ई ज्ञान आर्काइव — eGyanArchiveई ज्ञान आर्काइव
हिंदी व्याकरण सामान्य 29 अक्टूबर 2026

संधि (Sandhi) — परिभाषा, भेद, नियम, 550+ उदाहरण और 120 MCQ

लेखक: ज्ञान आर्काइव

हिंदी व्याकरण में संधि ऐसा विषय है जो कक्षा 6 से लेकर बोर्ड परीक्षा, CTET, TET, UPSSSC, KVS और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं तक हर जगह पूछा जाता है। इस लेख में संधि को बिल्कुल आसान भाषा से शुरू करके पूरे नियमों तक समझाया गया है। हर नियम के साथ ढेर सारे उदाहरण तालिकाओं में हैं और अंत में 120 बहुविकल्पीय प्रश्न तीन स्तरों (40-40) में दिए गए हैं, हर प्रश्न का उत्तर और कारण भी साथ में है। परीक्षा दें (टेस्ट दें)

संधि क्या है?

संधि शब्द का अर्थ है — मेल या जोड़। जब दो शब्द पास-पास आते हैं, तो पहले शब्द का अंतिम वर्ण और दूसरे शब्द का पहला वर्ण आपस में मिल जाते हैं। इस मिलने से जो बदलाव (विकार) होता है, उसे संधि कहते हैं।

परिभाषा: दो निकटवर्ती वर्णों के परस्पर मेल से जो विकार (परिवर्तन) उत्पन्न होता है, उसे संधि कहते हैं।

आसान उदाहरण से समझें: ‘विद्या’ का अंतिम वर्ण ‘आ’ है और ‘आलय’ का पहला वर्ण भी ‘आ’ है। दोनों ‘आ’ मिलकर एक ‘आ’ बन जाते हैं — विद्या + आलय = विद्यालय। यही संधि है।

संधि-विच्छेद: संधि से बने शब्द को फिर से उसके मूल शब्दों में अलग करके लिखना संधि-विच्छेद कहलाता है। जैसे — विद्यालय = विद्या + आलय, सूर्योदय = सूर्य + उदय।

याद रखें: संधि हमेशा वर्णों (अक्षरों) के बीच होती है, शब्दों के अर्थ के बीच नहीं। हिंदी में ज़्यादातर संधियाँ तत्सम (संस्कृत से आए) शब्दों में होती हैं।

संधि के भेद

जिन वर्णों का मेल होता है, उनके आधार पर संधि के तीन भेद हैं:

भेदकिसका मेलउदाहरण
1. स्वर संधिस्वर + स्वरहिम + आलय = हिमालय
2. व्यंजन संधिव्यंजन + स्वर, व्यंजन + व्यंजन, या स्वर + व्यंजनजगत् + ईश = जगदीश
3. विसर्ग संधिविसर्ग (ः) + स्वर या व्यंजनमनः + बल = मनोबल

पहचान की तरकीब: जोड़ वाली जगह पर देखें — दोनों ओर स्वर है तो स्वर संधि; पहले शब्द के अंत में हलंत व्यंजन (जैसे क्, त्, म्) है तो व्यंजन संधि; पहले शब्द के अंत में विसर्ग (ः) है तो विसर्ग संधि।

1. स्वर संधि

दो स्वरों के मेल से होने वाले परिवर्तन को स्वर संधि कहते हैं। इसके पाँच भेद हैं। इन्हें याद रखने का सूत्र है — “दी-गु-वृ-य-अ” यानी दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण् और अयादि।

भेदनियम (मेल)परिणामउदाहरण
दीर्घअ/आ + अ/आ
इ/ई + इ/ई
उ/ऊ + उ/ऊ
आ
ई
ऊ
देवालय, गिरीश, भानूदय
गुणअ/आ + इ/ई
अ/आ + उ/ऊ
अ/आ + ऋ
ए
ओ
अर्
नरेश, सूर्योदय, महर्षि
वृद्धिअ/आ + ए/ऐ
अ/आ + ओ/औ
ऐ
औ
सदैव, जलौघ
यण्इ/ई + भिन्न स्वर
उ/ऊ + भिन्न स्वर
ऋ + भिन्न स्वर
य्
व्
र्
इत्यादि, स्वागत, पित्राज्ञा
अयादिए + स्वर
ऐ + स्वर
ओ + स्वर
औ + स्वर
अय्
आय्
अव्
आव्
नयन, गायक, पवन, पावक

(क) दीर्घ संधि

जब दो सजातीय (एक जैसे) स्वर मिलते हैं — चाहे ह्रस्व हों या दीर्घ — तो दोनों मिलकर उसी जाति का दीर्घ स्वर बन जाते हैं।

पहचान: संधि वाले शब्द में जोड़ की जगह पर आ (ा), ई (ी) या ऊ (ू) की मात्रा होती है, जैसे हिमालय, गिरीश, भानूदय।

मेलउदाहरण
अ + अ = आधर्म + अर्थ = धर्मार्थ
राम + अवतार = रामावतार
परम + अर्थ = परमार्थ
स्व + अर्थ = स्वार्थ
वेद + अंत = वेदांत
मत + अनुसार = मतानुसार
सूर्य + अस्त = सूर्यास्त
देह + अंत = देहांत
शरण + अर्थी = शरणार्थी
गीत + अंजलि = गीतांजलि
उत्तर + अधिकारी = उत्तराधिकारी
अन्न + अभाव = अन्नाभाव
अ + आ = आहिम + आलय = हिमालय
देव + आलय = देवालय
भोजन + आलय = भोजनालय
पुस्तक + आलय = पुस्तकालय
न्याय + आलय = न्यायालय
शिव + आलय = शिवालय
रत्न + आकर = रत्नाकर
सत्य + आग्रह = सत्याग्रह
धर्म + आत्मा = धर्मात्मा
परम + आत्मा = परमात्मा
कुश + आसन = कुशासन
देव + आगमन = देवागमन
आ + अ = आविद्या + अर्थी = विद्यार्थी
यथा + अर्थ = यथार्थ
शिक्षा + अर्थी = शिक्षार्थी
परीक्षा + अर्थी = परीक्षार्थी
दीक्षा + अंत = दीक्षांत
सीमा + अंत = सीमांत
रेखा + अंश = रेखांश
कदा + अपि = कदापि
तथा + अपि = तथापि
युवा + अवस्था = युवावस्था
आ + आ = आविद्या + आलय = विद्यालय
महा + आत्मा = महात्मा
दया + आनंद = दयानंद
वार्ता + आलाप = वार्तालाप
कारा + आगार = कारागार
प्रेक्षा + आगार = प्रेक्षागार
मदिरा + आलय = मदिरालय
महा + आशय = महाशय
इ + इ = ईअति + इव = अतीव
रवि + इंद्र = रवींद्र
कवि + इंद्र = कवींद्र
मुनि + इंद्र = मुनींद्र
कपि + इंद्र = कपींद्र
अभि + इष्ट = अभीष्ट
इ + ई = ईगिरि + ईश = गिरीश
कपि + ईश = कपीश
हरि + ईश = हरीश
कवि + ईश = कवीश
मुनि + ईश्वर = मुनीश्वर
परि + ईक्षा = परीक्षा
प्रति + ईक्षा = प्रतीक्षा
ई + इ = ईमही + इंद्र = महींद्र
शची + इंद्र = शचींद्र
यती + इंद्र = यतींद्र
ई + ई = ईनदी + ईश = नदीश
रजनी + ईश = रजनीश
सती + ईश = सतीश
जानकी + ईश = जानकीश
नारी + ईश्वर = नारीश्वर
मही + ईश = महीश
पृथ्वी + ईश = पृथ्वीश
उ + उ = ऊभानु + उदय = भानूदय
सु + उक्ति = सूक्ति
गुरु + उपदेश = गुरूपदेश
लघु + उत्तर = लघूत्तर
विधु + उदय = विधूदय
मधु + उत्सव = मधूत्सव
उ + ऊ = ऊलघु + ऊर्मि = लघूर्मि
सिंधु + ऊर्मि = सिंधूर्मि
मधु + ऊर्मि = मधूर्मि
ऊ + उ = ऊवधू + उत्सव = वधूत्सव
वधू + उक्ति = वधूक्ति
ऊ + ऊ = ऊभू + ऊर्ध्व = भूर्ध्व
सरयू + ऊर्मि = सरयूर्मि

रोचक बात: ‘लघूत्तरीय’ शब्द में भी दीर्घ संधि है — लघु + उत्तरीय। इसलिए ‘लघुत्तरीय’ लिखना गलत है।

(ख) गुण संधि

अ या आ के बाद इ/ई आए तो ए, उ/ऊ आए तो ओ, और ऋ आए तो अर् हो जाता है।

पहचान: जोड़ की जगह ए (े) या ओ (ो) की मात्रा, या र् (रेफ) दिखाई देता है — नरेश, सूर्योदय, महर्षि।

मेलउदाहरण
अ + इ = एदेव + इंद्र = देवेंद्र
सुर + इंद्र = सुरेंद्र
नर + इंद्र = नरेंद्र
गज + इंद्र = गजेंद्र
धर्म + इंद्र = धर्मेंद्र
उप + इंद्र = उपेंद्र
भारत + इंदु = भारतेंदु
ज्ञान + इंद्रिय = ज्ञानेंद्रिय
कर्म + इंद्रिय = कर्मेंद्रिय
स्व + इच्छा = स्वेच्छा
शुभ + इच्छा = शुभेच्छा
अ + ई = एनर + ईश = नरेश
गण + ईश = गणेश
सुर + ईश = सुरेश
राज + ईश = राजेश
कमल + ईश = कमलेश
लोक + ईश = लोकेश
प्राण + ईश = प्राणेश
नाग + ईश = नागेश
परम + ईश्वर = परमेश्वर
सर्व + ईश्वर = सर्वेश्वर
आ + इ = एमहा + इंद्र = महेंद्र
राजा + इंद्र = राजेंद्र
यथा + इष्ट = यथेष्ट
आ + ई = एरमा + ईश = रमेश
महा + ईश = महेश
उमा + ईश = उमेश
लंका + ईश = लंकेश
राका + ईश = राकेश
गंगा + ईश = गंगेश
द्वारका + ईश = द्वारकेश
महा + ईश्वर = महेश्वर
अ + उ = ओसूर्य + उदय = सूर्योदय
चंद्र + उदय = चंद्रोदय
सर्व + उदय = सर्वोदय
पर + उपकार = परोपकार
हित + उपदेश = हितोपदेश
वीर + उचित = वीरोचित
प्रश्न + उत्तर = प्रश्नोत्तर
उत्तर + उत्तर = उत्तरोत्तर
लोक + उक्ति = लोकोक्ति
नर + उत्तम = नरोत्तम
पुरुष + उत्तम = पुरुषोत्तम
आत्म + उत्सर्ग = आत्मोत्सर्ग
अ + ऊ = ओजल + ऊर्मि = जलोर्मि
नव + ऊढ़ा = नवोढ़ा
आ + उ = ओमहा + उत्सव = महोत्सव
महा + उदय = महोदय
महा + उपदेश = महोपदेश
गंगा + उदक = गंगोदक
यथा + उचित = यथोचित
आ + ऊ = ओगंगा + ऊर्मि = गंगोर्मि
दया + ऊर्मि = दयोर्मि
अ/आ + ऋ = अर्देव + ऋषि = देवर्षि
महा + ऋषि = महर्षि
सप्त + ऋषि = सप्तर्षि
ब्रह्म + ऋषि = ब्रह्मर्षि
राज + ऋषि = राजर्षि

सावधानी: ‘महर्षि’, ‘देवर्षि’, ‘राजर्षि’ में गुण संधि है, वृद्धि नहीं। परीक्षा में यह प्रश्न अक्सर फँसाने के लिए पूछा जाता है।

(ग) वृद्धि संधि

अ या आ के बाद ए/ऐ आए तो ऐ, और ओ/औ आए तो औ हो जाता है।

पहचान: जोड़ की जगह ऐ (ै) या औ (ौ) की मात्रा — सदैव, जलौघ।

मेलउदाहरण
अ + ए = ऐएक + एक = एकैक
लोक + एषणा = लोकैषणा
पुत्र + एषणा = पुत्रैषणा
वित्त + एषणा = वित्तैषणा
आ + ए = ऐसदा + एव = सदैव
तथा + एव = तथैव
यथा + एव = यथैव
वसुधा + एव = वसुधैव
अ + ऐ = ऐमत + ऐक्य = मतैक्य
धन + ऐश्वर्य = धनैश्वर्य
देव + ऐश्वर्य = देवैश्वर्य
विश्व + ऐक्य = विश्वैक्य
आ + ऐ = ऐमहा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य
अ + ओ = औजल + ओघ = जलौघ
वन + ओषधि = वनौषधि
दंत + ओष्ठ = दंतौष्ठ
अ + औ = औपरम + औषध = परमौषध
देव + औदार्य = देवौदार्य
आ + ओ = औमहा + ओज = महौज
आ + औ = औमहा + औषध = महौषध
महा + औदार्य = महौदार्य
महा + औत्सुक्य = महौत्सुक्य

(घ) यण् संधि

इ/ई, उ/ऊ या ऋ के बाद कोई भिन्न (असमान) स्वर आए, तो इ/ई का य्, उ/ऊ का व् और ऋ का र् हो जाता है।

पहचान: शब्द में आधा य (्य), आधा व (्व) या र (्र) दिखाई देता है — इत्यादि, स्वागत, पित्राज्ञा।

मेलउदाहरण
इ + अ = ययदि + अपि = यद्यपि
अति + अधिक = अत्यधिक
अति + अंत = अत्यंत
अभि + अर्थी = अभ्यर्थी
परि + अंत = पर्यंत
वि + अर्थ = व्यर्थ
वि + अय = व्यय
प्रति + अक्ष = प्रत्यक्ष
इ + आ = याइति + आदि = इत्यादि
अति + आचार = अत्याचार
अति + आवश्यक = अत्यावश्यक
परि + आवरण = पर्यावरण
वि + आयाम = व्यायाम
वि + आकुल = व्याकुल
वि + आपक = व्यापक
अभि + आगत = अभ्यागत
इ + उ = युउपरि + उक्त = उपर्युक्त
अभि + उदय = अभ्युदय
प्रति + उत्तर = प्रत्युत्तर
प्रति + उपकार = प्रत्युपकार
अति + उत्तम = अत्युत्तम
इ + ऊ = यूनि + ऊन = न्यून
वि + ऊह = व्यूह
अति + ऊष्म = अत्यूष्म
इ + ए = येप्रति + एक = प्रत्येक
ई + अ = यनदी + अर्पण = नद्यर्पण
देवी + अर्पण = देव्यर्पण
ई + आ = यासखी + आगमन = सख्यागमन
नदी + आवेग = नद्यावेग
उ + अ = वअनु + अय = अन्वय
मनु + अंतर = मन्वंतर
सु + अल्प = स्वल्प
सु + अच्छ = स्वच्छ
उ + आ = वासु + आगत = स्वागत
मधु + आलय = मध्वालय
गुरु + आज्ञा = गुर्वाज्ञा
उ + इ = विअनु + इति = अन्विति
उ + ए = वेअनु + एषण = अन्वेषण
ऋ + अ = रपितृ + अनुमति = पित्रनुमति
ऋ + आ = रापितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा
मातृ + आनंद = मात्रानंद
पितृ + आदेश = पित्रादेश
ऋ + इ = रिमातृ + इच्छा = मात्रिच्छा

आम गलती: ‘अत्याधिक’ और ‘उपरोक्त’ गलत रूप हैं। सही रूप हैं — अत्यधिक (अति + अधिक) और उपर्युक्त (उपरि + उक्त)।

(ङ) अयादि संधि

ए, ऐ, ओ, औ के बाद कोई स्वर आए, तो ए का अय्, ऐ का आय्, ओ का अव् और औ का आव् हो जाता है।

पहचान: शब्द में य या व पूरा दिखता है और विच्छेद में पहला खंड प्रायः एक ही अक्षर का होता है — ने, गै, पो, पौ।

मेलउदाहरण
ए + अ = अयने + अन = नयन
चे + अन = चयन
शे + अन = शयन
ऐ + अ = आयगै + अक = गायक
नै + अक = नायक
गै + अन = गायन
विनै + अक = विनायक
ओ + अ = अवपो + अन = पवन
भो + अन = भवन
हो + अन = हवन
श्रो + अन = श्रवण
ओ + इ = अविपो + इत्र = पवित्र
औ + अ = आवपौ + अक = पावक
धौ + अक = धावक
पौ + अन = पावन
श्रौ + अन = श्रावण
औ + इ = आविनौ + इक = नाविक
औ + उ = आवुभौ + उक = भावुक

2. व्यंजन संधि

व्यंजन का स्वर से, या व्यंजन का व्यंजन से मेल होने पर जो परिवर्तन होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं। इसे समझने के लिए वर्णमाला के पाँच वर्ग याद रखें:

वर्गपहलादूसरातीसराचौथापाँचवाँ
क वर्गकखगघङ
च वर्गचछजझञ
ट वर्गटठडढण
त वर्गतथदधन
प वर्गपफबभम

नियम 1: पहला वर्ण → तीसरा वर्ण

वर्ग का पहला वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) के बाद कोई स्वर, वर्ग का तीसरा/चौथा वर्ण या य, र, ल, व आए, तो पहला वर्ण अपने ही वर्ग के तीसरे वर्ण (ग्, ज्, ड्, द्, ब्) में बदल जाता है।

मेलउदाहरण
क् → ग्दिक् + अंबर = दिगंबर
दिक् + अंत = दिगंत
वाक् + ईश = वागीश
दिक् + गज = दिग्गज
दिक् + दर्शन = दिग्दर्शन
वाक् + दान = वाग्दान
वाक् + जाल = वाग्जाल
ऋक् + वेद = ऋग्वेद
च् → ज्अच् + अंत = अजंत
ट् → ड्षट् + आनन = षडानन
षट् + दर्शन = षड्दर्शन
त् → द्सत् + आचार = सदाचार
सत् + उपयोग = सदुपयोग
जगत् + ईश = जगदीश
जगत् + अंबा = जगदंबा
सत् + धर्म = सद्धर्म
सत् + गति = सद्गति
सत् + भावना = सद्भावना
उत् + घाटन = उद्घाटन
उत् + योग = उद्योग
तत् + रूप = तद्रूप
भगवत् + गीता = भगवद्गीता
प् → ब्अप् + ज = अब्ज
अप् + धि = अब्धि

नियम 2: पहला वर्ण → पाँचवाँ वर्ण

वर्ग के पहले वर्ण के बाद न या म आए, तो पहला वर्ण अपने वर्ग के पाँचवें वर्ण में बदल जाता है।

मेलउदाहरण
क् → ङ्वाक् + मय = वाङ्मय
ट् → ण्षट् + मास = षण्मास
षट् + मुख = षण्मुख
त् → न्जगत् + नाथ = जगन्नाथ
उत् + नति = उन्नति
उत् + नयन = उन्नयन
उत् + मत्त = उन्मत्त
चित् + मय = चिन्मय
तत् + मय = तन्मय
सत् + मार्ग = सन्मार्ग
सत् + मति = सन्मति
प् → म्अप् + मय = अम्मय

नियम 3: ‘त्’ से जुड़े परिवर्तन

मेलपरिणामउदाहरण
त् + च/छच्च/च्छउत् + चारण = उच्चारण
सत् + चरित्र = सच्चरित्र
शरत् + चंद्र = शरच्चंद्र
उत् + छिन्न = उच्छिन्न
त् + ज/झज्ज/ज्झसत् + जन = सज्जन
जगत् + जननी = जगज्जननी
उत् + ज्वल = उज्ज्वल
विपत् + जाल = विपज्जाल
त् + ट/डट्ट/ड्डबृहत् + टीका = बृहट्टीका
उत् + डयन = उड्डयन
त् + लल्लउत् + लास = उल्लास
उत् + लेख = उल्लेख
उत् + लंघन = उल्लंघन
तत् + लीन = तल्लीन
त् + शच्छउत् + श्वास = उच्छ्वास
उत् + शिष्ट = उच्छिष्ट
सत् + शास्त्र = सच्छास्त्र
तत् + शिव = तच्छिव
त्/द् + हद्धउत् + हार = उद्धार
उत् + हरण = उद्धरण
उत् + हत = उद्धत
तत् + हित = तद्धित
पद् + हति = पद्धति

नियम 4: स्वर + छ = च्छ

किसी स्वर के बाद छ आए, तो छ से पहले च् जुड़ जाता है।

मेलउदाहरण
स्वर + छ = च्छअनु + छेद = अनुच्छेद
परि + छेद = परिच्छेद
वि + छेद = विच्छेद
आ + छादन = आच्छादन
स्व + छंद = स्वच्छंद
वृक्ष + छाया = वृक्षच्छाया
लक्ष्मी + छाया = लक्ष्मीच्छाया

नियम 5: ‘म्’ से जुड़े परिवर्तन

मेलपरिणामउदाहरण
म् + क से भ तक का कोई व्यंजनअनुस्वार (ं) या उसी वर्ग का पाँचवाँ वर्णसम् + कल्प = संकल्प
सम् + गम = संगम
सम् + चय = संचय
सम् + जय = संजय
किम् + चित = किंचित
सम् + तोष = संतोष
सम् + तान = संतान
सम् + देश = संदेश
सम् + ध्या = संध्या
सम् + पूर्ण = संपूर्ण
सम् + बंध = संबंध
सम् + भव = संभव
म् + मम्मसम् + मान = सम्मान
सम् + मति = सम्मति
सम् + मेलन = सम्मेलन
म् + य, र, ल, व, श, ष, स, हअनुस्वार (ं)सम् + योग = संयोग
सम् + रक्षण = संरक्षण
सम् + लग्न = संलग्न
सम् + वाद = संवाद
सम् + विधान = संविधान
सम् + शय = संशय
सम् + सार = संसार
सम् + स्कृति = संस्कृति
सम् + हार = संहार

अपवाद: सम् + राट् = सम्राट (यहाँ नियम के अनुसार अनुस्वार नहीं होता)।

नियम 6: ‘न’ का ‘ण’ होना

ऋ, र या ष के बाद न आए (बीच में स्वर, क वर्ग, प वर्ग, य, व, ह या अनुस्वार हो तब भी), तो ‘न’ का ‘ण’ हो जाता है।

मेलउदाहरण
र/ऋ/ष + न → णराम + अयन = रामायण
परि + नाम = परिणाम
परि + नय = परिणय
परि + मान = परिमाण
प्र + मान = प्रमाण
प्र + यान = प्रयाण
भूष + अन = भूषण
शोष + अन = शोषण
तृष् + ना = तृष्णा

नियम 7: ‘स’ का ‘ष’ होना

अ, आ के अलावा किसी स्वर के बाद स आए, तो प्रायः ‘स’ का ‘ष’ हो जाता है।

मेलउदाहरण
इ/उ + स → षअभि + सेक = अभिषेक
अभि + सिक्त = अभिषिक्त
वि + सम = विषम
नि + सिद्ध = निषिद्ध
नि + सेध = निषेध
सु + सुप्त = सुषुप्त
सु + समा = सुषमा
अनु + संग = अनुषंग

3. विसर्ग संधि

विसर्ग (ः) के बाद स्वर या व्यंजन आने पर जो परिवर्तन होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं। पहचान: संधि-विच्छेद करने पर पहले शब्द के अंत में विसर्ग आता है — मनः, निः, दुः, तपः, नमः।

नियम 1: विसर्ग का ‘ओ’ होना

विसर्ग से पहले अ हो और बाद में अ, वर्ग का तीसरा/चौथा/पाँचवाँ वर्ण या य, र, ल, व, ह हो, तो विसर्ग का ओ हो जाता है।

मेलउदाहरण
अः → ओमनः + बल = मनोबल
मनः + रंजन = मनोरंजन
मनः + हर = मनोहर
मनः + योग = मनोयोग
मनः + विकार = मनोविकार
मनः + विज्ञान = मनोविज्ञान
मनः + वृत्ति = मनोवृत्ति
मनः + नीत = मनोनीत
मनः + अनुकूल = मनोनुकूल
यशः + दा = यशोदा
यशः + गान = यशोगान
अधः + गति = अधोगति
तपः + बल = तपोबल
तपः + भूमि = तपोभूमि
वयः + वृद्ध = वयोवृद्ध
सरः + ज = सरोज
पयः + द = पयोद
तमः + गुण = तमोगुण
रजः + गुण = रजोगुण
तेजः + मय = तेजोमय

नियम 2: विसर्ग का ‘र्’ होना

विसर्ग से पहले अ/आ के अलावा कोई स्वर (इ, उ आदि) हो और बाद में स्वर, वर्ग का तीसरा/चौथा/पाँचवाँ वर्ण या य, ल, व, ह हो, तो विसर्ग का र् हो जाता है।

मेलउदाहरण
इः/उः → र्निः + आशा = निराशा
निः + आधार = निराधार
निः + आहार = निराहार
निः + उत्तर = निरुत्तर
निः + ईक्षण = निरीक्षण
निः + अर्थक = निरर्थक
निः + धन = निर्धन
निः + जन = निर्जन
निः + गुण = निर्गुण
निः + भय = निर्भय
निः + मल = निर्मल
निः + झर = निर्झर
निः + यात = निर्यात
निः + विकार = निर्विकार
दुः + गुण = दुर्गुण
दुः + आचार = दुराचार
दुः + उपयोग = दुरुपयोग
दुः + बल = दुर्बल
दुः + लभ = दुर्लभ
दुः + गम = दुर्गम
बहिः + मुख = बहिर्मुख
बहिः + गमन = बहिर्गमन
आशीः + वाद = आशीर्वाद
ज्योतिः + मय = ज्योतिर्मय
आयुः + वेद = आयुर्वेद
धनुः + धर = धनुर्धर

विशेष: ‘पुनः’ और ‘अंतः’ में विसर्ग से पहले अ होने पर भी विसर्ग का र् बनता है — पुनः + जन्म = पुनर्जन्म, पुनः + उत्थान = पुनरुत्थान, पुनः + आगमन = पुनरागमन, अंतः + गत = अंतर्गत, अंतः + धान = अंतर्धान।

नियम 3: विसर्ग का श्, ष्, स् होना

मेलपरिणामउदाहरण
विसर्ग + च/छः → श्निः + चल = निश्चल
निः + चय = निश्चय
निः + चिंत = निश्चिंत
निः + छल = निश्छल
दुः + चरित्र = दुश्चरित्र
दुः + चक्र = दुश्चक्र
हरिः + चंद्र = हरिश्चंद्र
तपः + चर्या = तपश्चर्या
विसर्ग + ट/ठः → ष्धनुः + टंकार = धनुष्टंकार
विसर्ग + त/थः → स्नमः + ते = नमस्ते
निः + तेज = निस्तेज
निः + तार = निस्तार
दुः + तर = दुस्तर
मनः + ताप = मनस्ताप

नियम 4: इ/उ + विसर्ग + क, ख, प, फ = ष्

मेलउदाहरण
इः/उः + क/प/फ → ष्निः + कपट = निष्कपट
निः + काम = निष्काम
निः + कर्ष = निष्कर्ष
निः + पाप = निष्पाप
निः + प्राण = निष्प्राण
निः + फल = निष्फल
दुः + कर = दुष्कर
दुः + कर्म = दुष्कर्म
दुः + प्रभाव = दुष्प्रभाव
दुः + परिणाम = दुष्परिणाम
बहिः + कार = बहिष्कार
आविः + कार = आविष्कार
चतुः + पद = चतुष्पद

ध्यान दें: अ + विसर्ग + क/प में कहीं विसर्ग का स् बनता है (नमः + कार = नमस्कार, पुरः + कार = पुरस्कार, तिरः + कार = तिरस्कार, भाः + कर = भास्कर) और कहीं विसर्ग ज्यों-का-त्यों रहता है (प्रातः + काल = प्रातःकाल, अंतः + करण = अंतःकरण, अधः + पतन = अधःपतन)।

नियम 5: इ/उ + विसर्ग + र

विसर्ग का लोप हो जाता है और उससे पहले का ह्रस्व स्वर दीर्घ हो जाता है।

मेलउदाहरण
निः + र… → नी…निः + रोग = नीरोग
निः + रस = नीरस
निः + रव = नीरव
निः + रज = नीरज

नियम 6: विसर्ग + श, ष, स

विसर्ग ज्यों-का-त्यों रहता है या बाद वाला वर्ण दोहरा हो जाता है — निः + संदेह = निःसंदेह/निस्संदेह, निः + संकोच = निःसंकोच, निः + संतान = निःसंतान, दुः + साहस = दुःसाहस/दुस्साहस, दुः + शासन = दुःशासन।

नियम 7: अ + विसर्ग + अ के अलावा स्वर

विसर्ग का लोप हो जाता है और फिर संधि नहीं होती — अतः + एव = अतएव।

हिंदी (तद्भव) शब्दों में संधि

संस्कृत के अलावा हिंदी के अपने शब्दों में भी कुछ संधियाँ मिलती हैं। इनमें अक्सर ‘ह’ का लोप होकर पहला व्यंजन महाप्राण हो जाता है या मात्रा बदल जाती है:

संधि-विच्छेदशब्द
यह + हीयही
वह + हीवही
सब + हीसभी
तब + हीतभी
कब + हीकभी
जब + हीजभी

संधि और समास में अंतर

आधारसंधिसमास
किसका मेलवर्णों (अक्षरों) कापदों (शब्दों) का
अलग करने को कहते हैंसंधि-विच्छेदसमास-विग्रह
अलग करते समयबीच में ‘+’ लगता हैकारक चिह्न या योजक शब्द जुड़ते हैं
उदाहरणविद्यालय = विद्या + आलयविद्यालय = विद्या के लिए आलय

ध्यान दें — एक ही शब्द में संधि और समास दोनों हो सकते हैं। ‘विद्यालय’ में दीर्घ संधि भी है और तत्पुरुष समास भी।

आम गलतियाँ और सही रूप

गलतसहीकारण
अत्याधिकअत्यधिकअति + अधिक (यण् संधि)
उपरोक्तउपर्युक्तउपरि + उक्त (यण् संधि)
इत्यादीइत्यादिइति + आदि; अंत में ह्रस्व इ
संराटसम्राटम् + र का अपवाद
महर्षि में वृद्धि संधिमहर्षि में गुण संधिआ + ऋ = अर्

बहुविकल्पीय प्रश्न — स्तर 1: आसान (कक्षा 6–8)

इन प्रश्नों में संधि-विच्छेद और संधि की पहचान के सीधे प्रश्न हैं।

1. ‘विद्यालय’ का सही संधि-विच्छेद है—
(क) विद्या + अलय
(ख) विद्या + आलय
(ग) विद्य + आलय
(घ) विद्या + लय

2. ‘संधि’ शब्द का अर्थ है—
(क) मेल
(ख) तोड़ना
(ग) छोटा करना
(घ) अलग होना

3. संधि के कितने मुख्य भेद हैं?
(क) तीन
(ख) दो
(ग) पाँच
(घ) चार

4. ‘हिम + आलय’ से बनने वाला शब्द है—
(क) हिमलय
(ख) हेमालय
(ग) हिमालय
(घ) हिमालया

5. ‘सूर्योदय’ का संधि-विच्छेद है—
(क) सूर्य + उदय
(ख) सूर्य + ओदय
(ग) सूर्यो + दय
(घ) सूर + उदय

6. ‘महात्मा’ में कौन-सी संधि है?
(क) यण्
(ख) वृद्धि
(ग) गुण
(घ) दीर्घ

7. ‘देव + इंद्र’ मिलकर बनता है—
(क) देवेंद्र
(ख) देव्यंद्र
(ग) दैवेंद्र
(घ) देविंद्र

8. ‘सदैव’ का संधि-विच्छेद है—
(क) सदा + ऐव
(ख) सदा + एव
(ग) सदै + व
(घ) सद + एव

9. ‘स्वागत’ का संधि-विच्छेद है—
(क) सु + आगत
(ख) स्वा + गत
(ग) स्व + आगत
(घ) सू + आगत

10. ‘नयन’ का संधि-विच्छेद है—
(क) ने + अन
(ख) न + यन
(ग) नै + अन
(घ) नय + न

11. ‘रमेश’ का संधि-विच्छेद है—
(क) रमा + इश
(ख) राम + ईश
(ग) रमा + ईश
(घ) रम + एश

12. ‘जगदीश’ में कौन-सी संधि है?
(क) कोई संधि नहीं
(ख) व्यंजन संधि
(ग) विसर्ग संधि
(घ) स्वर संधि

13. ‘मनोबल’ का संधि-विच्छेद है—
(क) मन + ओबल
(ख) मनः + बल
(ग) मन + बल
(घ) मनो + बल

14. ‘निराशा’ का संधि-विच्छेद है—
(क) निः + आशा
(ख) नीर + आशा
(ग) निर + आशा
(घ) नि + राशा

15. स्वर के साथ स्वर के मेल से होने वाला परिवर्तन कहलाता है—
(क) विसर्ग संधि
(ख) समास
(ग) स्वर संधि
(घ) व्यंजन संधि

16. ‘परोपकार’ का संधि-विच्छेद है—
(क) परो + पकार
(ख) पर + उपकार
(ग) परा + उपकार
(घ) पर + ओपकार

17. ‘इत्यादि’ का संधि-विच्छेद है—
(क) इति + आदि
(ख) इति + यादि
(ग) इत् + आदि
(घ) इत्य + आदि

18. ‘पवन’ का संधि-विच्छेद है—
(क) पव + अन
(ख) प + वन
(ग) पो + अन
(घ) पौ + अन

19. ‘सज्जन’ का संधि-विच्छेद है—
(क) सद् + जन
(ख) सज् + जन
(ग) स + जन
(घ) सत् + जन

20. ‘नमस्ते’ का संधि-विच्छेद है—
(क) नमो + ते
(ख) नमः + ते
(ग) नम + स्ते
(घ) नमस् + ते

21. ‘देवालय’ का संधि-विच्छेद है—
(क) देव + आलय
(ख) देव + अलय
(ग) देवा + लय
(घ) दे + वालय

22. ‘गणेश’ का संधि-विच्छेद है—
(क) गणे + श
(ख) गण + ईश
(ग) गणा + ईश
(घ) गण + एश

23. ‘महोत्सव’ का संधि-विच्छेद है—
(क) महा + ओत्सव
(ख) महो + त्सव
(ग) मह + उत्सव
(घ) महा + उत्सव

24. ‘पुस्तकालय’ में कौन-सी संधि है?
(क) यण्
(ख) दीर्घ
(ग) वृद्धि
(घ) गुण

25. ‘भोजनालय’ का संधि-विच्छेद है—
(क) भोज + नालय
(ख) भोजन + आलय
(ग) भोजना + लय
(घ) भोजन + अलय

26. ‘सूक्ति’ का संधि-विच्छेद है—
(क) सु + ऊक्ति
(ख) सू + उक्ति
(ग) सूक् + ति
(घ) सु + उक्ति

27. ‘व्यायाम’ का संधि-विच्छेद है—
(क) वि + आयाम
(ख) व्य + आयाम
(ग) व्या + याम
(घ) वि + यायाम

28. ‘भवन’ का संधि-विच्छेद है—
(क) भो + अन
(ख) भव + न
(ग) भौ + अन
(घ) भ + वन

29. ‘निर्धन’ का संधि-विच्छेद है—
(क) नि + धन
(ख) निर् + धन
(ग) निर + धन
(घ) निः + धन

30. ‘संतोष’ का संधि-विच्छेद है—
(क) सं + तोष
(ख) सम् + तोष
(ग) सन् + तोष
(घ) सत् + तोष

31. ‘नरेंद्र’ का संधि-विच्छेद है—
(क) नरा + इंद्र
(ख) नरे + इंद्र
(ग) नर + एंद्र
(घ) नर + इंद्र

32. ‘सत्याग्रह’ में कौन-सी संधि है?
(क) दीर्घ
(ख) वृद्धि
(ग) गुण
(घ) यण्

33. ‘उल्लेख’ का संधि-विच्छेद है—
(क) उद् + लेख
(ख) उल् + लेख
(ग) उत् + लेख
(घ) उ + लेख

34. ‘निश्चय’ का संधि-विच्छेद है—
(क) निश् + चय
(ख) निस् + चय
(ग) निः + चय
(घ) नि + श्चय

35. ‘रवींद्र’ का संधि-विच्छेद है—
(क) रवी + इंद्र
(ख) रव + इंद्र
(ग) रवि + इंद्र
(घ) रवि + ईंद्र

36. विसर्ग का चिह्न कौन-सा है?
(क) ं
(ख) ्
(ग) ः
(घ) ँ

37. ‘गायन’ का संधि-विच्छेद है—
(क) गै + अन
(ख) गे + अन
(ग) गा + यन
(घ) गाय + न

38. ‘प्रश्नोत्तर’ का संधि-विच्छेद है—
(क) प्रश्न + ओत्तर
(ख) प्रश्नो + त्तर
(ग) प्रश्ना + उत्तर
(घ) प्रश्न + उत्तर

39. ‘मनोरंजन’ का संधि-विच्छेद है—
(क) मनः + रंजन
(ख) मनो + रंजन
(ग) मन + रंजन
(घ) मन + ओरंजन

40. ‘यद्यपि’ का संधि-विच्छेद है—
(क) यदि + अपि
(ख) यद्य + पि
(ग) यदी + अपि
(घ) यद् + अपि

इस स्तर के उत्तर और कारण लेख के अंत में ‘उत्तर कुंजी’ में दिए गए हैं — पहले ख़ुद हल करें, फिर मिलाएँ।

बहुविकल्पीय प्रश्न — स्तर 2: मध्यम (कक्षा 9–10, बोर्ड परीक्षा)

बोर्ड परीक्षा में संधि के प्रश्न इसी तरह पूछे जाते हैं — भेद पहचानना, सही विच्छेद चुनना और नियम का कारण बताना।

1. निम्नलिखित में से गुण संधि का उदाहरण है—
(क) सदैव
(ख) अत्यधिक
(ग) महर्षि
(घ) विद्यार्थी

2. ‘प्रत्येक’ में कौन-सी संधि है?
(क) अयादि
(ख) यण्
(ग) गुण
(घ) वृद्धि

3. ‘जलौघ’ का संधि-विच्छेद है—
(क) जला + ओघ
(ख) जलो + घ
(ग) जल + औघ
(घ) जल + ओघ

4. ‘नायक’ का संधि-विच्छेद है—
(क) ने + अक
(ख) नाय + क
(ग) ना + यक
(घ) नै + अक

5. ‘उल्लास’ का संधि-विच्छेद है—
(क) उल् + लास
(ख) उ + लास
(ग) उद् + लास
(घ) उत् + लास

6. ‘संसार’ का संधि-विच्छेद है—
(क) सन् + सार
(ख) सम् + सार
(ग) सस् + आर
(घ) सं + सार

7. ‘उन्नति’ का संधि-विच्छेद है—
(क) उन् + नति
(ख) उत् + नति
(ग) उद् + नति
(घ) उ + नति

8. ‘दिगंबर’ का संधि-विच्छेद है—
(क) दि + गंबर
(ख) दिग + अंबर
(ग) दिग् + अंबर
(घ) दिक् + अंबर

9. ‘निश्चल’ का संधि-विच्छेद है—
(क) निश् + चल
(ख) निः + चल
(ग) नि + श्चल
(घ) निस् + चल

10. ‘दुर्गुण’ में कौन-सी संधि है?
(क) स्वर
(ख) विसर्ग
(ग) व्यंजन
(घ) दीर्घ

11. ‘अनुच्छेद’ का संधि-विच्छेद है—
(क) अनुच् + छेद
(ख) अन + उच्छेद
(ग) अनु + छेद
(घ) अनु + च्छेद

12. ‘रामायण’ में ‘न’ का ‘ण’ क्यों हुआ?
(क) ‘म’ के कारण
(ख) ‘य’ के कारण
(ग) दीर्घ स्वर के कारण
(घ) पहले ‘र’ आने के कारण

13. ‘अभिषेक’ का संधि-विच्छेद है—
(क) अभिष + एक
(ख) अभि + षेक
(ग) अभी + सेक
(घ) अभि + सेक

14. ‘एकैक’ में कौन-सी संधि है?
(क) वृद्धि
(ख) यण्
(ग) दीर्घ
(घ) गुण

15. ‘गायक’ में कौन-सी संधि है?
(क) यण्
(ख) गुण
(ग) वृद्धि
(घ) अयादि

16. ‘सम्मान’ का संधि-विच्छेद है—
(क) सन् + मान
(ख) सं + आन
(ग) सम् + मान
(घ) सम + मान

17. ‘उच्चारण’ का संधि-विच्छेद है—
(क) उ + च्चारण
(ख) उत् + चारण
(ग) उद् + चारण
(घ) उच् + चारण

18. निम्नलिखित में से सही संधि-विच्छेद कौन-सा है?
(क) गिरीश = गिरि + इश
(ख) गिरीश = गि + रीश
(ग) गिरीश = गिरी + इश
(घ) गिरीश = गिरि + ईश

19. ‘निष्फल’ का संधि-विच्छेद है—
(क) निष् + फल
(ख) निः + फल
(ग) निस् + फल
(घ) नि + फल

20. ‘यथार्थ’ में कौन-सी संधि है?
(क) गुण
(ख) यण्
(ग) दीर्घ
(घ) वृद्धि

21. ‘पर्यावरण’ में कौन-सी संधि है?
(क) यण्
(ख) गुण
(ग) दीर्घ
(घ) अयादि

22. ‘नाविक’ का संधि-विच्छेद है—
(क) नाव + इक
(ख) नौ + इक
(ग) ना + विक
(घ) नो + इक

23. ‘तन्मय’ का संधि-विच्छेद है—
(क) तद् + मय
(ख) त + न्मय
(ग) तत् + मय
(घ) तन् + मय

24. ‘संविधान’ का संधि-विच्छेद है—
(क) संवि + धान
(ख) सम् + विधान
(ग) सं + विधान
(घ) सन् + विधान

25. ‘निरीक्षण’ का संधि-विच्छेद है—
(क) नि + रीक्षण
(ख) निर् + ईक्षण
(ग) निरी + क्षण
(घ) निः + ईक्षण

26. ‘तपोभूमि’ का संधि-विच्छेद है—
(क) तप + ओभूमि
(ख) तपः + भूमि
(ग) तप + भूमि
(घ) तपो + भूमि

27. ‘सद्भावना’ में कौन-सी संधि है?
(क) स्वर
(ख) व्यंजन
(ग) गुण
(घ) विसर्ग

28. ‘हितोपदेश’ का संधि-विच्छेद है—
(क) हित + उपदेश
(ख) हितो + पदेश
(ग) हिता + उपदेश
(घ) हित + ओपदेश

29. ‘मतैक्य’ में कौन-सी संधि है?
(क) दीर्घ
(ख) वृद्धि
(ग) यण्
(घ) गुण

30. ‘परीक्षा’ का संधि-विच्छेद है—
(क) परी + क्षा
(ख) परि + ईक्षा
(ग) परि + इक्षा
(घ) पर + ईक्षा

31. ‘उज्ज्वल’ का संधि-विच्छेद है—
(क) उद् + ज्वल
(ख) उ + ज्ज्वल
(ग) उत् + ज्वल
(घ) उज् + ज्वल

32. ‘दुर्लभ’ का संधि-विच्छेद है—
(क) दु + र्लभ
(ख) दुर + लभ
(ग) दुः + लभ
(घ) दुर् + लभ

33. ‘हरिश्चंद्र’ का संधि-विच्छेद है—
(क) हरिश् + चंद्र
(ख) हरिः + चंद्र
(ग) हरी + श्चंद्र
(घ) हरि + चंद्र

34. ‘निष्काम’ में कौन-सी संधि है?
(क) दीर्घ
(ख) स्वर
(ग) व्यंजन
(घ) विसर्ग

35. ‘ऋग्वेद’ का संधि-विच्छेद है—
(क) ऋग + वेद
(ख) ऋग् + वेद
(ग) ऋक् + वेद
(घ) ऋ + ग्वेद

36. ‘स्वच्छ’ का संधि-विच्छेद है—
(क) सु + अच्छ
(ख) स्व + च्छ
(ग) स्व + अच्छ
(घ) सू + अच्छ

37. ‘परिणाम’ में ‘न’ का ‘ण’ होने का कारण है—
(क) ‘म’ का होना
(ख) दीर्घ ‘आ’ का होना
(ग) पहले ‘र’ का होना
(घ) ‘प’ का होना

38. ‘आयुर्वेद’ का संधि-विच्छेद है—
(क) आयु + वेद
(ख) आयुर् + वेद
(ग) आयुर + वेद
(घ) आयुः + वेद

39. ‘संचय’ का संधि-विच्छेद है—
(क) सन् + चय
(ख) सम् + चय
(ग) संच + य
(घ) सं + चय

40. ‘तथैव’ में कौन-सी संधि है?
(क) गुण
(ख) वृद्धि
(ग) दीर्घ
(घ) अयादि

इस स्तर के उत्तर और कारण लेख के अंत में ‘उत्तर कुंजी’ में दिए गए हैं — पहले ख़ुद हल करें, फिर मिलाएँ।

बहुविकल्पीय प्रश्न — स्तर 3: कठिन (कक्षा 11–12, CTET/TET और प्रतियोगी परीक्षाएँ)

प्रतियोगी परीक्षाओं में अपवाद, ‘कौन-सा नहीं है’, सुमेलन और कथन-कारण वाले प्रश्न अधिक आते हैं।

1. ‘उपर्युक्त’ का सही संधि-विच्छेद है—
(क) उपर + युक्त
(ख) उपरि + उक्त
(ग) उपर् + उक्त
(घ) उप + युक्त

2. ‘अत्यधिक’ के बारे में सही कथन है—
(क) इसका विच्छेद अति + अधिक है और इसमें यण् संधि है
(ख) इसमें दीर्घ संधि है
(ग) इसका शुद्ध रूप ‘अत्याधिक’ है
(घ) इसमें गुण संधि है

3. ‘नीरोग’ का सही संधि-विच्छेद है—
(क) निः + रोग
(ख) नी + रोग
(ग) नि + रोग
(घ) नीर + ओग

4. ‘सम्राट’ शब्द व्यंजन संधि का अपवाद क्यों है?
(क) इसमें स्वर संधि है
(ख) इसमें विसर्ग संधि है
(ग) म् + र के मेल में अनुस्वार न होकर म् बना रहता है
(घ) इसमें ‘ट’ का लोप हुआ है

5. ‘उद्धार’ का संधि-विच्छेद है—
(क) उत् + धार
(ख) उत् + हार
(ग) उद् + धार
(घ) उ + द्धार

6. ‘मन्वंतर’ का संधि-विच्छेद है—
(क) मन्व + अंतर
(ख) मन + अंतर
(ग) मनु + अंतर
(घ) मनः + अंतर

7. ‘तद्धित’ का संधि-विच्छेद है—
(क) तद् + धित
(ख) तत् + धित
(ग) तद् + हित
(घ) तत् + हित

8. ‘पुनर्जन्म’ का संधि-विच्छेद है—
(क) पुन + जन्म
(ख) पुनः + जन्म
(ग) पुनर + जन्म
(घ) पुनर् + जन्म

9. ‘वाङ्मय’ का संधि-विच्छेद है—
(क) वाक् + मय
(ख) वा + मय
(ग) वाङ् + मय
(घ) वाग् + मय

10. ‘पावक’ का संधि-विच्छेद है—
(क) पौ + अक
(ख) पव + क
(ग) पा + वक
(घ) पो + अक

11. ‘मनोनुकूल’ का संधि-विच्छेद है—
(क) मनः + अनुकूल
(ख) मनो + नुकूल
(ग) मनस् + अनुकूल
(घ) मन + अनुकूल

12. ‘अतएव’ में कौन-सी संधि है?
(क) विसर्ग
(ख) स्वर
(ग) गुण
(घ) व्यंजन

13. निम्नलिखित में से किस शब्द में यण् संधि नहीं है?
(क) अत्यंत
(ख) महेंद्र
(ग) अन्वेषण
(घ) पित्राज्ञा

14. निम्नलिखित में से किस शब्द में व्यंजन संधि नहीं है?
(क) नयन
(ख) सद्धर्म
(ग) संयोग
(घ) षण्मास

15. ‘षडानन’ का संधि-विच्छेद है—
(क) षड + आनन
(ख) षडा + नन
(ग) षट् + आनन
(घ) षष् + आनन

16. कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
(क) सूक्ति — दीर्घ
(ख) देवर्षि — वृद्धि
(ग) महौषध — वृद्धि
(घ) भावुक — अयादि

17. ‘उच्छ्वास’ का संधि-विच्छेद है—
(क) उच् + श्वास
(ख) उत् + श्वास
(ग) उद् + श्वास
(घ) उ + च्छ्वास

18. ‘दुस्तर’ का संधि-विच्छेद है—
(क) दुष् + तर
(ख) दुस् + तर
(ग) दु + स्तर
(घ) दुः + तर

19. कथन (A): ‘विद्यालय’ में संधि भी है और समास भी।
कारण (R): संधि वर्णों का मेल है, जबकि समास पदों का मेल है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।
(ख) A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।

20. कथन (A): ‘महर्षि’ में वृद्धि संधि है।
कारण (R): अ/आ के बाद ऋ आने पर ‘अर्’ हो जाता है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।
(ख) A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।

21. ‘पित्रादेश’ में कौन-सी संधि है?
(क) दीर्घ
(ख) वृद्धि
(ग) गुण
(घ) यण्

22. ‘उच्छिष्ट’ का संधि-विच्छेद है—
(क) उच् + शिष्ट
(ख) उद् + शिष्ट
(ग) उत् + छिष्ट
(घ) उत् + शिष्ट

23. ‘पद्धति’ का संधि-विच्छेद है—
(क) पद + धति
(ख) पद् + हति
(ग) पद् + धति
(घ) पत् + धति

24. ‘भास्कर’ का संधि-विच्छेद है—
(क) भास + कर
(ख) भा + स्कर
(ग) भास् + कर
(घ) भाः + कर

25. ‘आविष्कार’ का संधि-विच्छेद है—
(क) आविष् + कार
(ख) आविस् + कार
(ग) आवि + ष्कार
(घ) आविः + कार

26. ‘तिरस्कार’ का संधि-विच्छेद है—
(क) तिर + स्कार
(ख) तिरस + कार
(ग) तिरः + कार
(घ) तिरस् + कार

27. ‘न्यून’ का संधि-विच्छेद है—
(क) नी + ऊन
(ख) न्य + ऊन
(ग) नि + उन
(घ) नि + ऊन

28. ‘अभ्युदय’ का संधि-विच्छेद है—
(क) अभी + उदय
(ख) अभ्यु + दय
(ग) अभ + युदय
(घ) अभि + उदय

29. ‘नीरज’ का संधि-विच्छेद है—
(क) नीर + ज
(ख) निः + रज
(ग) नी + रज
(घ) नि + रज

30. ‘षण्मुख’ का संधि-विच्छेद है—
(क) षट् + मुख
(ख) षष् + मुख
(ग) षण् + मुख
(घ) षड् + मुख

31. ‘किंचित’ का संधि-विच्छेद है—
(क) किम् + चित
(ख) कि + चित
(ग) किन् + चित
(घ) किं + चित

32. ‘सुषमा’ का संधि-विच्छेद है—
(क) सु + षमा
(ख) सु + समा
(ग) सू + समा
(घ) सुष + मा

33. ‘भगवद्गीता’ का संधि-विच्छेद है—
(क) भगव + द्गीता
(ख) भगवद् + गीता
(ग) भगवत् + गीता
(घ) भगवान + गीता

34. ‘शरच्चंद्र’ का संधि-विच्छेद है—
(क) शर + च्चंद्र
(ख) शरत् + चंद्र
(ग) शरच् + चंद्र
(घ) शरद् + चंद्र

35. निम्नलिखित में से किस शब्द में विसर्ग ज्यों-का-त्यों रहा है?
(क) निष्कपट
(ख) प्रातःकाल
(ग) दुस्तर
(घ) नमस्कार

36. कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
(क) अन्वय — गुण
(ख) श्रवण — अयादि
(ग) व्यूह — यण्
(घ) अभीष्ट — दीर्घ

37. निम्नलिखित में से किस शब्द में गुण संधि है?
(क) गायक
(ख) व्यर्थ
(ग) सदैव
(घ) राजर्षि

38. ‘ज्योतिर्मय’ का संधि-विच्छेद है—
(क) ज्योति + मय
(ख) ज्योतिः + मय
(ग) ज्योतिर + मय
(घ) ज्योतिर् + मय

39. कथन (A): ‘नयन’ में अयादि संधि है।
कारण (R): ए के बाद कोई स्वर आए तो ए का अय् हो जाता है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।
(ख) A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।

40. कथन (A): ‘सम्मेलन’ में म् का अनुस्वार हुआ है।
कारण (R): म् के बाद म आने पर म्म हो जाता है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।
(ख) A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।

इस स्तर के उत्तर और कारण लेख के अंत में ‘उत्तर कुंजी’ में दिए गए हैं — पहले ख़ुद हल करें, फिर मिलाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: संधि-विच्छेद क्या होता है?
उत्तर: संधि से बने शब्द को उसके मूल शब्दों में अलग करके लिखना संधि-विच्छेद है, जैसे — सूर्योदय = सूर्य + उदय।

प्रश्न: स्वर संधि के कितने भेद हैं?
उत्तर: पाँच — दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण् और अयादि। याद रखने का सूत्र है “दी-गु-वृ-य-अ”।

प्रश्न: संधि और समास में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर: संधि वर्णों का मेल है और समास पदों (शब्दों) का। संधि को अलग करना संधि-विच्छेद और समास को अलग करना समास-विग्रह कहलाता है।

प्रश्न: ‘उपरोक्त’ सही है या ‘उपर्युक्त’?
उत्तर: ‘उपर्युक्त’ सही है, क्योंकि उपरि + उक्त में यण् संधि होती है।

प्रश्न: विसर्ग संधि को जल्दी कैसे पहचानें?
उत्तर: संधि-विच्छेद में पहले शब्द के अंत में विसर्ग (ः) हो, जैसे मनः, निः, दुः, तो वह विसर्ग संधि है।

उत्तर कुंजी (उत्तर और कारण)

स्तर 1: आसान (कक्षा 6–8)

1. (ख) — आ + आ = आ (दीर्घ संधि)।

2. (क) — संधि का अर्थ है मेल या जोड़।

3. (क) — स्वर, व्यंजन और विसर्ग संधि।

4. (ग) — अ + आ = आ (दीर्घ संधि)।

5. (क) — अ + उ = ओ (गुण संधि)।

6. (घ) — महा + आत्मा; आ + आ = आ।

7. (क) — अ + इ = ए (गुण संधि)।

8. (ख) — आ + ए = ऐ (वृद्धि संधि)।

9. (क) — उ + आ = वा (यण् संधि)।

10. (क) — ए + अ = अय (अयादि संधि)।

11. (ग) — आ + ई = ए (गुण संधि)।

12. (ख) — जगत् + ईश; त् का द् हुआ।

13. (ख) — अ + विसर्ग + ब → ओ (विसर्ग संधि)।

14. (क) — इ + विसर्ग + स्वर → र् (विसर्ग संधि)।

15. (ग) — परिभाषा के अनुसार।

16. (ख) — अ + उ = ओ (गुण संधि)।

17. (क) — इ + आ = या (यण् संधि)।

18. (ग) — ओ + अ = अव (अयादि संधि)।

19. (घ) — त् + ज = ज्ज (व्यंजन संधि)।

20. (ख) — विसर्ग + त → स् (विसर्ग संधि)।

21. (क) — अ + आ = आ (दीर्घ संधि)।

22. (ख) — अ + ई = ए (गुण संधि)।

23. (घ) — आ + उ = ओ (गुण संधि)।

24. (ख) — पुस्तक + आलय; अ + आ = आ।

25. (ख) — अ + आ = आ (दीर्घ संधि)।

26. (घ) — उ + उ = ऊ (दीर्घ संधि)।

27. (क) — इ + आ = या (यण् संधि)।

28. (क) — ओ + अ = अव (अयादि संधि)।

29. (घ) — इ + विसर्ग + ध → र् (विसर्ग संधि)।

30. (ख) — म् + त → अनुस्वार (व्यंजन संधि)।

31. (घ) — अ + इ = ए (गुण संधि)।

32. (क) — सत्य + आग्रह; अ + आ = आ।

33. (ग) — त् + ल = ल्ल (व्यंजन संधि)।

34. (ग) — विसर्ग + च → श् (विसर्ग संधि)।

35. (ग) — इ + इ = ई (दीर्घ संधि)।

36. (ग) — दो बिंदुओं वाला चिह्न (ः) विसर्ग है; ं अनुस्वार और ँ चंद्रबिंदु है।

37. (क) — ऐ + अ = आय (अयादि संधि)।

38. (घ) — अ + उ = ओ (गुण संधि)।

39. (क) — अ + विसर्ग + र → ओ (विसर्ग संधि)।

40. (क) — इ + अ = य (यण् संधि)।

स्तर 2: मध्यम (कक्षा 9–10, बोर्ड परीक्षा)

1. (ग) — महा + ऋषि; आ + ऋ = अर्। सदैव में वृद्धि, अत्यधिक में यण्, विद्यार्थी में दीर्घ।

2. (ख) — प्रति + एक; इ + ए = ये।

3. (घ) — अ + ओ = औ (वृद्धि संधि)।

4. (घ) — ऐ + अ = आय (अयादि संधि)।

5. (घ) — त् + ल = ल्ल।

6. (ख) — म् + स → अनुस्वार।

7. (ख) — त् + न → न्न (पहला वर्ण पाँचवें में)।

8. (घ) — क् + स्वर → ग्।

9. (ख) — विसर्ग + च → श्।

10. (ख) — दुः + गुण; विसर्ग का र् हुआ।

11. (ग) — स्वर + छ = च्छ।

12. (घ) — र, ऋ, ष के बाद न का ण होता है।

13. (घ) — इ के बाद स का ष।

14. (क) — एक + एक; अ + ए = ऐ।

15. (घ) — गै + अक; ऐ + अ = आय।

16. (ग) — म् + म = म्म।

17. (ख) — त् + च = च्च।

18. (घ) — इ + ई = ई (दीर्घ संधि)।

19. (ख) — इ + विसर्ग + फ → ष्।

20. (ग) — यथा + अर्थ; आ + अ = आ।

21. (क) — परि + आवरण; इ + आ = या।

22. (ख) — औ + इ = आवि (अयादि संधि)।

23. (ग) — त् + म → न् (पहला वर्ण पाँचवें में)।

24. (ख) — म् + व → अनुस्वार।

25. (घ) — इ + विसर्ग + स्वर → र्।

26. (ख) — अ + विसर्ग + भ → ओ।

27. (ख) — सत् + भावना; त् का द्।

28. (क) — अ + उ = ओ (गुण संधि)।

29. (ख) — मत + ऐक्य; अ + ऐ = ऐ।

30. (ख) — इ + ई = ई (दीर्घ संधि)।

31. (ग) — त् + ज = ज्ज।

32. (ग) — उ + विसर्ग + ल → र्।

33. (ख) — विसर्ग + च → श्।

34. (घ) — निः + काम; विसर्ग का ष्।

35. (ग) — क् + व → ग्।

36. (क) — उ + अ = व (यण् संधि)।

37. (ग) — र के बाद न का ण होता है।

38. (घ) — उ + विसर्ग + व → र्।

39. (ख) — म् + च → अनुस्वार।

40. (ख) — तथा + एव; आ + ए = ऐ।

स्तर 3: कठिन (कक्षा 11–12, CTET/TET और प्रतियोगी परीक्षाएँ)

1. (ख) — इ + उ = यु (यण् संधि)। ‘उपरोक्त’ अशुद्ध है।

2. (क) — इ + अ = य।

3. (क) — इ + विसर्ग + र → विसर्ग लोप, इ दीर्घ।

4. (ग) — नियम से ‘संराट’ बनना चाहिए, पर सम्राट होता है।

5. (ख) — त् + ह = द्ध।

6. (ग) — उ + अ = व (यण् संधि)।

7. (घ) — त् + ह = द्ध।

8. (ख) — पुनः का विसर्ग र् बनता है।

9. (क) — क् + म → ङ् (पहला वर्ण पाँचवें में)।

10. (क) — औ + अ = आव (अयादि संधि)।

11. (क) — अ + विसर्ग + अ → ओ, बाद वाले अ का लोप।

12. (क) — अतः + एव; विसर्ग का लोप।

13. (ख) — महा + इंद्र — गुण संधि। बाकी तीनों में यण्।

14. (क) — नयन (ने + अन) में अयादि स्वर संधि है।

15. (ग) — ट् + स्वर → ड्।

16. (ख) — देवर्षि (देव + ऋषि) में गुण संधि है।

17. (ख) — त् + श = च्छ।

18. (घ) — विसर्ग + त → स्।

19. (क) — दोनों अलग स्तर के मेल हैं, इसलिए एक शब्द में दोनों हो सकते हैं।

20. (घ) — R सही है, इसलिए महर्षि में गुण संधि है; A गलत है।

21. (घ) — पितृ + आदेश; ऋ + आ = रा।

22. (घ) — त् + श = च्छ।

23. (ख) — द् + ह = द्ध।

24. (घ) — विसर्ग + क → स् (विशेष रूप)।

25. (घ) — इ + विसर्ग + क → ष्।

26. (ग) — विसर्ग + क → स्।

27. (घ) — इ + ऊ = यू (यण् संधि)।

28. (घ) — इ + उ = यु (यण् संधि)।

29. (ख) — इ + विसर्ग + र → विसर्ग लोप, इ दीर्घ।

30. (क) — ट् + म → ण्।

31. (क) — म् + च → अनुस्वार।

32. (ख) — उ के बाद स का ष।

33. (ग) — त् + ग → द्।

34. (ख) — त् + च = च्च।

35. (ख) — प्रातः + काल में विसर्ग नहीं बदला।

36. (क) — अन्वय (अनु + अय) में यण् संधि है।

37. (घ) — राज + ऋषि; अ + ऋ = अर्।

38. (ख) — इ + विसर्ग + म → र्।

39. (क) — ने + अन = नयन; R ही इसका नियम है।

40. (घ) — सम्मेलन में अनुस्वार नहीं, म्म है; इसलिए A गलत और R सही।

इस लेख पर टेस्ट दें

इस लेख पर 3 स्तर के टेस्ट हैं — जो चाहें चुनें। अपना स्कोर, लगा समय और रैंक देखें।