशेषण |
|---|---|
| 1. फूल | सुंदर, सुगंधित, रंग-बिरंगा |
| 2. काँटा | नुकीला, कठोर, तीखा |
| 3. मेह | काले, घने, गरजते |
| 4. चाँद | पूरा, आधा, चमकीला |
| 5. रात | अँधेरी, ठंडी, चाँदनी |
पाठ से आगे
आपकी बात
(क) यदि आपको फूल और काँटे में से किसी एक को चुनना हो तो आप किसे चुनेंगे और क्यों?
उत्तर — मैं फूल को चुनूँगा/चुनूँगी, क्योंकि फूल दूसरों को खुशियाँ बाँटता है और लोगों के जीवन में सुगंध और सुंदरता भर देता है। फूल की तरह हम भी दूसरों के जीवन में प्रेम और प्रसन्नता बाँट सकते हैं।
(ख) कविता में बताया गया है कि फूल अपनी सुगंध और व्यवहार से चारों ओर प्रसन्नता और आनंद फैला देता है। आप अपने मित्रों या परिवार के जीवन में प्रसन्नता और आनंद लाने के लिए क्या-क्या करते हैं और क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर — अभी जो करते हैं — बड़ों की बात मानते हैं, घर के छोटे कामों में माता-पिता की मदद करते हैं, मित्रों के साथ अपनी चीज़ें बाँटते हैं और किसी से ईर्ष्या नहीं करते।
आगे जो कर सकते हैं — अपनी गलती पर क्षमा माँग सकते हैं, दूसरों की बात ध्यान से सुन सकते हैं, दादा-दादी/नाना-नानी के साथ समय बिता सकते हैं और अच्छे काम पर खुले दिल से प्रशंसा कर सकते हैं।
(ग) 'फूल' और 'काँटे' एक-दूसरे से बिलकुल भिन्न हैं फिर भी साथ-साथ पाए जाते हैं। अपने आस-पास से ऐसे अन्य उदाहरण दीजिए।
(संकेत— वस्तुएँ, जैसे— नमक और चीनी; स्वभाव, जैसे— शांत और क्रोधी; स्वाद, जैसे— खट्टा-मीठा; रंग, जैसे— काला-सफेद; अनुभव, जैसे— सुख-दुख आदि)
उत्तर — वस्तुएँ — आग और पानी, दिन और रात; स्वभाव — दयालु और निर्दयी; स्वाद — फीका और चटपटा; रंग — श्वेत और श्याम; अनुभव — आशा और निराशा, हार और जीत।
(घ) "छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ, फाड़ देता है किसी का वर बसन।" आप अपने आस-पास की किसी समस्या का वर्णन कीजिए जिसे आप 'काँटे' के समान महसूस करते हैं। उस समस्या का समाधान भी सुझाइए।
उत्तर — समस्या — कठोर भाषा या बुरे शब्दों की चोट। जब कोई गुस्से या मज़ाक में गलत शब्द बोल देता है तो वह दिल में वैसे ही चुभता है जैसे काँटा उँगली में।
समाधान — बोलने से पहले सोचें कि हमारे शब्द किसी को चोट तो नहीं पहुँचाएँगे; हर व्यक्ति की भावनाओं का आदर करें; गलती से कठोर शब्द निकल जाएँ तो तुरंत क्षमा माँग लें। इससे रिश्ते मज़बूत होते हैं।
सृजन
(क) इस कविता के बारे में एक चित्र बनाइए। आप चित्र में जहाँ चाहें, अपने मनोनीत रंग भर सकते हैं।
उत्तर — विद्यार्थी स्वयं करें। सुझाव — एक पौधा बनाइए जिस पर एक ओर रंग-बिरंगा फूल हो जिस पर तितली बैठी हो और भौंरा रस पी रहा हो, तथा दूसरी ओर नुकीले काँटे हों; ऊपर चाँद और बादल भी बना सकते हैं।
(ख) मान लीजिए कि फूल और काँटे के बीच बातचीत हो रही है। उनकी बातचीत या संवाद अपनी कल्पना से लिखिए।
उत्तर — (नमूना संवाद)
फूल — (मुस्कुराते हुए) नमस्ते काँटे भाई! लोग मुझे देखकर खुश होते हैं, मेरी सुगंध से सब महक उठते हैं।
काँटा — नमस्ते फूल भाई! तुम्हारी कोमलता सचमुच मन को भाती है। पर क्या तुम जानते हो, मैं न होता तो तुम्हें कोई भी आसानी से तोड़ लेता?
फूल — बिलकुल सही! जब कोई मुझे तोड़ने आता है तो पहले उसका सामना तुमसे होता है।
काँटा — हाँ, मैं कठोर हूँ, पर मेरा काम सुरक्षा करना है। जीवन में कभी-कभी कठोरता भी ज़रूरी होती है।
फूल — आज मैंने सीखा कि कोमलता और कठोरता — दोनों मिलकर ही जीवन को संतुलित बनाते हैं।
वाद-विवाद
विभिन्न समूह बनाकर कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। इसके लिए विषय है— 'जीवन में फूल और काँटे, दोनों की आवश्यकता होती है'।
उत्तर — यह कक्षा-गतिविधि है। पाठ्यपुस्तक में दिए गए सुझावों के अनुसार आधे समूह 'फूल' के पक्ष में और आधे 'काँटे' के पक्ष में तर्क देंगे तथा एक समूह निर्णायक मंडल बनेगा। कुछ नमूना तर्क —
- फूल के पक्ष में — फूल सुंदरता, सुगंध और प्रसन्नता देता है; पूजा, उत्सव और सजावट में काम आता है; फूल से ही फल और बीज बनते हैं।
- काँटे के पक्ष में — काँटा पौधे और फूल की रक्षा करता है; रेगिस्तानी पौधों को जीवित रखता है; हमें सिखाता है कि कठिनाइयाँ भी जीवन का हिस्सा हैं और हमें सावधान रहना चाहिए।
आज की पहेली
नीचे कुछ ऐसे पेड़-पौधों के चित्र दिए गए हैं जिनमें फूल और काँटे साथ-साथ पाए जाते हैं। चित्रों को सही नामों के साथ रेखा खींचकर जोड़िए—
उत्तर —
| पौधा | चित्र की पहचान |
|---|---|
| 1. बबूल | पीले, गोल गुच्छेदार फूल और लंबे नुकीले काँटों वाली टहनी |
| 2. गुलाब | लाल गुलाब का फूल और तने पर छोटे काँटे |
| 3. नागफनी | चपटे, हरे, काँटेदार तने पर पीले फूल |
| 4. बेर | छोटे हरे-पीले गोल फल और हल्के पीले फूल |
| 5. करौंदा | छोटे सफ़ेद फूल और लाल-गुलाबी फल |
| 6. नीबू | पीला नीबू, सफ़ेद फूल और शाखाओं पर काँटे |
परीक्षा-उपयोगी अतिरिक्त प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न
1. 'फूल और काँटा' कविता के कवि कौन हैं?
(क) सुमित्रानंदन पंत (ख) अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' (ग) मैथिलीशरण गुप्त (घ) सोहनलाल द्विवेदी
उत्तर — (ख) अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
2. खड़ी बोली का पहला महाकाव्य किसे माना जाता है?
(क) साकेत (ख) कामायनी (ग) प्रियप्रवास (घ) चंद्र-खिलौना
उत्तर — (ग) प्रियप्रवास
3. 'वर बसन' का अर्थ है —
(क) सुंदर वस्त्र (ख) वर का घर (ग) बड़ा बाग (घ) श्रेष्ठ वन
उत्तर — (क) सुंदर वस्त्र
4. फूल किसके सिर पर शोभा पाता है?
(क) राजा के (ख) देवताओं के (ग) बच्चों के (घ) भौंरों के
उत्तर — (ख) देवताओं के ('सुर शीश पर')
5. 'कसर' शब्द का अर्थ है —
(क) कमी (ख) ताकत (ग) बड़ाई (घ) सुगंध
उत्तर — (क) कमी
लघु उत्तरीय प्रश्न
6. काँटा भौंरे और तितलियों को क्या हानि पहुँचाता है? परीक्षा में महत्वपूर्ण
उत्तर — काँटा प्यार में डूबी तितलियों के पंख काट देता है और भौंरे के काले शरीर को बेध (घायल कर) देता है।
7. फूल तितलियों और भौंरों के साथ कैसा व्यवहार करता है?
उत्तर — फूल तितलियों को प्रेम से अपनी गोद में बिठा लेता है और भौंरों को अपना अनूठा रस पिलाता है।
8. काँटा सबकी आँखों में क्यों खटकता है?
उत्तर — काँटा सबको कष्ट देता है — उँगलियाँ छेदता है, कपड़े फाड़ता है और तितलियों-भौंरों को घायल करता है। अपने इसी कठोर और हानिकारक स्वभाव के कारण वह सबकी आँखों में खटकता है।
9. 'फूल और काँटा' कविता से हमें क्या शिक्षा मिलती है? परीक्षा में महत्वपूर्ण
उत्तर — इस कविता से शिक्षा मिलती है कि मनुष्य की पहचान उसके कुल या जन्म से नहीं, बल्कि उसके स्वभाव, गुणों और कर्मों से होती है। हमें फूल की तरह कोमल, विनम्र और दूसरों को सुख देने वाला बनना चाहिए, काँटे की तरह दूसरों को कष्ट देने वाला नहीं।
10. कविता में फूल और काँटा किसके प्रतीक हैं?
उत्तर — कविता में फूल अच्छे, सज्जन और परोपकारी स्वभाव वाले व्यक्तियों का प्रतीक है, जबकि काँटा कठोर, स्वार्थी और दूसरों को दुख देने वाले व्यक्तियों का प्रतीक है।
