अपठित काव्यांश बोर्ड परीक्षा का वह हिस्सा है जिसमें पहले से न पढ़ी गई कविता देकर उसकी समझ परखी जाती है। इस लेख में कक्षा 10 (हिंदी ‘अ’) के नए प्रश्न-पत्र प्रारूप के अनुसार अपठित काव्यांश हल करने की पूरी विधि, 2 अंक वाले प्रश्नों के उत्तर लिखने का तरीका, एक हल किया हुआ उदाहरण और आसान, मध्यम व कठिन — तीन स्तरों के 24 अभ्यास काव्यांश दिए गए हैं। हर काव्यांश में बोर्ड जैसे 3 बहुविकल्पीय और 2 लघु उत्तरीय प्रश्न हैं, साथ में 2 अतिरिक्त बहुविकल्पीय प्रश्न अभ्यास के लिए; सभी के उत्तर लेख के अंत में ‘उत्तर कुंजी’ में हैं। परीक्षा दें (टेस्ट दें)
नया प्रश्न-पत्र प्रारूप: अपठित काव्यांश कितने अंक का और कैसे प्रश्न
CBSE के वर्तमान पाठ्यक्रम (हिंदी ‘अ’, कोड 002) में खंड ‘क’ — अपठित बोध 14 अंक का है: एक अपठित गद्यांश (7 अंक) और एक अपठित काव्यांश (7 अंक)। काव्यांश वाला हिस्सा इस प्रकार है—
| क्या मिलेगा | विवरण |
|---|---|
| काव्यांश | एक अपठित काव्यांश, लगभग 120 शब्दों का |
| बहुविकल्पीय प्रश्न | 3 प्रश्न × 1 अंक = 3 अंक |
| अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न | 2 प्रश्न × 2 अंक = 4 अंक |
| कुल | 7 अंक |
ध्यान दें: अब काव्यांश में केवल विकल्प चुनने वाले प्रश्न नहीं हैं — 4 अंक के प्रश्नों के उत्तर अपने शब्दों में लिखने होते हैं। इसलिए कविता का भाव समझकर साफ़, छोटे वाक्यों में उत्तर लिखने का अभ्यास ज़रूरी है। हिंदी ‘ब’ (कोड 085) के खंड ‘क’ में दो अपठित गद्यांश आते हैं; फिर भी कविता समझने का यह अभ्यास वहाँ के पाठ्यपुस्तक वाले काव्यांशों में भी काम आएगा। परीक्षा से पहले अपने विद्यालय से उस वर्ष का प्रतिदर्श प्रश्न-पत्र अवश्य देख लें।
अपठित काव्यांश हल करने की विधि (5 कदम)
- पहला पाठ — भाव पकड़ें: कविता एक बार पूरी पढ़ें और सोचें: कवि किस बारे में बात कर रहा है? (विषय) और क्या कहना चाहता है? (संदेश)
- प्रश्न पहले देख लें: दूसरी बार पढ़ने से पहले प्रश्नों पर नज़र डालें, ताकि पढ़ते समय उत्तर वाली पंक्तियाँ पहचान सकें।
- दूसरा पाठ — पंक्ति-दर-पंक्ति: कठिन शब्दों का अर्थ आसपास की पंक्तियों से अनुमान लगाएँ; प्रतीक (दीपक, आँधी, निशा, पंख) का छिपा अर्थ सोचें।
- बहुविकल्पीय प्रश्न: हर विकल्प को कविता से मिलाएँ। ‘लगभग सही’ विकल्प से बचें — जो पंक्ति से पूरी तरह मेल खाए, वही चुनें।
- लिखित प्रश्न: उत्तर कविता पर आधारित हो, पर पंक्तियाँ ज्यों-की-त्यों न उतारें; अपने शब्दों में 25–40 शब्दों में लिखें।
2 अंक वाले प्रश्नों के उत्तर कैसे लिखें
2 अंक के उत्तर में आम तौर पर दो बातें चाहिए — एक, कविता में क्या कहा गया है; दो, उसका अर्थ या संदेश। नीचे बोर्ड में बार-बार आने वाले प्रश्नों के प्रकार और उनके उत्तर का ढाँचा दिया है—
| प्रश्न का प्रकार | उत्तर में क्या लिखें |
|---|---|
| पंक्ति का आशय / भाव स्पष्ट कीजिए | पंक्ति का सीधा अर्थ + उसके पीछे छिपा संदेश (2 वाक्य) |
| कवि क्या संदेश देना चाहता है? | कविता का मुख्य विचार + हमें क्या करना चाहिए |
| प्रतीक का अर्थ (जैसे — दीपक, आँधी किसके प्रतीक हैं?) | प्रतीक का अर्थ + कविता में वह क्यों आया |
| विडंबना / विरोधाभास स्पष्ट कीजिए | दो उलटी बातें आमने-सामने रखें (जैसे — अन्न उगाने वाला ही भूखा) |
| काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए | भाव-सौंदर्य (क्या चित्र बनता है) + शिल्प (अलंकार, शब्द-चयन) |
| दो विशेषताएँ / उपाय लिखिए | (1) … (2) … — दोनों अलग-अलग, कविता से जुड़े हुए |
बहुविकल्पीय प्रश्नों में अक्सर ये पूछे जाते हैं: शब्दार्थ, अलंकार (उपमा, रूपक, मानवीकरण, पुनरुक्ति प्रकाश), मुहावरे का अर्थ, उपयुक्त शीर्षक, केंद्रीय भाव और कथन-कारण (A–R)। अलंकार पहचानने के लिए हमारा ‘अलंकार’ लेख भी देखें।
हल सहित उदाहरण — काव्यांश (1)
नीचे दिए काव्यांश को ध्यान से पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
धूप सहे, पर छाँव लुटाए,
पत्थर खाकर फल बरसाए,
आँधी आए, शीश झुका ले,
फिर उठकर नभ को छू आए।
जड़ से धरती थामे रहता,
कभी न अपना दुख वह कहता,
पंछी, पथिक, पवन सब उसके,
सबका बोझ हँसकर सहता।
मैं भी ऐसा जीवन पाऊँ,
दूजों के कुछ काम आ जाऊँ,
लेना कम, देना ही ज़्यादा —
तरुवर-सा मैं बन दिखलाऊँ।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. पेड़ पत्थर खाकर भी क्या करता है?
(क) छाया छीन लेता है
(ख) टूटकर गिर जाता है
(ग) क्रोधित हो जाता है
(घ) फल बरसाता है
उत्तर: (घ) फल बरसाता है — दूसरी पंक्ति — ‘पत्थर खाकर फल बरसाए’।
2. ‘आँधी आए, शीश झुका ले’ से पेड़ का कौन-सा गुण प्रकट होता है?
(क) अहंकार
(ख) कायरता
(ग) आलस्य
(घ) विनम्रता और परिस्थिति के अनुसार ढल जाना
उत्तर: (घ) विनम्रता और परिस्थिति के अनुसार ढल जाना — झुककर संकट टाल देता है और फिर उठ खड़ा होता है।
3. कवि कैसा बनना चाहता है?
(क) पंछी जैसा
(ख) तरुवर जैसा परोपकारी
(ग) धनवान
(घ) पथिक जैसा
उत्तर: (ख) तरुवर जैसा परोपकारी — अंतिम पंक्ति — ‘तरुवर-सा मैं बन दिखलाऊँ’।
लघु उत्तरीय प्रश्न (2×2=4)
4. पेड़ अपना दुख क्यों नहीं कहता? उसके इस गुण से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर: पेड़ सहनशील है — वह धूप, आँधी और पत्थर सहकर भी सबको छाया और फल देता है। इससे सीख मिलती है कि हम कठिनाई में शिकायत न करें और दूसरों की भलाई में लगे रहें।
5. ‘लेना कम, देना ही ज़्यादा’ पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: कवि कहता है कि जीवन में अपने लिए कम चाहें और दूसरों को अधिक दें। यही परोपकार है, जैसा पेड़ बिना कुछ माँगे सबको देता रहता है।
देखिए — लिखित उत्तर में कविता की बात (क्या कहा गया) और उसका संदेश (क्या सीख मिलती है) दोनों आए हैं; यही पूरे 2 अंक दिलाता है।
स्तर 1: आसान काव्यांश (कक्षा 9–10 की शुरुआत)
सरल भाषा, सीधा भाव — परिवार, प्रकृति, मित्रता और परिश्रम पर।
काव्यांश (1) ऊपर ‘हल सहित उदाहरण’ में दिया गया है; यहाँ से काव्यांश (2) शुरू होता है।
काव्यांश (2)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
सुबह-सवेरे सबसे पहले
जो उठ जाती, वह है माँ,
चूल्हे की आँच, बस्ते की चिंता,
सब कुछ सह जाती है माँ।
मेरे आँसू पोंछ के अपने
आँसू पी जाती है माँ,
बिना कहे जो मन की पाती
पढ़-पढ़ जाती, वह है माँ।
थककर भी जो कभी न थकती,
दीपक-सी जल जाती माँ,
घर-आँगन में उजियारा कर
ख़ुद छाया बन जाती माँ।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. माँ सुबह सबसे पहले क्या करती है?
(क) मंदिर जाती है
(ख) देर तक सोती है
(ग) सबसे पहले उठ जाती है
(घ) बाज़ार जाती है
2. ‘दीपक-सी जल जाती माँ’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) उपमा
(ख) श्लेष
(ग) यमक
(घ) रूपक
3. ‘मन की पाती पढ़ लेना’ का अर्थ है—
(क) बिना कहे मन की बात समझ लेना
(ख) पढ़ाई करना
(ग) चिट्ठी पढ़ना
(घ) कहानी सुनाना
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. ‘घर-आँगन में उजियारा कर ख़ुद छाया बन जाती माँ’ — आशय स्पष्ट कीजिए।
5. काव्यांश के आधार पर माँ की दो विशेषताएँ लिखिए।
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. ‘पढ़-पढ़’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) उपमा
(ख) पुनरुक्ति प्रकाश
(ग) यमक
(घ) श्लेष
7. माँ अपने आँसुओं के साथ क्या करती है?
(क) पी जाती है, अर्थात् छिपा लेती है
(ख) ज़ोर से रोती है
(ग) बच्चे को डाँटती है
(घ) सबसे शिकायत करती है
काव्यांश (3)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
जेठ की लू में खेत जोतता,
माघ की ठिठुरन में सींचे,
माटी में सपने बोता है
वह हल के पीछे-पीछे।
उसके माथे के पसीने से
धरती सोना उगलती है,
उसकी मेहनत की रोटी से
सारी दुनिया पलती है।
फिर भी उसकी झोंपड़ी में
दीया मद्धम जलता है,
अन्नदाता का अपना चूल्हा
कभी-कभी ही जलता है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. ‘धरती सोना उगलती है’ का अर्थ है—
(क) सूखा पड़ता है
(ख) अच्छी फसल होती है
(ग) खेत बिक जाते हैं
(घ) धरती से सोना निकलता है
2. काव्यांश में किसान के लिए कौन-सा शब्द आया है?
(क) अन्नदाता
(ख) धनवान
(ग) व्यापारी
(घ) राजा
3. काव्यांश का मूल भाव क्या है?
(क) शहर की सुंदरता
(ख) बरसात का वर्णन
(ग) त्योहार का आनंद
(घ) किसान का कठिन परिश्रम और उसकी ग़रीबी
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. ‘अन्नदाता का अपना चूल्हा कभी-कभी ही जलता है’ — इस पंक्ति की विडंबना स्पष्ट कीजिए।
5. ‘माटी में सपने बोता है’ — आशय लिखिए।
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. ‘पीछे-पीछे’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) श्लेष
(ख) रूपक
(ग) पुनरुक्ति प्रकाश
(घ) उपमा
7. किसान किस मौसम में खेत सींचता है?
(क) माघ की ठिठुरन में
(ख) जेठ की लू में
(ग) वसंत में
(घ) सावन में
काव्यांश (4)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
समय नदी की धारा-सा है,
पल भर भी रुकता है कब?
जो इसके संग चल पाया,
उसका ही होता है सब।
कल पर काम न टालो साथी,
कल किसने देखा है भाई,
आज जो बोया, कल वह काटा —
यही सनातन सच्चाई।
घड़ी की सुइयाँ कहतीं हरदम —
‘उठो, चलो, कुछ कर जाओ’,
खोया धन फिर मिल सकता है,
खोया समय न फिर पाओ।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. ‘समय नदी की धारा-सा है’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) उपमा
(ख) यमक
(ग) अनुप्रास
(घ) रूपक
2. कवि क्या न करने की सलाह देता है?
(क) घड़ी देखना
(ख) काम को कल पर टालना
(ग) मेहनत करना
(घ) आगे बढ़ना
3. ‘आज जो बोया, कल वह काटा’ का भाव है—
(क) खेती करना ज़रूरी है
(ख) जैसा कर्म, वैसा फल
(ग) फसल जल्दी पकती है
(घ) कल छुट्टी है
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. घड़ी की सुइयाँ हमें क्या संदेश देती हैं?
5. खोए धन और खोए समय में कवि ने क्या अंतर बताया है?
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. कवि के अनुसार कौन-सी चीज़ दोबारा नहीं मिलती?
(क) पुराना मित्र
(ख) खोया समय
(ग) घड़ी
(घ) खोया धन
7. ‘हरदम’ शब्द का अर्थ है—
(क) कभी नहीं
(ख) कभी-कभी
(ग) रात में
(घ) हमेशा
काव्यांश (5)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
काले बादल घिर-घिर आए,
नभ में ढोल-नगाड़े बाजे,
बिजली चमकी, झूम उठा मन,
मोर पंख फैलाकर नाचे।
रिमझिम-रिमझिम बूँदें बरसीं,
प्यासी धरती की प्यास बुझी,
मुरझाई बगिया में फिर से
हरियाली की लहर उठी।
कागज़ की नावें ले बच्चे
गलियों में दौड़े आए,
दादी बोलीं — ‘इस बरस तो
खेत सुनहरे लहराएँ।’
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. ‘नभ में ढोल-नगाड़े बाजे’ से किसकी ओर संकेत है?
(क) मेले का शोर
(ख) बादलों की गर्जना
(ग) मंदिर की आरती
(घ) विवाह का बाजा
2. ‘रिमझिम-रिमझिम’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) रूपक
(ख) उपमा
(ग) श्लेष
(घ) पुनरुक्ति प्रकाश
3. वर्षा होने पर मोर क्या करता है?
(क) उड़ जाता है
(ख) पंख फैलाकर नाचता है
(ग) सो जाता है
(घ) छिप जाता है
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. वर्षा का बच्चों और धरती पर क्या प्रभाव पड़ा?
5. काव्यांश में वर्षा को किसान के जीवन से कैसे जोड़ा गया है?
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. दादी को किस बात की आशा है?
(क) सूखे की
(ख) बाढ़ की
(ग) मेले की
(घ) अच्छी फसल की
7. ‘मुरझाई बगिया’ का अर्थ है—
(क) नया बाग़
(ख) पानी से भरा खेत
(ग) सूखा हुआ बगीचा
(घ) फूलों से भरा बाग़
काव्यांश (6)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
सुख में तो सब साथ निभाते,
दुख में दे जो साथ, वही,
गिरते को जो हाथ बढ़ाए,
सच्चा मित्र है बस वही।
मुँह पर मीठी बातें करके
जो पीछे से घात करे,
ऐसे कपटी साथी से तो
मन अकेलापन ही वरे।
सच्चा मित्र दर्पण जैसा,
दोष दिखाए, राह सुझाए,
भटके पाँव जहाँ भी जाएँ,
दीपक बनकर साथ निभाए।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. कवि के अनुसार सच्चे मित्र की पहचान क्या है?
(क) दुख में साथ देने वाला
(ख) मीठी बातें करने वाला
(ग) केवल सुख में साथ रहने वाला
(घ) धनवान व्यक्ति
2. ‘सच्चा मित्र दर्पण जैसा’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) उपमा
(ख) पुनरुक्ति प्रकाश
(ग) यमक
(घ) रूपक
3. कपटी साथी क्या करता है?
(क) राह दिखाता है
(ख) मुँह पर मीठी बातें, पीछे से घात
(ग) दोष बताता है
(घ) हमेशा सच बोलता है
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. सच्चे मित्र की तुलना दर्पण से क्यों की गई है?
5. कवि कपटी साथी की बजाय अकेलेपन को अच्छा क्यों मानता है?
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. ‘घात’ शब्द का अर्थ है—
(क) मित्रता
(ख) प्रशंसा
(ग) सहायता
(घ) धोखे से किया गया वार
7. ‘दीपक बनकर साथ निभाए’ का आशय है—
(क) दीया जलाए
(ख) घर में रोशनी करे
(ग) कठिन समय में राह दिखाए
(घ) रात में साथ घूमे
काव्यांश (7)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
मैं पुस्तक हूँ, मौन सखा हूँ,
कभी न तुमसे रूठूँ,
जब चाहो तब पास बुला लो,
साथ कभी न छोड़ूँ।
मुझमें छिपे हैं सागर-पर्वत,
तारे, देश, कहानी,
वीरों की गाथाएँ मुझमें,
संतों की भी वाणी।
मुझको पढ़कर बालक बनता
ज्ञानी, धीर, विचारी,
दीपक बनकर दूर करूँ मैं
मन की रात अँधियारी।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. पुस्तक स्वयं को क्या कहती है?
(क) मौन सखा
(ख) शत्रु
(ग) खिलौना
(घ) कठोर शिक्षक
2. ‘मन की रात अँधियारी’ से क्या अभिप्राय है?
(क) नींद
(ख) अज्ञान
(ग) रात का समय
(घ) बिजली जाना
3. इस काव्यांश में ‘मैं’ कौन है?
(क) बालक
(ख) दीपक
(ग) कवि
(घ) पुस्तक
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. पुस्तक को ‘मौन सखा’ क्यों कहा गया है?
5. पुस्तक पढ़ने से बालक में कौन-से गुण आते हैं?
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. ‘सखा’ शब्द का अर्थ है—
(क) भाई
(ख) मित्र
(ग) शत्रु
(घ) गुरु
7. पुस्तक में क्या-क्या छिपा है?
(क) केवल पहेलियाँ
(ख) केवल गणित
(ग) केवल चित्र
(घ) सागर-पर्वत, तारे, कहानियाँ और गाथाएँ
काव्यांश (8)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
नन्ही चींटी दाना लेकर
दीवारों पर चढ़ती है,
सौ-सौ बार फिसलती फिर भी
आगे-आगे बढ़ती है।
गिरकर उठना, उठकर चलना,
यही सीख वह देती है,
हार मानना उसे न आता,
मंज़िल पा ही लेती है।
तुम भी साथी, एक हार से
मन को मत छोटा करना,
चींटी जैसी लगन रखो तो
सीखोगे जग में तरना।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. चींटी बार-बार फिसलकर क्या करती है?
(क) लौट जाती है
(ख) फिर आगे बढ़ती है
(ग) दाना छोड़ देती है
(घ) सो जाती है
2. चींटी हमें क्या सीख देती है?
(क) दूसरों से छीनना
(ख) लगन और निरंतर प्रयास
(ग) आराम करना
(घ) डरकर बैठ जाना
3. ‘सौ-सौ बार’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) पुनरुक्ति प्रकाश
(ख) उपमा
(ग) श्लेष
(घ) रूपक
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. कवि ने चींटी का उदाहरण क्यों दिया है?
5. ‘गिरकर उठना, उठकर चलना’ — पंक्ति का भाव लिखिए।
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. ‘मन को छोटा करना’ मुहावरे का अर्थ है—
(क) खुश होना
(ख) गुस्सा करना
(ग) निराश होना
(घ) घमंड करना
7. ‘जग में तरना’ का अर्थ है—
(क) संसार में सफल होना
(ख) तैरना सीखना
(ग) यात्रा करना
(घ) सो जाना
स्तर 2: मध्यम काव्यांश (बोर्ड परीक्षा स्तर)
प्रतीक और सामाजिक विषय — पर्यावरण, शहरी जीवन, बालिका शिक्षा, सैनिक, बुज़ुर्ग।
काव्यांश (9)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
मिट्टी का नन्हा-सा दीपक
तम से लड़ने निकला है,
आँधी ने कितना ललकारा,
पर वह तनिक न डोला है।
जलना उसका धर्म बना है,
देना उसकी पूजा है,
अपने तन को होम करे जो,
उस-सा कोई दूजा है?
देहरी पर रखा वह कहता —
‘छोटा हूँ तो क्या डर है,
एक किरण भी काफ़ी होती
जहाँ घना अँधियारा भर है।’
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. ‘तम’ शब्द का अर्थ है—
(क) आँधी
(ख) प्रकाश
(ग) अंधकार
(घ) मिट्टी
2. काव्यांश के अनुसार दीपक का धर्म क्या है?
(क) जलकर प्रकाश देना
(ख) आँधी से डरना
(ग) मिट्टी बन जाना
(घ) देहरी सजाना
3. ‘अपने तन को होम करे जो’ का आशय है—
(क) यज्ञ करना
(ख) दूसरों के लिए स्वयं को मिटा देना
(ग) भोजन पकाना
(घ) शरीर सजाना
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. ‘एक किरण भी काफ़ी होती’ — इस पंक्ति के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
5. आँधी और दीपक के संघर्ष से जीवन के बारे में क्या संदेश मिलता है?
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. काव्यांश में दीपक किसका प्रतीक है?
(क) आलस्य का
(ख) धन का
(ग) त्यागी और साहसी व्यक्ति का
(घ) अहंकार का
7. ‘उस-सा कोई दूजा है?’ — इस प्रश्न का भाव है—
(क) कवि को संदेह है
(ख) उसके जैसे बहुत हैं
(ग) कवि उपहास कर रहा है
(घ) उसके जैसा कोई नहीं है
काव्यांश (10)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
गाँव छोड़कर शहर आया था
सपनों की गठरी बाँधे,
यहाँ मिलीं ऊँची इमारतें,
पर छोटे-छोटे मन।
सड़कें चौड़ी, गलियाँ लंबी,
फिर भी राह नहीं मिलती,
भीड़ हज़ारों की है लेकिन
कोई पहचान नहीं मिलती।
रात को छत पर तारे खोजूँ,
धुएँ में सब छिप जाते हैं,
अम्मा के आँगन वाले तारे
सपनों में ही आते हैं।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. ‘ऊँची इमारतें, पर छोटे-छोटे मन’ में कौन-सा भाव है?
(क) गाँव की निंदा
(ख) इमारतों की प्रशंसा
(ग) मज़दूरों का परिश्रम
(घ) शहर की भौतिक उन्नति और मन की संकीर्णता का विरोधाभास
2. शहर में तारे क्यों नहीं दिखते?
(क) बादलों के कारण
(ख) दिन होने के कारण
(ग) ऊँची इमारतों के कारण
(घ) धुएँ (प्रदूषण) के कारण
3. ‘सपनों की गठरी बाँधे’ का अर्थ है—
(क) सोते हुए
(ख) मन में बहुत-सी आशाएँ लेकर
(ग) कपड़ों की पोटली लेकर
(घ) सपने बेचने के लिए
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. कवि को ‘अम्मा के आँगन वाले तारे’ सपनों में ही क्यों दिखते हैं?
5. ‘सड़कें चौड़ी… फिर भी राह नहीं मिलती’ — विरोधाभास स्पष्ट कीजिए।
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. ‘भीड़ हज़ारों की है लेकिन कोई पहचान नहीं मिलती’ — किस समस्या की ओर संकेत है?
(क) शहरी जीवन का अकेलापन
(ख) महँगाई
(ग) बेरोज़गारी
(घ) यातायात
7. काव्यांश का उपयुक्त शीर्षक है—
(क) शहर में गाँव की याद
(ख) शहर की सड़कें
(ग) गठरी
(घ) रात के तारे
काव्यांश (11)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
कल-कल करती, गीत सुनाती
बहती थी जो नदी कभी,
आज उसी की धारा रोती,
मैली होकर, थकी-थकी।
हमने उसमें कचरा डाला,
रसायन का ज़हर घोला,
जिसने हमको जीवन बाँटा,
उसका ही विश्वास तोड़ा।
अब भी समय है, जागो साथी,
नदियों को फिर निर्मल कर दो,
उनकी सूनी, सूखी गोदी
फिर से हरियाली से भर दो।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. नदी के मैली होने का कारण क्या है?
(क) कचरा और रसायन डालना
(ख) पहाड़ों की बर्फ़
(ग) अधिक वर्षा
(घ) मछलियाँ
2. ‘आज उसी की धारा रोती’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) श्लेष
(ख) मानवीकरण
(ग) यमक
(घ) उपमा
3. कवि क्या आह्वान करता है?
(क) बाँध तोड़ने का
(ख) नदियों को फिर से स्वच्छ बनाने का
(ग) मछली पकड़ने का
(घ) नदी किनारे घर बनाने का
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. ‘जिसने हमको जीवन बाँटा, उसका ही विश्वास तोड़ा’ — आशय स्पष्ट कीजिए।
5. नदियों को फिर से निर्मल बनाने के लिए दो उपाय सुझाइए।
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. ‘कल-कल’ किसकी ध्वनि है?
(क) बहते जल की
(ख) बादलों की
(ग) हवा की
(घ) पक्षियों की
7. ‘निर्मल’ शब्द का अर्थ है—
(क) चौड़ा
(ख) गहरा
(ग) मैला
(घ) स्वच्छ
काव्यांश (12)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
बर्फ़ीली चोटी पर बैठा
वह पहरा देता रातों को,
होली-दीवाली दूर कहीं,
याद करे घर की बातों को।
माँ की चिट्ठी जेब में रखकर
सीमा पर डटकर खड़ा रहा,
आँधी, तूफ़ाँ, गोली, ओले —
हर संकट से वह बड़ा रहा।
हम सोते हैं चैन की निंदिया,
वह जगता है हम सबके हित,
उसके त्याग से ही तो अपना
देश सुरक्षित, जन-मन हर्षित।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. ‘हर संकट से वह बड़ा रहा’ का अर्थ है—
(क) वह उम्र में बड़ा था
(ख) वह लंबा हो गया
(ग) वह हर संकट से अधिक साहसी सिद्ध हुआ
(घ) वह संकट से भाग गया
2. हम चैन से क्यों सो पाते हैं?
(क) अच्छे बिस्तर के कारण
(ख) रात लंबी होने से
(ग) शोर न होने से
(घ) सैनिक के जागने और त्याग के कारण
3. सैनिक जेब में क्या रखता है?
(क) घड़ी
(ख) पैसे
(ग) माँ की चिट्ठी
(घ) नक्शा
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. काव्यांश के आधार पर सैनिक के जीवन की कठिनाइयाँ लिखिए।
5. काव्यांश हमें सैनिकों के प्रति क्या भाव रखने की प्रेरणा देता है?
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. ‘जन-मन हर्षित’ का अर्थ है—
(क) लोगों का मन प्रसन्न
(ख) लोग सोए हुए
(ग) लोग डरे हुए
(घ) लोग दुखी
7. सैनिक कहाँ पहरा देता है?
(क) खेत में
(ख) बर्फ़ीली चोटी पर
(ग) विद्यालय में
(घ) शहर के बाज़ार में
काव्यांश (13)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
आँगन सूना, गलियाँ सूनी,
गेंद पड़ी है कोने में,
बचपन अब उँगली पर नाचे
छोटे-से इक खिलौने में।
दादी की कहानी चुप है,
पतंग की डोर उलझी है,
चमकीली इक स्क्रीन के आगे
आँखें दिन-भर झुकी-झुकी हैं।
आओ फिर से मैदानों में
मिट्टी की ख़ुशबू ले लें,
थोड़ी देर स्क्रीन बुझाकर
जीवन के रंगों से खेलें।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. ‘छोटे-से इक खिलौने’ से किसकी ओर संकेत है?
(क) गेंद
(ख) गुड़िया
(ग) पतंग
(घ) मोबाइल फ़ोन
2. आँगन और गलियाँ सूनी क्यों हैं?
(क) बारिश हो रही है
(ख) बच्चे विद्यालय गए हैं
(ग) बच्चे मोबाइल में व्यस्त हैं
(घ) रात हो गई है
3. कवि क्या करने का आग्रह करता है?
(क) स्क्रीन बंद कर मैदान में खेलना
(ख) दादी से दूर रहना
(ग) नया मोबाइल लेना
(घ) पतंग बेचना
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. काव्यांश में बचपन के किन पुराने आनंदों के छूट जाने का वर्णन है?
5. ‘जीवन के रंगों से खेलें’ — इस पंक्ति से कवि क्या संदेश देना चाहता है?
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. ‘झुकी-झुकी’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) उपमा
(ख) पुनरुक्ति प्रकाश
(ग) रूपक
(घ) श्लेष
7. ‘दादी की कहानी चुप है’ का आशय है—
(क) बच्चे अब दादी से कहानियाँ नहीं सुनते
(ख) दादी बीमार हैं
(ग) कहानी समाप्त हो गई
(घ) दादी नाराज़ हैं
काव्यांश (14)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
मुझको भी पढ़ने दो बाबा,
मेरे भी तो सपने हैं,
चूल्हे-चौके से आगे भी
जग में रस्ते अपने हैं।
भैया जैसा बस्ता देकर
देखो, कैसे उड़ती हूँ,
पर्वत, सागर, अंबर तक मैं
अपनी राहें गढ़ती हूँ।
बेटी पढ़ी तो दो घर रोशन,
यह बात सभी को समझाओ,
मेरे पंखों को मत बाँधो,
मुझको उड़ना सिखलाओ।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. बेटी किससे पढ़ने की अनुमति माँग रही है?
(क) शिक्षक से
(ख) सहेली से
(ग) भाई से
(घ) बाबा (पिता) से
2. ‘चूल्हे-चौके से आगे भी जग में रस्ते अपने हैं’ का भाव है—
(क) लड़कियाँ घर के काम के अलावा हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं
(ख) रास्ते बहुत लंबे हैं
(ग) घर छोड़ देना चाहिए
(घ) खाना बनाना सबसे ज़रूरी है
3. ‘बेटी पढ़ी तो दो घर रोशन’ का अर्थ है—
(क) दो दीपक जलते हैं
(ख) पढ़ी-लिखी बेटी दो परिवारों का भला करती है
(ग) दो घर बनते हैं
(घ) बिजली बचती है
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. बेटी ‘भैया जैसा बस्ता’ क्यों माँगती है?
5. काव्यांश समाज को क्या संदेश देता है?
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. ‘मेरे पंखों को मत बाँधो’ — यहाँ ‘पंख’ किसके प्रतीक हैं?
(क) कपड़ों के
(ख) पंखे के
(ग) पक्षी के
(घ) स्वतंत्रता और सपनों के
7. काव्यांश का मुख्य विषय है—
(क) ऋतु वर्णन
(ख) देशभक्ति
(ग) पर्यावरण
(घ) बालिका शिक्षा
काव्यांश (15)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
राह कठिन है, यह मत सोचो,
काँटे भी तो फूल बनेंगे,
जिन पाँवों में छाले होंगे,
वही नए इतिहास लिखेंगे।
सागर ने कब नाव डुबोई
उसकी, जिसने हिम्मत पाली?
तूफ़ानों से जो टकराया,
उसकी ही पतवार निराली।
रुकना मत, थकना मत राही,
मंज़िल तेरी राह तके है,
जो चलता है, वही पहुँचता,
बैठे को बस हार मिले है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. ‘काँटे भी तो फूल बनेंगे’ का भाव है—
(क) कठिनाइयाँ भी अंत में सुखद परिणाम देंगी
(ख) बगीचा बनेगा
(ग) काँटे उगेंगे
(घ) फूल तोड़ने चाहिए
2. ‘जिन पाँवों में छाले होंगे, वही नए इतिहास लिखेंगे’ का आशय है—
(क) कठोर परिश्रम करने वाले ही महान कार्य करते हैं
(ख) यात्रा नहीं करनी चाहिए
(ग) इतिहास लिखना कठिन है
(घ) पैरों का इलाज ज़रूरी है
3. ‘मंज़िल तेरी राह तके है’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) मानवीकरण
(ख) उपमा
(ग) यमक
(घ) पुनरुक्ति प्रकाश
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. ‘जो चलता है, वही पहुँचता, बैठे को बस हार मिले है’ — आशय लिखिए।
5. काव्यांश में ‘सागर’ और ‘तूफ़ान’ किसके प्रतीक हैं?
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. ‘पतवार’ का अर्थ है—
(क) नाव खेने का डंडा
(ख) नाव का पाल
(ग) लंगर
(घ) रस्सी
7. कवि राही को क्या करने को कहता है?
(क) निरंतर चलते रहना
(ख) बैठकर आराम करना
(ग) लौट जाना
(घ) नाव छोड़ देना
काव्यांश (16)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
जिनकी उँगली थामे हमने
पहला-पहला कदम रखा,
जिनकी गोदी में सोकर
दुनिया का हर स्वाद चखा,
आज वही बूढ़ी आँखें
दरवाज़े पर टिकी हुईं,
फ़ोन की घंटी सुनने को
साँसें जैसे रुकी हुईं।
थोड़ा-सा तुम समय निकालो,
पास बैठकर बात करो,
उन झुर्रीली हथेलियों में
अपना फिर से हाथ धरो।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. ‘बूढ़ी आँखें दरवाज़े पर टिकी हुईं’ से क्या पता चलता है?
(क) संतान के आने की प्रतीक्षा
(ख) आँखों का रोग
(ग) नींद आना
(घ) चोर का डर
2. माता-पिता किसकी प्रतीक्षा कर रहे हैं?
(क) संतान के फ़ोन या आने की
(ख) डॉक्टर की
(ग) डाकिए की
(घ) पड़ोसी की
3. कवि संतान से क्या चाहता है?
(क) नया घर बनाना
(ख) केवल धन भेजना
(ग) समय निकालकर माता-पिता के पास बैठना
(घ) उन्हें छोड़ देना
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. ‘साँसें जैसे रुकी हुईं’ — इस पंक्ति का भाव लिखिए।
5. पहली चार पंक्तियों में माता-पिता के किन उपकारों को याद किया गया है?
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. ‘झुर्रीली हथेलियाँ’ किसका संकेत हैं?
(क) सुंदरता का
(ख) बचपन का
(ग) बुढ़ापे का
(घ) धन का
7. काव्यांश का केंद्रीय भाव है—
(क) प्रकृति-वर्णन
(ख) बचपन के खेल
(ग) फ़ोन की उपयोगिता
(घ) वृद्ध माता-पिता के प्रति संतान का कर्तव्य
स्तर 3: कठिन काव्यांश (तत्सम शब्दावली, गहरे भाव)
तत्सम शब्द, मानवीकरण-रूपक से भरी पंक्तियाँ और दार्शनिक भाव — टॉपर्स के लिए।
काव्यांश (17)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
अरुण-किरण की स्वर्ण-तूलिका
प्राची-पट पर चित्र रचे,
निशा-सुंदरी तारक-भूषण
धीरे-धीरे स्वयं तजे।
कलिकाएँ अलसाई आँखें
खोल रहीं मृदु मुसकाकर,
विहग-वृंद मंगल-गीतों से
जगा रहे जग को गाकर।
सरिता के कल-कल स्वर में ज्यों
मुखरित हो उठता जीवन,
आलस त्यागो, कर्म-पथ पर
बढ़ो — यही प्रभात-वचन।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. ‘प्राची’ शब्द का अर्थ है—
(क) आकाश
(ख) पश्चिम दिशा
(ग) उत्तर दिशा
(घ) पूर्व दिशा
2. ‘निशा-सुंदरी तारक-भूषण धीरे-धीरे स्वयं तजे’ में प्रमुख अलंकार है—
(क) श्लेष
(ख) उपमा
(ग) मानवीकरण
(घ) यमक
3. ‘विहग-वृंद’ का अर्थ है—
(क) तारों का समूह
(ख) पक्षियों का समूह
(ग) फूलों का गुच्छा
(घ) बादलों का दल
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. काव्यांश में प्रातःकाल के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
5. ‘कलिकाएँ अलसाई आँखें खोल रहीं’ — काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. ‘अरुण-किरण की स्वर्ण-तूलिका’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) यमक
(ख) पुनरुक्ति प्रकाश
(ग) रूपक
(घ) उपमा
7. प्रभात का संदेश क्या है?
(क) देर तक सोना
(ख) केवल गीत गाना
(ग) नदी किनारे घूमना
(घ) आलस्य छोड़कर कर्म-पथ पर बढ़ना
काव्यांश (18)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
न धन से, न कुल से, न ऊँचे भवन से
मनुज की कभी होती पहचान है,
जो औरों के दुख में पिघल जाए, सच्चा
वही इस धरा पर इंसान है।
समेटे जो केवल स्वयं के लिए ही,
वह संचय तो माटी में मिल जाएगा,
जो बाँटा गया प्रेम, करुणा, सहारा,
वही गंध बनकर महक जाएगा।
चलो, हम दिलों के ये दीपक जलाएँ
जहाँ भेद की हो अँधेरी गली,
मनुजता के उपवन में सबके लिए
खिले स्नेह की एक सुरभित कली।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. कवि के अनुसार मनुष्य की सच्ची पहचान क्या है?
(क) बड़ा भवन
(ख) दूसरों के दुख में संवेदनशील होना
(ग) ऊँचा कुल
(घ) धन
2. ‘मनुजता के उपवन’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) यमक
(ख) उपमा
(ग) रूपक
(घ) पुनरुक्ति प्रकाश
3. ‘सुरभित’ शब्द का अर्थ है—
(क) कोमल
(ख) मुरझाया हुआ
(ग) रंगीन
(घ) सुगंधित
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. ‘जो बाँटा गया प्रेम… वही गंध बनकर महक जाएगा’ — आशय स्पष्ट कीजिए।
5. कवि ने ‘दिलों के दीपक’ जलाने की बात क्यों कही है?
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. केवल अपने लिए किए गए संचय का क्या होगा?
(क) वह सदा रहेगा
(ख) वह माटी में मिल जाएगा
(ग) वह बढ़ता जाएगा
(घ) वह सुगंध फैलाएगा
7. ‘भेद की अँधेरी गली’ से आशय है—
(क) सँकरी गली
(ख) पुराना मोहल्ला
(ग) ऊँच-नीच और भेदभाव से भरा समाज
(घ) रात का अँधेरा
काव्यांश (19)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
ऋतुराज पधारे, सजी धरा
ओढ़े सरसों की पीत चुनरिया,
अमराई में कोकिल कूके,
बौराईं आमों की डरिया।
मधुप-वृंद मकरंद लुटाते,
तितली रचती रंग-रँगोली,
मंद-सुगंध समीर बहे ज्यों
किसी प्रिया की मीठी बोली।
पतझड़ की सूनी शाखों पर
नव-पल्लव का हास खिला,
जीवन का सिद्धांत यही है —
हर अंत से आरंभ मिला।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. ‘ऋतुराज’ किस ऋतु को कहा जाता है?
(क) ग्रीष्म
(ख) वर्षा
(ग) शरद
(घ) वसंत
2. ‘सजी धरा ओढ़े सरसों की पीत चुनरिया’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) श्लेष
(ख) मानवीकरण
(ग) यमक
(घ) पुनरुक्ति प्रकाश
3. ‘मंद-सुगंध समीर बहे ज्यों किसी प्रिया की मीठी बोली’ में अलंकार है—
(क) यमक
(ख) श्लेष
(ग) उपमा
(घ) रूपक
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. ‘हर अंत से आरंभ मिला’ — पतझड़ और वसंत के उदाहरण से स्पष्ट कीजिए।
5. वसंत के आगमन पर प्रकृति में आए दो परिवर्तन लिखिए।
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. ‘मधुप’ शब्द का अर्थ है—
(क) कोयल
(ख) तोता
(ग) भौंरा
(घ) तितली
7. ‘नव-पल्लव’ का अर्थ है—
(क) पुरानी जड़ें
(ख) पके फल
(ग) सूखी टहनियाँ
(घ) नए पत्ते
काव्यांश (20)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
स्वर्ण-शृंखला भी बंधन है,
चाहे जितनी हो चमकीली,
पिंजरे के मोती-दानों से
भली गगन की राह कटीली।
खग कहता — ‘मैं भूखा रह लूँ,
पर उड़ने का अधिकार रहे,
तूफ़ानों से लड़ लूँगा मैं,
बस पंखों में विस्तार रहे।’
जिस मन ने परवशता झेली,
उसने ही यह मोल पहचाना,
स्वाधीनता का स्वाद अनूठा,
इसको मुक्त हृदय ने जाना।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. ‘स्वर्ण-शृंखला’ का आशय है—
(क) सोने का हार
(ख) धन-संपत्ति
(ग) सुख-सुविधाओं से भरी पराधीनता
(घ) मज़बूत ज़ंजीर
2. पक्षी को क्या प्रिय है?
(क) भूखा रहकर भी स्वतंत्र उड़ना
(ख) पिंजरे के मोती-दाने
(ग) सोने का पिंजरा
(घ) तूफ़ान से बचना
3. ‘परवशता’ शब्द का अर्थ है—
(क) पराधीनता
(ख) स्वतंत्रता
(ग) भूख
(घ) थकान
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. ‘बस पंखों में विस्तार रहे’ — इस इच्छा से पक्षी के किस गुण का पता चलता है?
5. काव्यांश के अनुसार स्वाधीनता का मूल्य कौन समझता है और क्यों?
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. ‘गगन की राह कटीली’ से क्या संकेत मिलता है?
(क) स्वतंत्र जीवन संघर्षपूर्ण होता है
(ख) उड़ना असंभव है
(ग) पक्षी घायल है
(घ) आकाश में काँटे हैं
7. कथन (A): पक्षी पिंजरे के मोती-दाने ठुकरा देता है।
कारण (R): उसे स्वतंत्रता सुख-सुविधाओं से अधिक प्रिय है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।
(ख) A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।
काव्यांश (21)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
फल की चिंता छोड़ पथिक, तू
कर्म-भूमि पर बीज बिखेर,
अंकुर कब फूटेंगे, इसका
निर्णय करता ऋतु का फेर।
सूरज कब पूछे जलकर भी —
‘मुझको इसका क्या मिलता है?’
निःस्वार्थ भाव से जो बहता,
उस निर्झर से जग पलता है।
कर्म-यज्ञ में आहुति देकर
जो मुसकाता, वह योगी है,
जो फल की ही गिनती करता,
वह तो केवल भोगी है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. कवि पथिक को क्या संदेश देता है?
(क) फल की चिंता छोड़कर कर्म करना
(ख) फल मिले बिना काम न करना
(ग) ऋतु की प्रतीक्षा में बैठना
(घ) बीज बेच देना
2. ‘कर्म-भूमि’ और ‘कर्म-यज्ञ’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) उपमा
(ख) यमक
(ग) रूपक
(घ) श्लेष
3. ‘निर्झर’ शब्द का अर्थ है—
(क) पर्वत
(ख) झरना
(ग) बादल
(घ) सागर
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. सूरज और निर्झर के उदाहरण द्वारा कवि क्या समझाना चाहता है?
5. ‘योगी’ और ‘भोगी’ में कवि ने क्या अंतर बताया है?
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. कवि के अनुसार ‘योगी’ कौन है?
(क) जो वन में रहता है
(ख) जो फल गिनता है
(ग) जो धनवान है
(घ) जो कर्म करके भी प्रसन्न रहता है और फल की चिंता नहीं करता
7. कथन (A): कवि कर्म करने का संदेश देता है।
कारण (R): कवि के अनुसार फल की गिनती करने वाला योगी है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।
(ख) A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।
काव्यांश (22)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
जिसके शीश हिमालय का है
उज्ज्वल हिम-किरीट सोहे,
चरण पखारे सिंधु निरंतर,
किसका मन यह न मोहे?
गंगा-यमुना की धाराएँ
अमृत-रस बरसाती हैं,
भाँति-भाँति की भाषा-बोली
एक राग में गाती हैं।
विविध धर्म, पर एक भावना,
विविध वेश, पर एक हृदय,
ऐसी पावन मातृभूमि की
गूँजे जग में जय-जय-जय।
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. ‘हिम-किरीट’ का अर्थ है—
(क) बर्फ़ का मुकुट
(ख) सोने का मुकुट
(ग) बर्फ़ की नदी
(घ) पर्वत की गुफा
2. ‘चरण पखारे सिंधु निरंतर’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) उपमा
(ख) श्लेष
(ग) यमक
(घ) मानवीकरण
3. काव्यांश में भारत की कौन-सी विशेषता प्रमुख रूप से बताई गई है?
(क) केवल नदियाँ
(ख) अनेकता में एकता
(ग) केवल धन-संपदा
(घ) केवल ऊँचे पर्वत
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. ‘विविध धर्म, पर एक भावना’ — भारत की इस सांस्कृतिक विशेषता को स्पष्ट कीजिए।
5. काव्यांश में भारत-भूमि का मानवीकरण किस प्रकार किया गया है?
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. ‘भाँति-भाँति’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) यमक
(ख) उपमा
(ग) रूपक
(घ) पुनरुक्ति प्रकाश
7. ‘किसका मन यह न मोहे?’ का भाव है—
(क) केवल कवि को अच्छी लगती है
(ख) यह किसी को अच्छी नहीं लगती
(ग) कवि को उत्तर नहीं पता
(घ) यह सबका मन मोह लेती है
काव्यांश (23)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
ऊँचे-ऊँचे भवन खड़े हैं,
नींव-शिला पर किसका नाम?
जिसने ईंटें ढोईं सिर पर,
उसको मिला न कोई धाम।
उसके श्रम-सीकर से भीगी
हर दीवार, हर मीनार,
पर उत्सव के दीप जले जब
वह खड़ा रहा बाहर द्वार।
इतिहास लिखेगा जब भी
इन महलों की गाथाएँ,
क्या उसमें पढ़ पाएँगे हम
मज़दूरों की व्यथाएँ?
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. ‘श्रम-सीकर’ का अर्थ है—
(क) थकान
(ख) परिश्रम का पसीना
(ग) मज़दूरी
(घ) मेहनत की कमाई
2. ‘नींव-शिला पर किसका नाम?’ — इस प्रश्न में निहित व्यंग्य है—
(क) भवन बनाने वाले मज़दूर का नाम कहीं नहीं होता
(ख) पत्थर पर नाम लिखना मना है
(ग) नींव दिखाई नहीं देती
(घ) भवन का कोई नाम नहीं
3. उत्सव के समय मज़दूर कहाँ था?
(क) अपने घर पर
(ख) मंच पर
(ग) महल के भीतर
(घ) द्वार के बाहर
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. ‘उसको मिला न कोई धाम’ — विडंबना स्पष्ट कीजिए।
5. कवि के अनुसार इतिहास में किसकी उपेक्षा होती है और क्यों?
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. ‘धाम’ शब्द का अर्थ है—
(क) मंदिर
(ख) मज़दूरी
(ग) घर, निवास
(घ) ईंट
7. काव्यांश का मूल स्वर है—
(क) मज़दूर की उपेक्षा के प्रति संवेदना और व्यंग्य
(ख) उत्सव का आनंद
(ग) महलों की प्रशंसा
(घ) इतिहास की जानकारी
काव्यांश (24)
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए—
घनी निशा है, पर मत भूलो,
इसके पीछे भोर खड़ी,
तम की इस काली चादर में
छिपी हुई है स्वर्ण-लड़ी।
पतझड़ ने जो छीना, उसको
लौटाएगा मधुमास कभी,
आँसू की हर बूँद धरा पर
बन जाएगी हास कभी।
दुख-सुख की इस धूप-छाँव में
जीवन-पथ कटता जाता,
जो आशा का दीप सँजोए,
अंधकार से कब घबराता?
बहुविकल्पीय प्रश्न (1×3=3)
1. ‘घनी निशा’ किसका प्रतीक है?
(क) रात के भोजन का
(ख) नींद का
(ग) वर्षा का
(घ) दुख और निराशा के समय का
2. ‘तम की इस काली चादर’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) यमक
(ख) उपमा
(ग) रूपक
(घ) श्लेष
3. ‘मधुमास’ किस ऋतु को कहते हैं?
(क) शीत ऋतु
(ख) ग्रीष्म ऋतु
(ग) वर्षा ऋतु
(घ) वसंत ऋतु
अतिलघूत्तरात्मक / लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4)
4. ‘आँसू की हर बूँद धरा पर बन जाएगी हास कभी’ — आशय स्पष्ट कीजिए।
5. काव्यांश से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
अतिरिक्त अभ्यास (बहुविकल्पीय)
6. ‘दुख-सुख की धूप-छाँव’ का आशय है—
(क) छाया में बैठना चाहिए
(ख) मौसम बदलता रहता है
(ग) जीवन में सुख और दुख दोनों आते-जाते रहते हैं
(घ) धूप बहुत तेज़ है
7. कथन (A): कवि के अनुसार पतझड़ का दुख कभी समाप्त नहीं होता।
कारण (R): मधुमास पतझड़ के छीने हुए को लौटा देता है।
(क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।
(ख) A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
(ग) A सही है, R गलत है।
(घ) A गलत है, R सही है।
उत्तर कुंजी (उत्तर और कारण)
प्रश्न 1–3 और 6–7 बहुविकल्पीय हैं; प्रश्न 4–5 के आदर्श उत्तर दिए गए हैं — आपका उत्तर इनके भाव से मिलना चाहिए, शब्द अलग हो सकते हैं।
काव्यांश (1) — आसान
1. (घ) फल बरसाता है — दूसरी पंक्ति — ‘पत्थर खाकर फल बरसाए’।
2. (घ) विनम्रता और परिस्थिति के अनुसार ढल जाना — झुककर संकट टाल देता है और फिर उठ खड़ा होता है।
3. (ख) तरुवर जैसा परोपकारी — अंतिम पंक्ति — ‘तरुवर-सा मैं बन दिखलाऊँ’।
4. पेड़ सहनशील है — वह धूप, आँधी और पत्थर सहकर भी सबको छाया और फल देता है। इससे सीख मिलती है कि हम कठिनाई में शिकायत न करें और दूसरों की भलाई में लगे रहें।
5. कवि कहता है कि जीवन में अपने लिए कम चाहें और दूसरों को अधिक दें। यही परोपकार है, जैसा पेड़ बिना कुछ माँगे सबको देता रहता है।
6. (घ) आकाश — नभ = आकाश।
7. (ग) पेड़ की सीख — पूरा काव्यांश पेड़ के गुणों और उनसे मिलने वाली सीख पर है।
काव्यांश (2) — आसान
1. (ग) सबसे पहले उठ जाती है — पहली दो पंक्तियाँ।
2. (क) उपमा — ‘सी’ वाचक शब्द से माँ की तुलना दीपक से — उपमा।
3. (क) बिना कहे मन की बात समझ लेना — पाती = चिट्ठी; यहाँ मन की बात।
4. माँ परिवार की खुशी के लिए अपने सुख त्याग देती है। वह घर को खुशियों से भर देती है, पर स्वयं पीछे रहकर अनदेखी रह जाती है।
5. (1) त्यागमयी — बच्चे के आँसू पोंछकर अपने दुख छिपा लेती है। (2) परिश्रमी और संवेदनशील — सुबह से काम में लगी रहती है और बिना कहे मन की बात समझ लेती है।
6. (ख) पुनरुक्ति प्रकाश — एक ही शब्द की आवृत्ति, अर्थ वही।
7. (क) पी जाती है, अर्थात् छिपा लेती है — ‘अपने आँसू पी जाती है माँ’।
काव्यांश (3) — आसान
1. (ख) अच्छी फसल होती है — सोना = सुनहरी, भरपूर फसल।
2. (क) अन्नदाता — अंतिम भाग — ‘अन्नदाता का अपना चूल्हा’।
3. (घ) किसान का कठिन परिश्रम और उसकी ग़रीबी — परिश्रम और अभाव — दोनों का चित्रण।
4. जो किसान सारे संसार का पेट भरता है, वही ग़रीबी के कारण स्वयं भरपेट भोजन नहीं कर पाता। अन्न उगाने वाला ही अन्न के लिए तरसे — यही विडंबना है।
5. किसान बीज के साथ अपनी आशाएँ भी बोता है — अच्छी फसल होगी, घर में खुशहाली आएगी और बच्चों का भविष्य सुधरेगा।
6. (ग) पुनरुक्ति प्रकाश — शब्द की आवृत्ति।
7. (क) माघ की ठिठुरन में — दूसरी पंक्ति।
काव्यांश (4) — आसान
1. (क) उपमा — ‘सा’ वाचक शब्द — उपमा।
2. (ख) काम को कल पर टालना — ‘कल पर काम न टालो साथी’।
3. (ख) जैसा कर्म, वैसा फल — कर्म और फल का संबंध।
4. घड़ी की सुइयाँ हमें आलस्य छोड़कर उठने, चलने और कुछ सार्थक कर दिखाने की प्रेरणा देती हैं, क्योंकि समय लगातार बीत रहा है।
5. खोया धन मेहनत से फिर कमाया जा सकता है, पर बीता समय कभी वापस नहीं आता। इसलिए समय धन से भी अधिक मूल्यवान है।
6. (ख) खोया समय — अंतिम पंक्ति।
7. (घ) हमेशा — हरदम = हर समय।
काव्यांश (5) — आसान
1. (ख) बादलों की गर्जना — बादलों की गड़गड़ाहट को ढोल-नगाड़े कहा गया है।
2. (घ) पुनरुक्ति प्रकाश — शब्द की आवृत्ति।
3. (ख) पंख फैलाकर नाचता है — चौथी पंक्ति।
4. धरती की प्यास बुझ गई और बगिया फिर हरी-भरी हो गई। बच्चे खुश होकर कागज़ की नावें लेकर गलियों में दौड़ पड़े।
5. दादी के कथन से पता चलता है कि अच्छी वर्षा से इस वर्ष खेत सुनहरी फसल से लहराएँगे। वर्षा ही किसान की समृद्धि का आधार है।
6. (घ) अच्छी फसल की — ‘खेत सुनहरे लहराएँ’।
7. (ग) सूखा हुआ बगीचा — मुरझाई = सूखी।
काव्यांश (6) — आसान
1. (क) दुख में साथ देने वाला — पहली चार पंक्तियाँ।
2. (क) उपमा — ‘जैसा’ वाचक शब्द — उपमा।
3. (ख) मुँह पर मीठी बातें, पीछे से घात — पाँचवीं-छठी पंक्ति।
4. जैसे दर्पण हमारा सही रूप दिखाता है, वैसे ही सच्चा मित्र हमारी कमियाँ बिना छिपाए बताता है और सुधार की राह सुझाता है।
5. कपटी साथी सामने मीठा बोलकर पीठ पीछे नुकसान पहुँचाता है। ऐसे धोखेबाज़ की संगति से अकेला रहना अधिक सुरक्षित और अच्छा है।
6. (घ) धोखे से किया गया वार — घात = छिपकर चोट पहुँचाना।
7. (ग) कठिन समय में राह दिखाए — दीपक = मार्गदर्शक।
काव्यांश (7) — आसान
1. (क) मौन सखा — पहली पंक्ति।
2. (ख) अज्ञान — ज्ञान प्रकाश है, अज्ञान अँधेरा।
3. (घ) पुस्तक — पुस्तक स्वयं बोल रही है।
4. पुस्तक बोलती नहीं, फिर भी सच्चे मित्र की तरह हमेशा साथ रहती है, कभी रूठती नहीं और ज़रूरत पड़ने पर ज्ञान देती है।
5. पुस्तक पढ़कर बालक ज्ञानी, धैर्यवान (धीर) और विचारशील बनता है; उसके मन का अज्ञान रूपी अंधकार दूर हो जाता है।
6. (ख) मित्र — सखा = मित्र।
7. (घ) सागर-पर्वत, तारे, कहानियाँ और गाथाएँ — दूसरा भाग।
काव्यांश (8) — आसान
1. (ख) फिर आगे बढ़ती है — तीसरी-चौथी पंक्ति।
2. (ख) लगन और निरंतर प्रयास — ‘गिरकर उठना, उठकर चलना’।
3. (क) पुनरुक्ति प्रकाश — शब्द की आवृत्ति।
4. छोटी-सी चींटी बार-बार गिरकर भी हार नहीं मानती और लक्ष्य पा लेती है। इस उदाहरण से कवि हमें असफलता से निराश न होने की प्रेरणा देता है।
5. असफलता जीवन का हिस्सा है। गिरने पर फिर उठकर प्रयास जारी रखना ही सफलता का मार्ग है।
6. (ग) निराश होना — मन छोटा करना = उदास/निराश होना।
7. (क) संसार में सफल होना — तरना = पार पाना।
काव्यांश (9) — मध्यम
1. (ग) अंधकार — तम = अँधेरा।
2. (क) जलकर प्रकाश देना — ‘जलना उसका धर्म बना है’।
3. (ख) दूसरों के लिए स्वयं को मिटा देना — होम = आहुति।
4. छोटा-सा प्रयास भी बड़े अंधकार या निराशा को दूर करने में सहायक होता है। इसलिए स्वयं को छोटा समझकर हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।
5. जीवन में आँधी जैसी कठिनाइयाँ आती हैं, पर दृढ़ व्यक्ति उनके सामने डगमगाता नहीं; वह अपना कर्तव्य निभाता रहता है।
6. (ग) त्यागी और साहसी व्यक्ति का — छोटा होकर भी अँधेरे से लड़ता है।
7. (घ) उसके जैसा कोई नहीं है — प्रश्न के रूप में प्रशंसा।
काव्यांश (10) — मध्यम
1. (घ) शहर की भौतिक उन्नति और मन की संकीर्णता का विरोधाभास — बाहर ऊँचाई, भीतर छोटापन।
2. (घ) धुएँ (प्रदूषण) के कारण — ‘धुएँ में सब छिप जाते हैं’।
3. (ख) मन में बहुत-सी आशाएँ लेकर — गठरी = पोटली; यहाँ आशाओं की।
4. शहर के धुएँ में तारे छिप जाते हैं, और गाँव का स्वच्छ आकाश तथा माँ का स्नेह पीछे छूट गया है; इसलिए वे केवल यादों और सपनों में आते हैं।
5. शहर में बाहरी सुविधाएँ, जैसे चौड़ी सड़कें, बहुत हैं, पर जीवन की सही दिशा, अपनापन और सहारा नहीं मिलता; व्यक्ति भटका हुआ अनुभव करता है।
6. (क) शहरी जीवन का अकेलापन — भीड़ में भी अपनापन नहीं।
7. (क) शहर में गाँव की याद — शहर के अनुभवों के बीच गाँव की याद।
काव्यांश (11) — मध्यम
1. (क) कचरा और रसायन डालना — पाँचवीं-छठी पंक्ति।
2. (ख) मानवीकरण — नदी की धारा को मनुष्य की तरह रोते दिखाया।
3. (ख) नदियों को फिर से स्वच्छ बनाने का — ‘नदियों को फिर निर्मल कर दो’।
4. नदियाँ जल देकर मानव जीवन का पालन करती हैं, पर मनुष्य ने उन्हें प्रदूषित करके उनके उपकार का बदला कृतघ्नता से दिया है।
5. (1) नदियों में कचरा और कारख़ानों का रसायन न डाला जाए। (2) किनारों पर पेड़ लगाए जाएँ और लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जाएँ।
6. (क) बहते जल की — ध्वन्यात्मक शब्द।
7. (घ) स्वच्छ — निर्मल = मल रहित।
काव्यांश (12) — मध्यम
1. (ग) वह हर संकट से अधिक साहसी सिद्ध हुआ — संकट उसे हरा न सके।
2. (घ) सैनिक के जागने और त्याग के कारण — अंतिम भाग।
3. (ग) माँ की चिट्ठी — पाँचवीं पंक्ति।
4. वह बर्फ़ीली चोटियों पर रात भर पहरा देता है, त्योहारों पर परिवार से दूर रहता है और आँधी, तूफ़ान, गोली, ओले जैसे खतरों का सामना करता है।
5. सैनिकों के त्याग के कारण ही हम सुरक्षित हैं; इसलिए हमें उनके प्रति कृतज्ञता, सम्मान और गर्व का भाव रखना चाहिए।
6. (क) लोगों का मन प्रसन्न — हर्षित = प्रसन्न।
7. (ख) बर्फ़ीली चोटी पर — पहली पंक्ति।
काव्यांश (13) — मध्यम
1. (घ) मोबाइल फ़ोन — आगे ‘चमकीली इक स्क्रीन’।
2. (ग) बच्चे मोबाइल में व्यस्त हैं — पूरा काव्यांश इसी पर है।
3. (क) स्क्रीन बंद कर मैदान में खेलना — अंतिम भाग।
4. गेंद खेलना, पतंग उड़ाना, आँगन-गलियों में खेलना और दादी से कहानियाँ सुनना — ये सब मोबाइल के कारण छूट गए हैं।
5. कवि चाहता है कि बच्चे आभासी दुनिया छोड़कर प्रकृति, मित्रों और परिवार के बीच वास्तविक जीवन का आनंद लें।
6. (ख) पुनरुक्ति प्रकाश — शब्द की आवृत्ति।
7. (क) बच्चे अब दादी से कहानियाँ नहीं सुनते — मोबाइल ने कहानी सुनने की आदत छीन ली।
काव्यांश (14) — मध्यम
1. (घ) बाबा (पिता) से — पहली पंक्ति।
2. (क) लड़कियाँ घर के काम के अलावा हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं — घर की सीमा से बाहर के अवसर।
3. (ख) पढ़ी-लिखी बेटी दो परिवारों का भला करती है — मायका और ससुराल — दोनों।
4. वह भाई के समान पढ़ने का अवसर चाहती है। यह लड़के-लड़की में भेदभाव के विरुद्ध समान अधिकार की माँग है।
5. बेटियों को भी पढ़ने और सपने पूरे करने का समान अवसर मिलना चाहिए। शिक्षित बेटी परिवार और समाज दोनों को उजाला देती है।
6. (घ) स्वतंत्रता और सपनों के — उड़ने की इच्छा = आगे बढ़ने की इच्छा।
7. (घ) बालिका शिक्षा — बेटी पढ़ने का अवसर माँग रही है।
काव्यांश (15) — मध्यम
1. (क) कठिनाइयाँ भी अंत में सुखद परिणाम देंगी — काँटे = कष्ट, फूल = सफलता।
2. (क) कठोर परिश्रम करने वाले ही महान कार्य करते हैं — छाले = परिश्रम।
3. (क) मानवीकरण — मंज़िल को प्रतीक्षा करते मनुष्य की तरह दिखाया।
4. लक्ष्य उसी को मिलता है जो लगातार प्रयास करता है; जो डर या आलस्य से बैठ जाता है, उसे केवल असफलता मिलती है।
5. सागर जीवन का और तूफ़ान जीवन की बाधाओं का प्रतीक है। साहसी व्यक्ति इन संकटों से टकराकर ही आगे बढ़ता है।
6. (क) नाव खेने का डंडा — पतवार से नाव चलाई जाती है।
7. (क) निरंतर चलते रहना — ‘रुकना मत, थकना मत राही’।
काव्यांश (16) — मध्यम
1. (क) संतान के आने की प्रतीक्षा — प्रतीक्षा का भाव।
2. (क) संतान के फ़ोन या आने की — ‘फ़ोन की घंटी सुनने को’।
3. (ग) समय निकालकर माता-पिता के पास बैठना — अंतिम भाग।
4. संतान के फ़ोन की प्रतीक्षा में माता-पिता इतने व्याकुल हैं मानो उनकी साँसें थम गई हों। यह उनकी गहरी ममता और अकेलेपन को दिखाता है।
5. उन्होंने उँगली पकड़कर चलना सिखाया और अपनी गोद में पाल-पोसकर बड़ा किया तथा दुनिया से परिचय कराया।
6. (ग) बुढ़ापे का — झुर्रियाँ = वृद्धावस्था।
7. (घ) वृद्ध माता-पिता के प्रति संतान का कर्तव्य — पूरा काव्यांश इसी पर।
काव्यांश (17) — कठिन
1. (घ) पूर्व दिशा — प्राची = पूर्व।
2. (ग) मानवीकरण — रात को आभूषण उतारती सुंदरी के रूप में दिखाया।
3. (ख) पक्षियों का समूह — विहग = पक्षी, वृंद = समूह।
4. सूर्य की लाल-सुनहरी किरणें पूर्व दिशा को रंग देती हैं, तारे छिप जाते हैं, कलियाँ खिलने लगती हैं, पक्षी चहचहाते हैं और नदी कल-कल करती बहती है।
5. कलियों को नींद से जागती युवती के रूप में दिखाया गया है (मानवीकरण)। ‘अलसाई आँखें’ से कलियों के धीरे-धीरे खिलने का कोमल और सजीव चित्र बनता है।
6. (ग) रूपक — किरण पर तूलिका (कूँची) का आरोप — रूपक।
7. (घ) आलस्य छोड़कर कर्म-पथ पर बढ़ना — अंतिम दो पंक्तियाँ।
काव्यांश (18) — कठिन
1. (ख) दूसरों के दुख में संवेदनशील होना — तीसरी-चौथी पंक्ति।
2. (ग) रूपक — मनुजता पर उपवन का आरोप।
3. (घ) सुगंधित — सुरभि = सुगंध।
4. दूसरों के साथ बाँटा गया प्रेम, करुणा और सहायता अमर रहती है। जैसे सुगंध चारों ओर फैलती है, वैसे ही परोपकारी का यश संसार में फैलता है।
5. समाज में भेदभाव का अंधकार है। हृदय में प्रेम और करुणा का प्रकाश जलाकर ही यह अंधकार मिट सकता है और सबमें समानता आ सकती है।
6. (ख) वह माटी में मिल जाएगा — छठी पंक्ति।
7. (ग) ऊँच-नीच और भेदभाव से भरा समाज — भेद = भेदभाव।
काव्यांश (19) — कठिन
1. (घ) वसंत — वसंत = ऋतुओं का राजा।
2. (ख) मानवीकरण — धरती को चुनरी ओढ़े स्त्री के रूप में दिखाया।
3. (ग) उपमा — ‘ज्यों’ वाचक से समीर की तुलना मीठी बोली से।
4. पतझड़ में पेड़ पत्तों से खाली हो जाते हैं, पर उसी के बाद वसंत में नए पत्ते आते हैं। अतः हर समाप्ति नए आरंभ का द्वार है — जीवन में भी निराशा के बाद आशा आती है।
5. (1) खेतों में पीली सरसों फूल उठी और आमों पर बौर आ गया। (2) कोयल कूकने लगी तथा भौंरे और तितलियाँ फूलों पर मँडराने लगे।
6. (ग) भौंरा — मधुप = मधु पीने वाला, भौंरा।
7. (घ) नए पत्ते — पल्लव = पत्ता।
काव्यांश (20) — कठिन
1. (ग) सुख-सुविधाओं से भरी पराधीनता — चमकीला, पर बंधन।
2. (क) भूखा रहकर भी स्वतंत्र उड़ना — पाँचवीं-छठी पंक्ति।
3. (क) पराधीनता — पर-वश = दूसरे के अधीन।
4. पक्षी स्वाभिमानी और स्वतंत्रता-प्रेमी है। वह भूख और तूफ़ान सह लेगा, पर अपनी उड़ान अर्थात् स्वतंत्रता सीमित नहीं होने देगा।
5. वही व्यक्ति स्वाधीनता का मूल्य समझता है जिसने पराधीनता का दुख झेला हो, क्योंकि बंधन का कष्ट जानकर ही मुक्ति के सुख का अनुभव होता है।
6. (क) स्वतंत्र जीवन संघर्षपूर्ण होता है — कटीली = कठिन।
7. (क) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है। — R ही A का कारण है।
काव्यांश (21) — कठिन
1. (क) फल की चिंता छोड़कर कर्म करना — पहली दो पंक्तियाँ।
2. (ग) रूपक — कर्म पर भूमि और यज्ञ का आरोप।
3. (ख) झरना — निर्झर = झरना।
4. सूरज और झरना बिना किसी स्वार्थ के प्रकाश और जल देते हैं। इसी तरह मनुष्य को भी बदले की इच्छा के बिना दूसरों के हित में कर्म करना चाहिए।
5. योगी निष्काम भाव से कर्म करता है और फल की चिंता नहीं करता; भोगी केवल अपने लाभ और फल की गिनती में लगा रहता है।
6. (घ) जो कर्म करके भी प्रसन्न रहता है और फल की चिंता नहीं करता — नौवीं-दसवीं पंक्ति।
7. (ग) A सही है, R गलत है। — फल गिनने वाले को कवि ‘भोगी’ कहता है; R गलत है।
काव्यांश (22) — कठिन
1. (क) बर्फ़ का मुकुट — किरीट = मुकुट।
2. (घ) मानवीकरण — सागर को चरण धोते सेवक के रूप में दिखाया।
3. (ख) अनेकता में एकता — अंतिम भाग।
4. भारत में अनेक धर्म, भाषाएँ और वेशभूषाएँ हैं, फिर भी सबके हृदय में देशप्रेम और भाईचारे की एक ही भावना है — यही अनेकता में एकता है।
5. भारत को माँ के रूप में दिखाया गया है, जिसके सिर पर हिमालय का बर्फ़ीला मुकुट है और सागर निरंतर उसके चरण धोता है।
6. (घ) पुनरुक्ति प्रकाश — शब्द की आवृत्ति, अर्थ वही।
7. (घ) यह सबका मन मोह लेती है — प्रश्न के रूप में दृढ़ कथन।
काव्यांश (23) — कठिन
1. (ख) परिश्रम का पसीना — सीकर = पसीने की बूँद।
2. (क) भवन बनाने वाले मज़दूर का नाम कहीं नहीं होता — श्रेय मालिक को, श्रमिक उपेक्षित।
3. (घ) द्वार के बाहर — आठवीं पंक्ति।
4. जो मज़दूर ऊँचे-ऊँचे भवन बनाता है, उसके पास स्वयं रहने को घर नहीं होता। निर्माण करने वाला ही आश्रय से वंचित है — यही विडंबना है।
5. इतिहास महलों और उनके स्वामियों की गाथाएँ लिखता है, पर उन्हें बनाने वाले मज़दूरों के श्रम और दुख का उल्लेख नहीं करता, क्योंकि समाज श्रमिकों को महत्त्व नहीं देता।
6. (ग) घर, निवास — धाम = रहने का स्थान।
7. (क) मज़दूर की उपेक्षा के प्रति संवेदना और व्यंग्य — श्रमिक की पीड़ा।
काव्यांश (24) — कठिन
1. (घ) दुख और निराशा के समय का — निशा = रात; यहाँ कठिन समय।
2. (ग) रूपक — तम पर चादर का आरोप।
3. (घ) वसंत ऋतु — मधुमास = वसंत।
4. आज के दुख और आँसू सदा नहीं रहेंगे; समय बदलने पर वही खुशियों और मुस्कान में बदल जाएँगे।
5. दुख के समय निराश नहीं होना चाहिए। जैसे रात के बाद भोर होती है, वैसे ही कठिनाइयों के बाद सुख आता है; इसलिए आशा बनाए रखनी चाहिए।
6. (ग) जीवन में सुख और दुख दोनों आते-जाते रहते हैं — धूप = दुख, छाँव = सुख।
7. (घ) A गलत है, R सही है। — A गलत है (दुख समाप्त होता है), R सही है।
