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हिंदी व्याकरण सामान्य 29 अक्टूबर 2026

समास (Samas) — परिभाषा, छह भेद, 300 उदाहरण और 120 MCQ

लेखक: ज्ञान आर्काइव

हिंदी व्याकरण में समास वह विषय है जिससे बोर्ड परीक्षा से लेकर CTET, TET, UPSSSC, KVS जैसी परीक्षाओं तक हर बार प्रश्न आते हैं। इस लेख में समास को बिल्कुल आसान उदाहरणों से शुरू करके छहों भेदों तक समझाया गया है। शुरू में पूर्व पद, उत्तर पद, प्रधान पद, विग्रह, अव्यय, उपमान-उपमेय जैसे कठिन शब्द अलग से आसान भाषा में समझाए गए हैं। हर भेद के साथ उसकी पहचान और ढेर सारे उदाहरण हैं, और अंत में 120 बहुविकल्पीय प्रश्न तीन स्तरों (40-40) में उत्तर और कारण सहित दिए गए हैं। परीक्षा दें (टेस्ट दें)

समास को आसान भाषा में समझें

रोज़ की बोलचाल में हम लंबी बात को छोटा करके बोलते हैं। “राजा का पुत्र” कहने की जगह हम राजपुत्र कह देते हैं, “रसोई के लिए घर” की जगह रसोईघर, और “माता और पिता” की जगह माता-पिता।

यानी दो या अधिक शब्दों को जोड़कर, बीच के छोटे शब्दों (का, के लिए, और आदि) को हटाकर एक नया छोटा शब्द बना लेना ही समास है। ‘समास’ शब्द का अर्थ ही है — संक्षेप (छोटा करना)।

लंबा रूपहटाया गया शब्दछोटा रूप (समस्त पद)
राजा का पुत्रकाराजपुत्र
रसोई के लिए घरके लिएरसोईघर
माता और पिताऔरमाता-पिता
तीन लोकों का समूहका समूहत्रिलोक
नीला है जो कमलहै जोनीलकमल
शक्ति के अनुसारके अनुसारयथाशक्ति

परिभाषा: दो या दो से अधिक शब्दों (पदों) के मेल से, उनके बीच के विभक्ति-चिह्नों या योजक शब्दों का लोप करके, जो नया स्वतंत्र शब्द बनता है, उसे समास कहते हैं।

समास के कठिन शब्द — आसान भाषा में

समास पढ़ते समय कई ऐसे शब्द आते हैं जिनसे बच्चे अक्सर उलझ जाते हैं — पूर्व पद, उत्तर पद, प्रधान पद, विग्रह, अव्यय, उपमान आदि। आगे पढ़ने से पहले इन्हें एक-एक करके आसान उदाहरण से समझ लें। पूरे लेख में यही शब्द बार-बार आएँगे।

1. पद

व्याकरण में वाक्य में प्रयोग हुए शब्द को पद कहते हैं। समास में ‘पद’ का सीधा अर्थ समझें — शब्द।

2. समस्त पद (सामासिक पद)

समास से जो नया छोटा शब्द बनता है, उसे समस्त पद या सामासिक पद कहते हैं। ‘समस्त’ का अर्थ है — मिला हुआ।

उदाहरण: राजा का पुत्र → राजपुत्र। यहाँ ‘राजपुत्र’ समस्त पद है।

3. पूर्व पद और उत्तर पद

‘पूर्व’ का अर्थ है पहले वाला और ‘उत्तर’ का अर्थ है बाद वाला (यहाँ ‘उत्तर’ का अर्थ जवाब या उत्तर दिशा नहीं है)। समस्त पद में पहला शब्द पूर्व पद और दूसरा शब्द उत्तर पद होता है।

समस्त पदपूर्व पद (पहला शब्द)उत्तर पद (दूसरा शब्द)
राजपुत्रराज (राजा)पुत्र
रसोईघररसोईघर
माता-पितामातापिता
त्रिलोकत्रि (तीन)लोक
यथाशक्तियथाशक्ति
लंबोदरलंबाउदर

याद रखने की तरकीब: रेलगाड़ी के इंजन और डिब्बे की तरह सोचें — आगे वाला पूर्व पद, पीछे वाला उत्तर पद।

4. प्रधान पद (मुख्य पद)

समस्त पद में जिस शब्द पर अर्थ का ज़ोर होता है, जिसके बारे में असल में बात हो रही होती है, वही प्रधान पद है। इसे पहचानने के लिए खुद से पूछें — “यह आख़िर है क्या?”

समस्त पदप्रश्न: “यह है क्या?”उत्तरप्रधान पद
रसोईघररसोईघर क्या है?एक घरउत्तर पद (घर)
राजपुत्रराजपुत्र कौन है?एक पुत्रउत्तर पद (पुत्र)
प्रतिदिनप्रतिदिन का भाव क्या है?‘हर’ (प्रति) — हर दिनपूर्व पद (प्रति)
माता-पितामाता-पिता कौन हैं?माता भी और पिता भीदोनों पद
लंबोदरलंबोदर कौन है?न लंबा, न उदर — गणेशकोई नहीं (तीसरा अर्थ)

यही ‘प्रधान पद’ समास का भेद तय करता है — इसलिए यह सबसे ज़रूरी शब्द है।

5. समास-विग्रह

‘विग्रह’ का अर्थ है — अलग करना। समस्त पद को तोड़कर उसका पूरा अर्थ फिर से लिखना समास-विग्रह है। विग्रह करते समय बीच के हटाए गए शब्द (का, के लिए, और, जिसका आदि) वापस लिखे जाते हैं।

उदाहरण: रसोईघर → रसोई के लिए घर; सप्ताह → सात दिनों का समूह।

विग्रह और विच्छेद में अंतर: समास में विग्रह होता है (रसोई के लिए घर), संधि में विच्छेद होता है (विद्या + आलय)। विच्छेद में बीच में ‘+’ लगता है, विग्रह में पूरे शब्द लिखे जाते हैं।

6. लोप

लोप का अर्थ है — गायब हो जाना / हट जाना। समास बनाते समय बीच के छोटे शब्द (का, के लिए, और) हट जाते हैं — इसी को कहते हैं कि उनका ‘लोप’ हो गया।

7. विभक्ति / कारक-चिह्न

शब्दों को आपस में जोड़ने वाले छोटे शब्द — ने, को, से, के लिए, का/की/के, में, पर — कारक-चिह्न या विभक्ति कहलाते हैं। तत्पुरुष समास में इन्हीं का लोप होता है, और जो चिह्न हटा हो, उसी के नाम पर तत्पुरुष का भेद बनता है।

कारकचिह्नआसान अर्थतत्पुरुष उदाहरण
कर्मकोजिस पर काम का असर पड़ेशरणागत — शरण को आया
करणसे, के द्वाराजिस साधन से काम होहस्तलिखित — हाथ से लिखा
संप्रदानके लिएजिसके लिए काम होरसोईघर — रसोई के लिए घर
अपादानसे (अलग होना)जिससे कोई अलग होपथभ्रष्ट — पथ से भटका
संबंधका, की, केकिसी का किसी से रिश्ताराजपुत्र — राजा का पुत्र
अधिकरणमें, परजगह या आधारवनवास — वन में वास

8. अव्यय

अव्यय वे शब्द हैं जो कभी नहीं बदलते — लिंग, वचन या काल बदलने पर भी इनका रूप वैसा ही रहता है। जैसे — यथा, प्रति, आ, भर, बिना, बे, नि। ‘अव्यय’ = अ (नहीं) + व्यय (खर्च/बदलाव) = जो न बदले।

उदाहरण: “लड़का प्रतिदिन आता है”, “लड़की प्रतिदिन आती है”, “लड़के प्रतिदिन आते हैं” — ‘प्रतिदिन’ नहीं बदला। इसलिए यह अव्ययीभाव समास है।

9. विशेषण और विशेष्य

विशेषण वह शब्द है जो किसी की विशेषता (रंग, आकार, गुण) बताए, और विशेष्य वह शब्द है जिसकी विशेषता बताई जाए।

उदाहरण: नीलकमल में ‘नीला’ विशेषण है (रंग बता रहा है) और ‘कमल’ विशेष्य है (जिसका रंग बताया)। ऐसे जोड़े कर्मधारय समास बनाते हैं।

10. उपमान और उपमेय

जब किसी चीज़ की तुलना किसी दूसरी सुंदर/प्रसिद्ध चीज़ से की जाए — तो जिससे तुलना की जाए वह उपमान, और जिसकी तुलना की जाए वह उपमेय होता है।

उदाहरण: चंद्रमुख = चंद्र के समान मुख। यहाँ मुख की तुलना हो रही है — वह उपमेय है; चंद्र से तुलना हो रही है — वह उपमान है।

याद रखने की तरकीब: उपमेय = मेरा (जिसकी बात हो रही है, जैसे मुख); उपमान = मानक (जिसे पैमाना माना, जैसे चंद्र)।

11. संख्यावाचक

जो शब्द गिनती बताए — एक, दो (द्वि), तीन (त्रि), चार (चतुः/चौ), पाँच (पंच), सात (सप्त), नौ (नव), सौ (शत) — वह संख्यावाचक है। ऐसा शब्द पहले आए और अर्थ ‘समूह’ का हो तो द्विगु समास होता है।

12. योजक चिह्न (-)

दो शब्दों के बीच लगी छोटी रेखा (-) को योजक चिह्न कहते हैं — यह ‘जोड़ने’ का काम करती है। द्वंद्व समास में यह अक्सर ‘और’ की जगह लगती है: माता-पिता, सुख-दुख। (पर ध्यान दें — घर-घर जैसे दोहराए शब्दों में यह द्वंद्व नहीं, अव्ययीभाव है।)

13. पुनरुक्त शब्द

जब एक ही शब्द दोबारा आए — घर-घर, गाँव-गाँव, रातोंरात, हाथोंहाथ — तो उसे पुनरुक्त (फिर से कहा गया) शब्द कहते हैं। ऐसे शब्द प्रायः अव्ययीभाव समास होते हैं।

14. नञ् (निषेध)

‘नञ्’ का अर्थ है ‘नहीं’ वाला भाव (निषेध)। जब शब्द से पहले अ, अन्, ना लगकर ‘नहीं’ का अर्थ दें — असभ्य (न सभ्य), अनपढ़ (न पढ़ा), नापसंद (न पसंद) — तो वह नञ् तत्पुरुष होता है।

15. अन्य पद (तीसरा अर्थ)

जब दोनों शब्द मिलकर न पहले शब्द की बात करें, न दूसरे की, बल्कि किसी तीसरे व्यक्ति/वस्तु का नाम बताएँ, तो उस तीसरे को अन्य पद कहते हैं। जैसे — दशानन (दस + आनन) न ‘दस’ है, न ‘मुँह’; इसका अर्थ है रावण। यही बहुव्रीहि समास है।

16. समासों के नाम का अर्थ

मज़ेदार बात यह है कि ज़्यादातर समासों के नाम खुद अपने ही समास के उदाहरण हैं:

समास का नामशब्दों का अर्थकैसे याद रखें
अव्ययीभावअव्यय + भाव = अव्यय हो जानापूरा शब्द अव्यय बन जाता है
तत्पुरुषतत् (उसका) + पुरुष = उसका पुरुष‘का’ छिपा है — खुद तत्पुरुष
द्विगुद्वि (दो) + गु (गाय) = दो गायेंपहला पद संख्या — खुद द्विगु
द्वंद्वद्वंद्व = जोड़ादो बराबर शब्दों का जोड़ा
बहुव्रीहिबहु (बहुत) + व्रीहि (धान) = बहुत धान है जिसके पास (धनी व्यक्ति)तीसरे अर्थ (धनी) की ओर — खुद बहुव्रीहि
कर्मधारयविशेषता (गुण) धारण करने वालाविशेषण-विशेष्य का मेल

याद रखें: संधि में वर्णों का मेल होता है और विच्छेद में ‘+’ लगता है (विद्या + आलय)। समास में शब्दों का मेल होता है और विग्रह में बीच के शब्द वापस आ जाते हैं (विद्या के लिए आलय)। एक ही शब्द में दोनों हो सकते हैं।

समास के भेद

समास के छह भेद हैं। कौन-सा भेद है, यह इस बात से तय होता है कि समस्त पद में कौन-सा पद प्रधान (मुख्य) है:

भेदप्रधान पदपहचानउदाहरण
1. अव्ययीभावपहला (पूर्व) पदपहला पद अव्यय (यथा, प्रति, आ, भर, बे, नि आदि)यथाशक्ति, प्रतिदिन
2. तत्पुरुषदूसरा (उत्तर) पदविग्रह में कारक-चिह्न (को, से, के लिए, का, में) आता हैराजपुत्र, रसोईघर
3. कर्मधारयदूसरा (उत्तर) पदविशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय (‘है जो’, ‘के समान’, ‘रूपी’)नीलकमल, चंद्रमुख
4. द्विगुदूसरा (उत्तर) पदपहला पद संख्या, अर्थ ‘समूह’त्रिलोक, सप्ताह
5. द्वंद्वदोनों पदबीच में ‘और / या’ छिपा, प्रायः योजक चिह्न (-)माता-पिता, सुख-दुख
6. बहुव्रीहिकोई नहीं, तीसरा (अन्य) अर्थपूरा पद किसी और व्यक्ति/वस्तु का नाम बताता हैलंबोदर (गणेश), दशानन (रावण)

याद रखने का आसान तरीका: पहला पद प्रधान → अव्ययीभाव; दूसरा पद प्रधान → तत्पुरुष (और उसी परिवार के कर्मधारय, द्विगु); दोनों प्रधान → द्वंद्व; कोई नहीं, तीसरा अर्थ → बहुव्रीहि।

1. अव्ययीभाव समास

जिस समास में पहला पद अव्यय हो और प्रधान हो, तथा पूरा समस्त पद वाक्य में अव्यय (क्रियाविशेषण) की तरह काम करे, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं।

पहचान: शब्द की शुरुआत यथा, प्रति, आ, भर, बे, नि, अनु, उप जैसे शब्दों से होती है, या एक ही शब्द दोहराया जाता है (घर-घर, रातोंरात)। वाक्य में यह ‘कैसे, कब, कहाँ’ का उत्तर देता है — “वह प्रतिदिन पढ़ता है।”

समस्त पदसमास-विग्रह
यथाशक्तिशक्ति के अनुसार
यथासंभवजैसा संभव हो
यथाक्रमक्रम के अनुसार
यथाविधिविधि के अनुसार
यथासमयसमय के अनुसार
यथाशीघ्रजितना शीघ्र हो
यथेष्टइष्ट के अनुसार
प्रतिदिनप्रत्येक दिन
प्रतिवर्षप्रत्येक वर्ष
प्रतिक्षणप्रत्येक क्षण
प्रतिमासप्रत्येक मास
प्रत्येकएक-एक
आजीवनजीवन भर
आजन्मजन्म से लेकर
आमरणमरण तक
आसमुद्रसमुद्र तक
भरपेटपेट भरकर
भरसकशक्ति भर
बेखटकेबिना खटके के
बेशकबिना शक के
बेकामबिना काम के
निडरबिना डर के
निस्संदेहबिना संदेह के
अनजानेबिना जाने
बखूबीखूबी के साथ
अनुरूपरूप के योग्य
उपकूलकूल (किनारे) के समीप
हाथोंहाथहाथ ही हाथ में
दिनोंदिनदिन ही दिन में
रातोंरातरात ही रात में
बीचोंबीचठीक बीच में
घर-घरप्रत्येक घर
गाँव-गाँवप्रत्येक गाँव
एकाएकअचानक

2. तत्पुरुष समास

जिस समास में दूसरा (उत्तर) पद प्रधान हो और दोनों पदों के बीच का कारक-चिह्न (को, से, के लिए, से अलग, का/की/के, में/पर) लुप्त हो, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।

पहचान: विग्रह करने पर बीच में कोई कारक-चिह्न आता है। जो कारक-चिह्न आए, उसी के नाम से तत्पुरुष का उपभेद होता है। (कर्ता और संबोधन कारक से तत्पुरुष नहीं बनता।)

उपभेदलुप्त चिह्नउदाहरण
कर्म तत्पुरुषकोशरणागत — शरण को आया हुआ
करण तत्पुरुषसे, के द्वारारेखांकित — रेखा से अंकित
संप्रदान तत्पुरुषके लिएरसोईघर — रसोई के लिए घर
अपादान तत्पुरुषसे (अलग होने का भाव)पथभ्रष्ट — पथ से भ्रष्ट
संबंध तत्पुरुषका, की, केराजपुत्र — राजा का पुत्र
अधिकरण तत्पुरुषमें, परवनवास — वन में वास

(क) कर्म तत्पुरुष (‘को’ का लोप)

समस्त पदसमास-विग्रह
शरणागतशरण को आया हुआ
स्वर्गप्राप्तस्वर्ग को प्राप्त
यशप्राप्तयश को प्राप्त
ग्रामगतग्राम को गया हुआ
गगनचुंबीगगन को चूमने वाला
चिड़ीमारचिड़ियों को मारने वाला
जेबकतराजेब को कतरने वाला
गिरहकटगिरह को काटने वाला
मुँहतोड़मुँह को तोड़ने वाला
कठफोड़वाकाठ को फोड़ने वाला
माखनचोरमाखन को चुराने वाला
ग्रंथकारग्रंथ को करने (रचने) वाला
रथचालकरथ को चलाने वाला
परलोकगमनपरलोक को गमन

(ख) करण तत्पुरुष (‘से / के द्वारा’ का लोप)

समस्त पदसमास-विग्रह
रेखांकितरेखा से अंकित
तुलसीकृततुलसी द्वारा कृत
अकालपीड़ितअकाल से पीड़ित
हस्तलिखितहस्त (हाथ) से लिखित
मनमानामन से माना
रोगग्रस्तरोग से ग्रस्त
भुखमराभूख से मरा
शोकाकुलशोक से आकुल
प्रेमातुरप्रेम से आतुर
करुणापूर्णकरुणा से पूर्ण
मदांधमद से अंधा
बाणाहतबाण से आहत
ईश्वरप्रदत्तईश्वर द्वारा प्रदत्त
मुँहमाँगामुँह से माँगा

(ग) संप्रदान तत्पुरुष (‘के लिए’ का लोप)

समस्त पदसमास-विग्रह
रसोईघररसोई के लिए घर
देशभक्तिदेश के लिए भक्ति
विद्यालयविद्या के लिए आलय
देवालयदेव के लिए आलय
गुरुदक्षिणागुरु के लिए दक्षिणा
हथकड़ीहाथ के लिए कड़ी
सभाभवनसभा के लिए भवन
यज्ञशालायज्ञ के लिए शाला
पाठशालापाठ के लिए शाला
प्रयोगशालाप्रयोग के लिए शाला
डाकगाड़ीडाक के लिए गाड़ी
मालगोदाममाल के लिए गोदाम
युद्धभूमियुद्ध के लिए भूमि
स्नानघरस्नान के लिए घर
आरामकुर्सीआराम के लिए कुर्सी
राहखर्चराह के लिए खर्च

(घ) अपादान तत्पुरुष (‘से’ — अलग होने के अर्थ में — का लोप)

समस्त पदसमास-विग्रह
पथभ्रष्टपथ से भ्रष्ट
देशनिकालादेश से निकाला
धनहीनधन से हीन
गुणहीनगुण से हीन
जलहीनजल से हीन
जन्मांधजन्म से अंधा
ऋणमुक्तऋण से मुक्त
पापमुक्तपाप से मुक्त
रोगमुक्तरोग से मुक्त
पदच्युतपद से च्युत
धर्मविमुखधर्म से विमुख
कर्तव्यविमुखकर्तव्य से विमुख
जातिबहिष्कृतजाति से बहिष्कृत

करण और अपादान में अंतर: दोनों में ‘से’ आता है। ‘से’ साधन (जिसके द्वारा काम हुआ) बताए तो करण (हस्तलिखित — हाथ से लिखा); ‘से’ अलग होना बताए तो अपादान (पथभ्रष्ट — पथ से अलग हुआ)।

(ङ) संबंध तत्पुरुष (‘का, की, के’ का लोप)

समस्त पदसमास-विग्रह
राजपुत्रराजा का पुत्र
राजकुमारराजा का कुमार
राजमहलराजा का महल
राष्ट्रपतिराष्ट्र का पति
सेनापतिसेना का पति
लखपतिलाखों का पति
करोड़पतिकरोड़ों का पति
गंगाजलगंगा का जल
जलधाराजल की धारा
पवनपुत्रपवन का पुत्र
घुड़दौड़घोड़ों की दौड़
पनचक्कीपानी की चक्की
अमचूरआम का चूर्ण
मृगछौनामृग का छौना
देवमूर्तिदेव की मूर्ति
सूर्योदयसूर्य का उदय
चरित्रचित्रणचरित्र का चित्रण
ग्रामोद्धारग्राम का उद्धार
देशवासीदेश का वासी
वीरकन्यावीर की कन्या

(च) अधिकरण तत्पुरुष (‘में, पर’ का लोप)

समस्त पदसमास-विग्रह
वनवासवन में वास
आपबीतीआप पर बीती
ध्यानमग्नध्यान में मग्न
जलमग्नजल में मग्न
शोकमग्नशोक में मग्न
कार्यकुशलकार्य में कुशल
कलाप्रवीणकला में प्रवीण
घुड़सवारघोड़े पर सवार
आत्मविश्वासआत्मा पर विश्वास
गृहप्रवेशगृह में प्रवेश
दानवीरदान में वीर
सिरदर्दसिर में दर्द
नराधमनरों में अधम
पुरुषोत्तमपुरुषों में उत्तम
कविश्रेष्ठकवियों में श्रेष्ठ

(छ) नञ् तत्पुरुष (निषेध का भाव)

जब पहला पद ‘अ’, ‘अन्’, ‘ना’ आदि निषेध (नहीं) का अर्थ दे, तो उसे नञ् तत्पुरुष कहते हैं।

समस्त पदसमास-विग्रह
असभ्यन सभ्य
असंभवन संभव
अधर्मन धर्म
अज्ञानन ज्ञान
अन्यायन न्याय
अनुचितन उचित
अकर्मन कर्म
अनाचारन आचार
अनिच्छान इच्छा
अनभिज्ञन अभिज्ञ
अनपढ़न पढ़ा
नापसंदन पसंद
नालायकन लायक

3. कर्मधारय समास

जिस समास में उत्तर पद प्रधान हो और दोनों पदों में विशेषण-विशेष्य (नीला-कमल) या उपमान-उपमेय (चंद्र जैसा मुख) का संबंध हो, उसे कर्मधारय समास कहते हैं।

पहचान: विग्रह में ‘है जो’, ‘के समान’ या ‘रूपी’ आता है।

(क) विशेषण-विशेष्य वाले

समस्त पदसमास-विग्रह
नीलकमलनीला है जो कमल
नीलगगननीला है जो गगन
पीतांबरपीला है जो अंबर
श्वेतांबरश्वेत है जो अंबर
महात्मामहान है जो आत्मा
महापुरुषमहान है जो पुरुष
महाराजमहान है जो राजा
परमानंदपरम है जो आनंद
सज्जनसत् (अच्छा) है जो जन
दुर्जनदुष्ट है जो जन
सद्गुणसत् है जो गुण
नवयुवकनव है जो युवक
कालीमिर्चकाली है जो मिर्च
अधमराआधा है जो मरा
लालटोपीलाल है जो टोपी

(ख) उपमान-उपमेय वाले (‘के समान’ / ‘रूपी’)

समस्त पदसमास-विग्रह
चंद्रमुखचंद्र के समान मुख
मुखचंद्रमुख रूपी चंद्र
कमलनयनकमल के समान नयन
घनश्यामघन के समान श्याम
प्राणप्रियप्राणों के समान प्रिय
चरणकमलकमल के समान चरण
करकमलकमल के समान कर
देहलतादेह रूपी लता
विद्याधनविद्या रूपी धन
भवसागरभव (संसार) रूपी सागर
क्रोधाग्निक्रोध रूपी अग्नि
ज्ञानदीपज्ञान रूपी दीप
वचनामृतवचन रूपी अमृत

4. द्विगु समास

जिस समास का पहला पद संख्यावाचक हो और पूरा पद किसी समूह का बोध कराए, उसे द्विगु समास कहते हैं।

पहचान: शुरुआत में संख्या (एक, दो, त्रि, चौ, पंच, सप्त, नव, शत आदि) और विग्रह में ‘का समूह’।

समस्त पदसमास-विग्रह
त्रिलोकतीन लोकों का समूह
त्रिभुवनतीन भुवनों का समूह
त्रिफलातीन फलों का समूह
त्रिवेणीतीन वेणियों (नदियों) का समूह
त्रिकोणतीन कोणों का समूह
चौराहाचार राहों का समूह
चौमासाचार मासों का समूह
चौपाईचार पदों का समूह
चवन्नीचार आनों का समूह
पंचवटीपाँच वटों का समूह
पंचतत्वपाँच तत्वों का समूह
पंचामृतपाँच अमृतों का समूह
पंसेरीपाँच सेरों का समूह
षट्कोणछह कोणों का समूह
सप्ताहसात दिनों का समूह
सप्तर्षिसात ऋषियों का समूह
सतसईसात सौ (दोहों) का समूह
अठन्नीआठ आनों का समूह
अष्टाध्यायीआठ अध्यायों का समूह
नवग्रहनौ ग्रहों का समूह
नवरात्रनौ रात्रियों का समूह
दोपहरदो पहरों का समूह
शताब्दीसौ अब्दों (वर्षों) का समूह
दशाननदस आननों का समूह

5. द्वंद्व समास

जिस समास में दोनों पद प्रधान हों और विग्रह करने पर बीच में ‘और’, ‘या’, ‘अथवा’ आए, उसे द्वंद्व समास कहते हैं।

पहचान: दोनों शब्दों के बीच प्रायः योजक चिह्न (-) होता है और दोनों शब्द बराबर महत्व के होते हैं — अक्सर जोड़े या विलोम।

समस्त पदसमास-विग्रह
माता-पितामाता और पिता
भाई-बहनभाई और बहन
राधा-कृष्णराधा और कृष्ण
सीता-रामसीता और राम
नर-नारीनर और नारी
गंगा-यमुनागंगा और यमुना
हरिहरहरि और हर
दाल-रोटीदाल और रोटी
अन्न-जलअन्न और जल
घी-शक्करघी और शक्कर
हाथ-पैरहाथ और पैर
रात-दिनरात और दिन
सुख-दुखसुख और दुख
पाप-पुण्यपाप और पुण्य
ऊँच-नीचऊँच और नीच
जीवन-मरणजीवन और मरण
राजा-रंकराजा और रंक
भूख-प्यासभूख और प्यास
लेन-देनलेन और देन
आना-जानाआना और जाना
देश-विदेशदेश और विदेश
अपना-परायाअपना और पराया
यश-अपयशयश और अपयश
छोटा-बड़ाछोटा और बड़ा
भला-बुराभला या बुरा
धर्माधर्मधर्म या अधर्म
थोड़ा-बहुतथोड़ा या बहुत
लाभ-हानिलाभ या हानि
खरा-खोटाखरा या खोटा

द्वंद्व के तीन रूप: (1) इतरेतर द्वंद्व — ‘और’ से जुड़े (माता-पिता); (2) वैकल्पिक द्वंद्व — ‘या’ से जुड़े (भला-बुरा, थोड़ा-बहुत); (3) समाहार द्वंद्व — दोनों मिलकर पूरे समूह का अर्थ दें (दाल-रोटी = भोजन, हाथ-पैर = शरीर के अंग)।

6. बहुव्रीहि समास

जिस समास में कोई भी पद प्रधान न हो, बल्कि दोनों पद मिलकर किसी तीसरे (अन्य) व्यक्ति या वस्तु की ओर संकेत करें, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।

पहचान: विग्रह में ‘जिसका, जिसके, जिसकी, जो’ आता है और अंत में उस व्यक्ति का नाम लिखा जाता है — लंबोदर = लंबा है उदर जिसका, अर्थात् गणेश।

समस्त पदसमास-विग्रहअर्थ (कौन)
लंबोदरलंबा है उदर जिसकागणेश
गजाननगज के समान आनन है जिसकागणेश
एकदंतएक है दाँत जिसकागणेश
दशाननदस हैं आनन जिसकेरावण
नीलकंठनीला है कंठ जिसकाशिव
त्रिलोचनतीन हैं लोचन जिसकेशिव
त्रिनेत्रतीन हैं नेत्र जिसकेशिव
चंद्रशेखरचंद्र है शेखर (सिर) पर जिसकेशिव
मृत्युंजयमृत्यु को जीत लिया है जिसनेशिव
शूलपाणिशूल है पाणि में जिसकेशिव
पंचाननपाँच हैं आनन जिसकेशिव
चक्रपाणिचक्र है पाणि में जिसकेविष्णु
चतुर्भुजचार हैं भुजाएँ जिसकीविष्णु
पीतांबरपीले हैं अंबर जिसकेश्रीकृष्ण
गिरिधरगिरि को धारण करने वालाश्रीकृष्ण
मुरलीधरमुरली को धारण करने वालाश्रीकृष्ण
घनश्यामघन के समान श्याम है जोश्रीकृष्ण
चतुराननचार हैं आनन जिसकेब्रह्मा
वीणापाणिवीणा है पाणि में जिसकेसरस्वती
हंसवाहिनीहंस है वाहन जिसकासरस्वती
षडाननछह हैं आनन जिसकेकार्तिकेय
वज्रपाणिवज्र है पाणि में जिसकेइंद्र
महावीरमहान है वीर जोहनुमान
दिगंबरदिशाएँ ही हैं अंबर जिसकेशिव / जैन मुनि
महादेवदेवों में महान है जोशिव

सबसे ज़्यादा उलझाने वाले शब्द

कुछ शब्द विग्रह के अनुसार दो अलग समासों में आते हैं। परीक्षा में प्रश्न के साथ दिया अर्थ या संदर्भ देखकर ही उत्तर चुनें।

कर्मधारय या बहुव्रीहि?

शब्दकर्मधारय (सामान्य अर्थ)बहुव्रीहि (विशेष व्यक्ति)
नीलकंठनीला है जो कंठनीला है कंठ जिसका — शिव
पीतांबरपीला है जो अंबरपीले हैं अंबर जिसके — श्रीकृष्ण
घनश्यामघन के समान श्यामघन के समान श्याम है जो — श्रीकृष्ण
महादेवमहान है जो देवदेवों में महान है जो — शिव
कमलनयनकमल के समान नयनकमल के समान नयन हैं जिसके — विष्णु/राम

द्विगु या बहुव्रीहि?

शब्दद्विगु (समूह)बहुव्रीहि (विशेष व्यक्ति)
दशाननदस आननों का समूहदस हैं आनन जिसके — रावण
चतुर्भुजचार भुजाओं का समूह (आकृति)चार हैं भुजाएँ जिसकी — विष्णु
त्रिलोचनतीन लोचनों का समूहतीन हैं लोचन जिसके — शिव
पंचाननपाँच आननों का समूहपाँच हैं आनन जिसके — शिव

सीधा नियम: विग्रह में किसी व्यक्ति/देवता का नाम आए (जिसका, जिसके…) तो बहुव्रीहि; केवल ‘है जो / के समान’ हो तो कर्मधारय; केवल ‘का समूह’ हो तो द्विगु।

आम गलतियाँ

गलत समझसही बात
हर योजक चिह्न (-) वाला शब्द द्वंद्व हैनहीं — घर-घर, गाँव-गाँव (पुनरुक्त शब्द) अव्ययीभाव हैं।
जिसमें भी संख्या हो, वह द्विगु हैनहीं — दशानन (रावण), त्रिलोचन (शिव) अर्थ में बहुव्रीहि हैं।
‘से’ आए तो हमेशा करण तत्पुरुषअलग होने का भाव हो तो अपादान — पथभ्रष्ट, धनहीन।
विद्यालय में केवल संधि हैसंधि (विद्या + आलय) भी है और संप्रदान तत्पुरुष समास (विद्या के लिए आलय) भी।

बहुविकल्पीय प्रश्न — स्तर 1: आसान (कक्षा 6–8)

समास का भेद पहचानने और सीधा विग्रह चुनने वाले प्रश्न।

1. ‘समास’ शब्द का अर्थ है—
(क) अलगाव
(ख) विस्तार
(ग) संक्षेप
(घ) मेल

2. समास के कितने मुख्य भेद हैं?
(क) चार
(ख) पाँच
(ग) तीन
(घ) छह

3. ‘माता-पिता’ में कौन-सा समास है?
(क) अव्ययीभाव
(ख) द्वंद्व
(ग) कर्मधारय
(घ) तत्पुरुष

4. ‘राजपुत्र’ का सही समास-विग्रह है—
(क) राजा है जो पुत्र
(ख) राजा और पुत्र
(ग) राजा का पुत्र
(घ) राजा के लिए पुत्र

5. ‘त्रिलोक’ में कौन-सा समास है?
(क) बहुव्रीहि
(ख) द्विगु
(ग) द्वंद्व
(घ) कर्मधारय

6. ‘नीलकमल’ में कौन-सा समास है?
(क) द्वंद्व
(ख) अव्ययीभाव
(ग) कर्मधारय
(घ) बहुव्रीहि

7. ‘यथाशक्ति’ में कौन-सा समास है?
(क) तत्पुरुष
(ख) द्विगु
(ग) कर्मधारय
(घ) अव्ययीभाव

8. ‘दशानन’ (रावण के अर्थ में) में कौन-सा समास है?
(क) अव्ययीभाव
(ख) बहुव्रीहि
(ग) द्वंद्व
(घ) तत्पुरुष

9. ‘रसोईघर’ का सही समास-विग्रह है—
(क) रसोई का घर
(ख) रसोई और घर
(ग) रसोई के लिए घर
(घ) रसोई में घर

10. समास से बने नए शब्द को क्या कहते हैं?
(क) संधि पद
(ख) विग्रह
(ग) उपसर्ग
(घ) समस्त पद

11. समस्त पद को तोड़कर पूरा अर्थ लिखना कहलाता है—
(क) पद-परिचय
(ख) समास-विग्रह
(ग) संधि-विच्छेद
(घ) वर्ण-विच्छेद

12. ‘सुख-दुख’ में कौन-सा समास है?
(क) अव्ययीभाव
(ख) द्विगु
(ग) कर्मधारय
(घ) द्वंद्व

13. ‘प्रतिदिन’ में कौन-सा समास है?
(क) द्विगु
(ख) कर्मधारय
(ग) अव्ययीभाव
(घ) तत्पुरुष

14. ‘चौराहा’ में कौन-सा समास है?
(क) द्वंद्व
(ख) अव्ययीभाव
(ग) द्विगु
(घ) तत्पुरुष

15. ‘देशभक्ति’ का सही समास-विग्रह है—
(क) देश की भक्ति करने वाला
(ख) देश में भक्ति
(ग) देश और भक्ति
(घ) देश के लिए भक्ति

16. ‘महात्मा’ में कौन-सा समास है?
(क) कर्मधारय
(ख) द्विगु
(ग) द्वंद्व
(घ) अव्ययीभाव

17. ‘लंबोदर’ में कौन-सा समास है?
(क) बहुव्रीहि
(ख) अव्ययीभाव
(ग) द्वंद्व
(घ) द्विगु

18. ‘पाठशाला’ में कौन-सा समास है?
(क) अव्ययीभाव
(ख) तत्पुरुष
(ग) द्वंद्व
(घ) द्विगु

19. ‘रात-दिन’ में कौन-सा समास है?
(क) बहुव्रीहि
(ख) द्वंद्व
(ग) तत्पुरुष
(घ) द्विगु

20. ‘सप्ताह’ में कौन-सा समास है?
(क) अव्ययीभाव
(ख) कर्मधारय
(ग) द्वंद्व
(घ) द्विगु

21. ‘आजीवन’ में कौन-सा समास है?
(क) अव्ययीभाव
(ख) कर्मधारय
(ग) तत्पुरुष
(घ) द्विगु

22. ‘गंगाजल’ का सही समास-विग्रह है—
(क) गंगा के लिए जल
(ख) गंगा का जल
(ग) गंगा से जल
(घ) गंगा और जल

23. ‘नीलकंठ’ (शिव के अर्थ में) में कौन-सा समास है?
(क) अव्ययीभाव
(ख) द्विगु
(ग) द्वंद्व
(घ) बहुव्रीहि

24. ‘असभ्य’ में कौन-सा समास है?
(क) द्विगु
(ख) नञ् तत्पुरुष
(ग) बहुव्रीहि
(घ) द्वंद्व

25. ‘भाई-बहन’ में कौन-सा समास है?
(क) कर्मधारय
(ख) द्वंद्व
(ग) तत्पुरुष
(घ) द्विगु

26. ‘पंचवटी’ में कौन-सा समास है?
(क) कर्मधारय
(ख) द्वंद्व
(ग) तत्पुरुष
(घ) द्विगु

27. ‘सेनापति’ का सही समास-विग्रह है—
(क) सेना का पति
(ख) सेना के लिए पति
(ग) सेना है जो पति
(घ) सेना और पति

28. ‘चंद्रमुख’ का सही समास-विग्रह है—
(क) चंद्र के समान मुख
(ख) चंद्र और मुख
(ग) चंद्र का मुख
(घ) चंद्र में मुख

29. ‘यथासमय’ में कौन-सा समास है?
(क) कर्मधारय
(ख) तत्पुरुष
(ग) द्विगु
(घ) अव्ययीभाव

30. ‘हस्तलिखित’ का सही समास-विग्रह है—
(क) हस्त के लिए लिखित
(ख) हस्त से लिखित
(ग) हस्त और लिखित
(घ) हस्त में लिखित

31. ‘गजानन’ में कौन-सा समास है?
(क) अव्ययीभाव
(ख) द्वंद्व
(ग) द्विगु
(घ) बहुव्रीहि

32. द्वंद्व समास में विग्रह करने पर प्रायः कौन-सा शब्द आता है?
(क) और
(ख) के लिए
(ग) का
(घ) जिसका

33. ‘नवग्रह’ में कौन-सा समास है?
(क) कर्मधारय
(ख) द्वंद्व
(ग) द्विगु
(घ) अव्ययीभाव

34. ‘वनवास’ का सही समास-विग्रह है—
(क) वन का वास
(ख) वन और वास
(ग) वन में वास
(घ) वन के लिए वास

35. ‘अनपढ़’ में कौन-सा समास है?
(क) अव्ययीभाव
(ख) द्विगु
(ग) नञ् तत्पुरुष
(घ) द्वंद्व

36. ‘सज्जन’ में कौन-सा समास है?
(क) द्वंद्व
(ख) अव्ययीभाव
(ग) कर्मधारय
(घ) द्विगु

37. ‘पथभ्रष्ट’ का सही समास-विग्रह है—
(क) पथ से भ्रष्ट
(ख) पथ के लिए भ्रष्ट
(ग) पथ का भ्रष्ट
(घ) पथ और भ्रष्ट

38. ‘दाल-रोटी’ में कौन-सा समास है?
(क) बहुव्रीहि
(ख) द्विगु
(ग) अव्ययीभाव
(घ) द्वंद्व

39. ‘चक्रपाणि’ में कौन-सा समास है?
(क) बहुव्रीहि
(ख) द्वंद्व
(ग) द्विगु
(घ) अव्ययीभाव

40. ‘भरपेट’ में कौन-सा समास है?
(क) अव्ययीभाव
(ख) कर्मधारय
(ग) द्विगु
(घ) तत्पुरुष

इस स्तर के उत्तर और कारण लेख के अंत में ‘उत्तर कुंजी’ में दिए गए हैं — पहले ख़ुद हल करें, फिर मिलाएँ।

बहुविकल्पीय प्रश्न — स्तर 2: मध्यम (कक्षा 9–10, बोर्ड परीक्षा)

बोर्ड परीक्षा जैसे प्रश्न — तत्पुरुष के उपभेद, सही विग्रह और प्रधान पद की पहचान।

1. ‘शरणागत’ में तत्पुरुष का कौन-सा भेद है?
(क) कर्म तत्पुरुष
(ख) संप्रदान तत्पुरुष
(ग) करण तत्पुरुष
(घ) अपादान तत्पुरुष

2. ‘रेखांकित’ में तत्पुरुष का कौन-सा भेद है?
(क) कर्म तत्पुरुष
(ख) संबंध तत्पुरुष
(ग) करण तत्पुरुष
(घ) अपादान तत्पुरुष

3. ‘विद्यालय’ में तत्पुरुष का कौन-सा भेद है?
(क) अपादान तत्पुरुष
(ख) करण तत्पुरुष
(ग) संप्रदान तत्पुरुष
(घ) कर्म तत्पुरुष

4. ‘धनहीन’ में तत्पुरुष का कौन-सा भेद है?
(क) संबंध तत्पुरुष
(ख) अधिकरण तत्पुरुष
(ग) अपादान तत्पुरुष
(घ) करण तत्पुरुष

5. ‘राष्ट्रपति’ में तत्पुरुष का कौन-सा भेद है?
(क) संबंध तत्पुरुष
(ख) करण तत्पुरुष
(ग) संप्रदान तत्पुरुष
(घ) कर्म तत्पुरुष

6. ‘ध्यानमग्न’ में तत्पुरुष का कौन-सा भेद है?
(क) कर्म तत्पुरुष
(ख) करण तत्पुरुष
(ग) संप्रदान तत्पुरुष
(घ) अधिकरण तत्पुरुष

7. ‘गगनचुंबी’ का सही समास-विग्रह है—
(क) गगन को चूमने वाला
(ख) गगन से चूमने वाला
(ग) गगन में चुंबी
(घ) गगन और चुंबी

8. ‘जन्मांध’ का सही समास-विग्रह है—
(क) जन्म और अंधा
(ख) जन्म से अंधा
(ग) जन्म के लिए अंधा
(घ) जन्म का अंधा

9. ‘पीतांबर’ का सही समास-विग्रह है—
(क) पीला है जो अंबर
(ख) पीला और अंबर
(ग) पीले के लिए अंबर
(घ) पीले का अंबर

10. ‘घनश्याम’ का सही समास-विग्रह है—
(क) घन के समान श्याम
(ख) घन का श्याम
(ग) घन और श्याम
(घ) घन से श्याम

11. ‘त्रिभुवन’ का सही समास-विग्रह है—
(क) तीन भुवनों वाला
(ख) तीन है जो भुवन
(ग) तीन और भुवन
(घ) तीन भुवनों का समूह

12. ‘नर-नारी’ का सही समास-विग्रह है—
(क) नर की नारी
(ख) नर के लिए नारी
(ग) नर है जो नारी
(घ) नर और नारी

13. ‘यथाविधि’ का सही समास-विग्रह है—
(क) जैसी विधि वाला
(ख) विधि के अनुसार
(ग) विधि और यथा
(घ) विधि का पालन

14. ‘चतुर्भुज’ (विष्णु के अर्थ में) में कौन-सा समास है?
(क) द्वंद्व
(ख) तत्पुरुष
(ग) द्विगु
(घ) बहुव्रीहि

15. जिस समास में पहला पद प्रधान होता है, वह है—
(क) तत्पुरुष
(ख) द्वंद्व
(ग) बहुव्रीहि
(घ) अव्ययीभाव

16. जिस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं, वह है—
(क) कर्मधारय
(ख) अव्ययीभाव
(ग) द्विगु
(घ) द्वंद्व

17. जिस समास में कोई भी पद प्रधान नहीं होता, वह है—
(क) द्विगु
(ख) तत्पुरुष
(ग) द्वंद्व
(घ) बहुव्रीहि

18. ‘क्रोधाग्नि’ का सही समास-विग्रह है—
(क) क्रोध रूपी अग्नि
(ख) क्रोध की अग्नि वाला
(ग) क्रोध से अग्नि
(घ) क्रोध और अग्नि

19. ‘नराधम’ का सही समास-विग्रह है—
(क) नरों में अधम
(ख) नर और अधम
(ग) नर के लिए अधम
(घ) नर का अधम

20. ‘अकालपीड़ित’ में तत्पुरुष का कौन-सा भेद है?
(क) अपादान तत्पुरुष
(ख) अधिकरण तत्पुरुष
(ग) करण तत्पुरुष
(घ) कर्म तत्पुरुष

21. ‘देशनिकाला’ में तत्पुरुष का कौन-सा भेद है?
(क) अपादान तत्पुरुष
(ख) संप्रदान तत्पुरुष
(ग) करण तत्पुरुष
(घ) संबंध तत्पुरुष

22. ‘घुड़सवार’ का सही समास-विग्रह है—
(क) घोड़े के लिए सवार
(ख) घोड़े पर सवार
(ग) घोड़े का सवार
(घ) घोड़ा और सवार

23. ‘शताब्दी’ में कौन-सा समास है?
(क) द्वंद्व
(ख) बहुव्रीहि
(ग) द्विगु
(घ) तत्पुरुष

24. ‘हरिहर’ का सही समास-विग्रह है—
(क) हर के लिए हरि
(ख) हरि और हर
(ग) हरि का हर
(घ) हरि है जो हर

25. ‘निडर’ में कौन-सा समास है?
(क) द्विगु
(ख) द्वंद्व
(ग) कर्मधारय
(घ) अव्ययीभाव

26. ‘भवसागर’ में कौन-सा समास है?
(क) अव्ययीभाव
(ख) कर्मधारय
(ग) द्विगु
(घ) द्वंद्व

27. ‘मृत्युंजय’ में कौन-सा समास है?
(क) द्विगु
(ख) बहुव्रीहि
(ग) अव्ययीभाव
(घ) द्वंद्व

28. ‘हथकड़ी’ का सही समास-विग्रह है—
(क) हाथ के लिए कड़ी
(ख) हाथ की कड़ी
(ग) हाथ और कड़ी
(घ) हाथ से कड़ी

29. ‘तुलसीकृत’ का सही समास-विग्रह है—
(क) तुलसी में कृत
(ख) तुलसी द्वारा कृत
(ग) तुलसी और कृत
(घ) तुलसी के लिए कृत

30. ‘माखनचोर’ में तत्पुरुष का कौन-सा भेद है?
(क) संबंध तत्पुरुष
(ख) कर्म तत्पुरुष
(ग) अपादान तत्पुरुष
(घ) करण तत्पुरुष

31. ‘ऋणमुक्त’ में तत्पुरुष का कौन-सा भेद है?
(क) अधिकरण तत्पुरुष
(ख) संप्रदान तत्पुरुष
(ग) अपादान तत्पुरुष
(घ) करण तत्पुरुष

32. ‘आपबीती’ का सही समास-विग्रह है—
(क) आप से बीती
(ख) आप और बीती
(ग) आप पर बीती
(घ) आप की बीती

33. ‘नवयुवक’ में कौन-सा समास है?
(क) द्विगु
(ख) कर्मधारय
(ग) अव्ययीभाव
(घ) द्वंद्व

34. ‘चौमासा’ में कौन-सा समास है?
(क) अव्ययीभाव
(ख) कर्मधारय
(ग) द्वंद्व
(घ) द्विगु

35. ‘अन्न-जल’ में कौन-सा समास है?
(क) अव्ययीभाव
(ख) द्विगु
(ग) द्वंद्व
(घ) तत्पुरुष

36. ‘वीणापाणि’ में बहुव्रीहि समास है। यह किसके लिए आता है?
(क) सरस्वती
(ख) लक्ष्मी
(ग) पार्वती
(घ) दुर्गा

37. ‘रातोंरात’ में कौन-सा समास है?
(क) द्वंद्व
(ख) तत्पुरुष
(ग) अव्ययीभाव
(घ) द्विगु

38. ‘अनुचित’ में कौन-सा समास है?
(क) कर्मधारय
(ख) अव्ययीभाव
(ग) द्वंद्व
(घ) नञ् तत्पुरुष

39. ‘पुरुषोत्तम’ में तत्पुरुष का कौन-सा भेद है?
(क) करण तत्पुरुष
(ख) अधिकरण तत्पुरुष
(ग) कर्म तत्पुरुष
(घ) संबंध तत्पुरुष

40. ‘कमलनयन’ का सही समास-विग्रह है—
(क) कमल और नयन
(ख) कमल के समान नयन
(ग) कमल का नयन
(घ) कमल में नयन

इस स्तर के उत्तर और कारण लेख के अंत में ‘उत्तर कुंजी’ में दिए गए हैं — पहले ख़ुद हल करें, फिर मिलाएँ।

बहुविकल्पीय प्रश्न — स्तर 3: कठिन (कक्षा 11–12, CTET/TET और प्रतियोगी परीक्षाएँ)

प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे प्रश्न — कर्मधारय-बहुव्रीहि का भेद, ‘कौन-सा नहीं है’, सुमेलन और कथन-कारण।

1. ‘नीलकंठ’ में कर्मधारय समास कब माना जाएगा?
(क) जब अर्थ ‘नीला है जो कंठ’ हो
(ख) जब अर्थ ‘शिव’ हो
(ग) जब अर्थ ‘मोर’ हो
(घ) हर स्थिति में

2. ‘पीतांबर’ का बहुव्रीहि वाला विग्रह है—
(क) पीला है जो अंबर
(ख) पीले का अंबर
(ग) पीला और अंबर
(घ) पीले हैं अंबर जिसके (श्रीकृष्ण)

3. निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द द्विगु नहीं है (दिए गए अर्थ में)?
(क) त्रिलोक
(ख) त्रिलोचन (शिव)
(ग) सप्ताह
(घ) नवरात्र

4. ‘दशानन’ का द्विगु वाला विग्रह है—
(क) दस और आनन
(ख) दस हैं आनन जिसके
(ग) दस आननों का समूह
(घ) दस है जो आनन

5. कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
(क) देशभक्ति — संप्रदान तत्पुरुष
(ख) यथाशक्ति — अव्ययीभाव
(ग) पथभ्रष्ट — करण तत्पुरुष
(घ) चक्रपाणि — बहुव्रीहि

6. ‘मनमाना’ में तत्पुरुष का कौन-सा भेद है?
(क) संबंध तत्पुरुष
(ख) करण तत्पुरुष
(ग) अपादान तत्पुरुष
(घ) अधिकरण तत्पुरुष

7. ‘घुड़दौड़’ में तत्पुरुष का कौन-सा भेद है?
(क) संप्रदान तत्पुरुष
(ख) कर्म तत्पुरुष
(ग) संबंध तत्पुरुष
(घ) अधिकरण तत्पुरुष

8. ‘कठफोड़वा’ का सही समास-विग्रह है—
(क) काठ का फोड़ा
(ख) काठ से फोड़ने वाला
(ग) काठ और फोड़वा
(घ) काठ को फोड़ने वाला

9. कर्मधारय और बहुव्रीहि में मुख्य अंतर क्या है?
(क) बहुव्रीहि में कोई अन्य (तीसरा) पद प्रधान होता है
(ख) दोनों में कोई अंतर नहीं
(ग) बहुव्रीहि में पहला पद संख्या होता है
(घ) कर्मधारय में दोनों पद प्रधान होते हैं

10. ‘प्राणप्रिय’ का सही समास-विग्रह है—
(क) प्राण और प्रिय
(ख) प्राण के लिए प्रिय
(ग) प्राणों के समान प्रिय
(घ) प्राण से प्रिय

11. ‘त्रिफला’ में कौन-सा समास है?
(क) बहुव्रीहि
(ख) द्वंद्व
(ग) कर्मधारय
(घ) द्विगु

12. ‘अधमरा’ में कौन-सा समास है?
(क) तत्पुरुष
(ख) कर्मधारय
(ग) अव्ययीभाव
(घ) द्विगु

13. निम्नलिखित में से किस शब्द में अव्ययीभाव समास है?
(क) हथकड़ी
(ख) हाथ-पैर
(ग) हाथोंहाथ
(घ) हस्तलिखित

14. निम्नलिखित में से किस शब्द में द्वंद्व समास है?
(क) धर्मशाला
(ख) धर्माधर्म
(ग) धर्मात्मा
(घ) धर्मविमुख

15. ‘धर्मविमुख’ में तत्पुरुष का कौन-सा भेद है?
(क) अपादान तत्पुरुष
(ख) संप्रदान तत्पुरुष
(ग) करण तत्पुरुष
(घ) संबंध तत्पुरुष

16. ‘गिरिधर’ में कौन-सा समास है?
(क) द्वंद्व
(ख) अव्ययीभाव
(ग) बहुव्रीहि
(घ) द्विगु

17. ‘सतसई’ का सही समास-विग्रह है—
(क) सात सौ (दोहों) का समूह
(ख) सात और सई
(ग) सात सौ है जो
(घ) सात सौ वाला कवि

18. ‘विद्याधन’ में कौन-सा समास है?
(क) अव्ययीभाव
(ख) कर्मधारय
(ग) द्विगु
(घ) द्वंद्व

19. ‘उपकूल’ में कौन-सा समास है?
(क) द्विगु
(ख) द्वंद्व
(ग) कर्मधारय
(घ) अव्ययीभाव

20. ‘कार्यकुशल’ में तत्पुरुष का कौन-सा भेद है?
(क) करण तत्पुरुष
(ख) संबंध तत्पुरुष
(ग) कर्म तत्पुरुष
(घ) अधिकरण तत्पुरुष

21. ‘देवालय’ शब्द के बारे में सही कथन है—
(क) इसमें द्वंद्व समास है
(ख) इसमें दीर्घ संधि और संप्रदान तत्पुरुष समास दोनों हैं
(ग) इसमें बहुव्रीहि समास है
(घ) इसमें केवल संधि है

22. ‘गुरुदक्षिणा’ में तत्पुरुष का कौन-सा भेद है?
(क) करण तत्पुरुष
(ख) कर्म तत्पुरुष
(ग) संबंध तत्पुरुष
(घ) संप्रदान तत्पुरुष

23. निम्नलिखित में से किस शब्द में नञ् तत्पुरुष है?
(क) अनुरूप
(ख) अनुचर
(ग) अनुकूल
(घ) अनभिज्ञ

24. ‘त्रिवेणी’ में कौन-सा समास है?
(क) द्वंद्व
(ख) अव्ययीभाव
(ग) द्विगु
(घ) बहुव्रीहि

25. ‘एकदंत’ (गणेश के अर्थ में) में कौन-सा समास है?
(क) कर्मधारय
(ख) द्विगु
(ग) द्वंद्व
(घ) बहुव्रीहि

26. ‘पंचामृत’ का सही समास-विग्रह है—
(क) पाँच है जो अमृत
(ख) पाँच और अमृत
(ग) पाँच अमृत हैं जिसके
(घ) पाँच अमृतों का समूह

27. ‘जलमग्न’ में तत्पुरुष का कौन-सा भेद है?
(क) संबंध तत्पुरुष
(ख) अधिकरण तत्पुरुष
(ग) अपादान तत्पुरुष
(घ) करण तत्पुरुष

28. ‘जेबकतरा’ में तत्पुरुष का कौन-सा भेद है?
(क) कर्म तत्पुरुष
(ख) अधिकरण तत्पुरुष
(ग) संबंध तत्पुरुष
(घ) करण तत्पुरुष

29. ‘लेन-देन’ में कौन-सा समास है?
(क) द्वंद्व
(ख) कर्मधारय
(ग) अव्ययीभाव
(घ) द्विगु

30. ‘चरणकमल’ का सही समास-विग्रह है—
(क) चरण का कमल
(ख) कमल के समान चरण
(ग) चरण में कमल
(घ) चरण और कमल

31. ‘भुखमरा’ का सही समास-विग्रह है—
(क) भूख के लिए मरा
(ख) भूख का मरा
(ग) भूख से मरा
(घ) भूख और मरा

32. ‘यथेष्ट’ में कौन-सा समास है?
(क) तत्पुरुष
(ख) अव्ययीभाव
(ग) कर्मधारय
(घ) द्वंद्व

33. ‘षडानन’ (कार्तिकेय के अर्थ में) में कौन-सा समास है?
(क) द्वंद्व
(ख) बहुव्रीहि
(ग) कर्मधारय
(घ) द्विगु

34. कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
(क) गृहप्रवेश — कर्म तत्पुरुष
(ख) महादेव (शिव) — बहुव्रीहि
(ग) पाप-पुण्य — द्वंद्व
(घ) नवरात्र — द्विगु

35. निम्नलिखित में से किस शब्द में बहुव्रीहि समास है?
(क) नीलगगन
(ख) राजहंस
(ग) गंगाजल
(घ) हंसवाहिनी

36. ‘दोपहर’ में कौन-सा समास है?
(क) अव्ययीभाव
(ख) द्विगु
(ग) बहुव्रीहि
(घ) द्वंद्व

37. कथन (A): ‘पीतांबर’ कर्मधारय भी हो सकता है और बहुव्रीहि भी।
कारण (R): बहुव्रीहि में समस्त पद किसी अन्य (तीसरे) अर्थ की ओर संकेत करता है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।
(ख) A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।

38. कथन (A): ‘चौराहा’ में बहुव्रीहि समास है।
कारण (R): द्विगु में पहला पद संख्यावाचक होता है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।
(ख) A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।

39. कथन (A): ‘माता-पिता’ में द्वंद्व समास है।
कारण (R): द्वंद्व में दोनों पद प्रधान होते हैं और विग्रह में ‘और’ आता है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।
(ख) A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।

40. कथन (A): ‘प्रतिदिन’ में अव्ययीभाव समास है।
कारण (R): अव्ययीभाव में दोनों पद प्रधान होते हैं।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।
(ख) A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।

इस स्तर के उत्तर और कारण लेख के अंत में ‘उत्तर कुंजी’ में दिए गए हैं — पहले ख़ुद हल करें, फिर मिलाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: समास किसे कहते हैं?
उत्तर: दो या अधिक शब्दों के बीच के चिह्नों का लोप करके बने नए छोटे शब्द को समास कहते हैं, जैसे — राजा का पुत्र = राजपुत्र।

प्रश्न: समास के कितने भेद हैं?
उत्तर: छह — अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व और बहुव्रीहि।

प्रश्न: समास और संधि में क्या अंतर है?
उत्तर: संधि वर्णों का मेल है (विद्या + आलय), समास शब्दों का मेल है (विद्या के लिए आलय)।

प्रश्न: कर्मधारय और बहुव्रीहि में कैसे पहचानें?
उत्तर: कर्मधारय में दूसरा पद प्रधान होता है (नीला है जो कंठ), बहुव्रीहि में पूरा पद किसी तीसरे का नाम बताता है (नीला है कंठ जिसका — शिव)।

प्रश्न: द्विगु समास की पहचान क्या है?
उत्तर: पहला पद संख्या हो और विग्रह में ‘का समूह’ आए, जैसे — सप्ताह = सात दिनों का समूह।

उत्तर कुंजी (उत्तर और कारण)

स्तर 1: आसान (कक्षा 6–8)

1. (ग) — समास का अर्थ है छोटा करना (संक्षेप)।

2. (घ) — अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व, बहुव्रीहि।

3. (ख) — माता और पिता — दोनों पद प्रधान।

4. (ग) — का का लोप — संबंध तत्पुरुष।

5. (ख) — तीन लोकों का समूह; पहला पद संख्या।

6. (ग) — नीला है जो कमल — विशेषण-विशेष्य।

7. (घ) — शक्ति के अनुसार; पहला पद ‘यथा’ अव्यय।

8. (ख) — दस हैं आनन जिसके — रावण (तीसरा अर्थ)।

9. (ग) — के लिए का लोप — संप्रदान तत्पुरुष।

10. (घ) — इसे समस्त पद या सामासिक पद कहते हैं।

11. (ख) — समास में विग्रह, संधि में विच्छेद।

12. (घ) — सुख और दुख।

13. (ग) — प्रत्येक दिन; पहला पद ‘प्रति’ अव्यय।

14. (ग) — चार राहों का समूह।

15. (घ) — संप्रदान तत्पुरुष।

16. (क) — महान है जो आत्मा।

17. (क) — लंबा है उदर जिसका — गणेश।

18. (ख) — पाठ के लिए शाला — संप्रदान तत्पुरुष।

19. (ख) — रात और दिन।

20. (घ) — सात दिनों का समूह।

21. (क) — जीवन भर; पहला पद ‘आ’।

22. (ख) — संबंध तत्पुरुष।

23. (घ) — नीला है कंठ जिसका — शिव।

24. (ख) — न सभ्य — निषेध का भाव।

25. (ख) — भाई और बहन।

26. (घ) — पाँच वटों का समूह।

27. (क) — संबंध तत्पुरुष।

28. (क) — उपमान-उपमेय — कर्मधारय।

29. (घ) — समय के अनुसार।

30. (ख) — से (साधन) — करण तत्पुरुष।

31. (घ) — गज के समान आनन है जिसका — गणेश।

32. (क) — माता-पिता = माता और पिता।

33. (ग) — नौ ग्रहों का समूह।

34. (ग) — अधिकरण तत्पुरुष।

35. (ग) — न पढ़ा — निषेध।

36. (ग) — सत् (अच्छा) है जो जन।

37. (क) — से (अलग होना) — अपादान तत्पुरुष।

38. (घ) — दाल और रोटी।

39. (क) — चक्र है पाणि में जिसके — विष्णु।

40. (क) — पेट भरकर; पहला पद ‘भर’।

स्तर 2: मध्यम (कक्षा 9–10, बोर्ड परीक्षा)

1. (क) — शरण को आया हुआ।

2. (ग) — रेखा से अंकित (साधन)।

3. (ग) — विद्या के लिए आलय।

4. (ग) — धन से हीन (अलग होना)।

5. (क) — राष्ट्र का पति।

6. (घ) — ध्यान में मग्न।

7. (क) — कर्म तत्पुरुष।

8. (ख) — अपादान तत्पुरुष।

9. (क) — कर्मधारय (सामान्य अर्थ में)।

10. (क) — उपमान-उपमेय — कर्मधारय (सामान्य अर्थ)।

11. (घ) — द्विगु।

12. (घ) — द्वंद्व।

13. (ख) — अव्ययीभाव।

14. (घ) — चार हैं भुजाएँ जिसकी — विष्णु।

15. (घ) — अव्ययीभाव में पूर्व पद प्रधान।

16. (घ) — द्वंद्व में दोनों पद प्रधान।

17. (घ) — बहुव्रीहि में अन्य (तीसरा) पद प्रधान।

18. (क) — कर्मधारय (रूपक)।

19. (क) — अधिकरण तत्पुरुष।

20. (ग) — अकाल से पीड़ित (कारण/साधन)।

21. (क) — देश से निकाला (अलग करना)।

22. (ख) — अधिकरण तत्पुरुष।

23. (ग) — सौ वर्षों का समूह।

24. (ख) — द्वंद्व।

25. (घ) — बिना डर के।

26. (ख) — भव रूपी सागर।

27. (ख) — मृत्यु को जीत लिया है जिसने — शिव।

28. (क) — संप्रदान तत्पुरुष।

29. (ख) — करण तत्पुरुष।

30. (ख) — माखन को चुराने वाला।

31. (ग) — ऋण से मुक्त (अलग होना)।

32. (ग) — अधिकरण तत्पुरुष।

33. (ख) — नव है जो युवक।

34. (घ) — चार मासों का समूह।

35. (ग) — अन्न और जल।

36. (क) — वीणा है पाणि में जिसके — सरस्वती।

37. (ग) — रात ही रात में; पुनरुक्त पद।

38. (घ) — न उचित।

39. (ख) — पुरुषों में उत्तम।

40. (ख) — कर्मधारय (सामान्य अर्थ)।

स्तर 3: कठिन (कक्षा 11–12, CTET/TET और प्रतियोगी परीक्षाएँ)

1. (क) — सामान्य अर्थ में कर्मधारय; विशेष व्यक्ति के अर्थ में बहुव्रीहि।

2. (घ) — अन्य (तीसरा) अर्थ — श्रीकृष्ण।

3. (ख) — त्रिलोचन — तीन हैं लोचन जिसके — बहुव्रीहि।

4. (ग) — केवल ‘का समूह’ — द्विगु।

5. (ग) — पथभ्रष्ट (पथ से भ्रष्ट) अपादान तत्पुरुष है।

6. (ख) — मन से माना।

7. (ग) — घोड़ों की दौड़।

8. (घ) — कर्म तत्पुरुष।

9. (क) — कर्मधारय में उत्तर पद प्रधान, बहुव्रीहि में अन्य पद।

10. (ग) — कर्मधारय (उपमान-उपमेय)।

11. (घ) — तीन फलों का समूह।

12. (ख) — आधा है जो मरा।

13. (ग) — हाथ ही हाथ में — पुनरुक्त, अव्यय की तरह।

14. (ख) — धर्म या अधर्म।

15. (क) — धर्म से विमुख।

16. (ग) — गिरि को धारण करने वाला — श्रीकृष्ण।

17. (क) — द्विगु।

18. (ख) — विद्या रूपी धन।

19. (घ) — कूल के समीप; ‘उप’ अव्यय।

20. (घ) — कार्य में कुशल।

21. (ख) — देव + आलय (संधि); देव के लिए आलय (समास)।

22. (घ) — गुरु के लिए दक्षिणा।

23. (घ) — न अभिज्ञ — निषेध।

24. (ग) — तीन वेणियों का समूह।

25. (घ) — एक है दाँत जिसका — गणेश।

26. (घ) — द्विगु।

27. (ख) — जल में मग्न।

28. (क) — जेब को कतरने वाला।

29. (क) — लेन और देन।

30. (ख) — कर्मधारय।

31. (ग) — करण तत्पुरुष।

32. (ख) — इष्ट के अनुसार।

33. (ख) — छह हैं आनन जिसके — कार्तिकेय।

34. (क) — गृहप्रवेश (गृह में प्रवेश) अधिकरण तत्पुरुष है।

35. (घ) — हंस है वाहन जिसका — सरस्वती।

36. (ख) — दो पहरों का समूह।

37. (क) — सामान्य अर्थ में कर्मधारय, श्रीकृष्ण के अर्थ में बहुव्रीहि — यही R बताता है।

38. (घ) — चौराहा द्विगु है, इसलिए A गलत; R सही।

39. (क) — R ही द्वंद्व की पहचान है।

40. (ग) — A सही; पर अव्ययीभाव में पहला पद प्रधान होता है, इसलिए R गलत।

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